'...तो लोग सड़कों पर आ जाएंगे'; FWICE चीफ ने बॉलीवुड में कैमरा के पीछे काम करने वालों को लेकर जताई चिंता
FWICE On Bollywood Workers: ओटीटी की आमद ने जहां दर्शकों को मनोरंजन के असीमित विकल्प दिए हैं, वहीं बॉलीवुड में इसे लेकर एक चिंता भी शुरू हो गई है। इंडस्ट्री में कैमरे के पीछे काम करने वाले वर्कर्स के लिए कई मुश्किलें आ गई हैं। ऐसा दावा FWICE के प्रमुख ने किया है।
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फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने कैमेरे के पीछे काम करने वाले लोगों की स्थिति पर चिंता जाहिर की है। साथ ही कहा कि अगर यही स्थिति रही तो लोग सड़कों पर होंगे। बता दें कि FWICE मनोरंजन जगत में काम करने वाले तकनीशियनों, कारीगरों, कामगारों, कलाकारों और निर्माताओं की अलग अलग यूनियनों के बीच समन्वय का काम करती है। इस फेडरेशन के अध्यक्ष बी एन तिवारी का कहना है कि आज बॉलीवुड में सबसे बड़ी चिंता कैमरे के पीछे काम करने वाले लोगों के हालात हैं।
क्या है कामगारों की समस्या?
बी एन तिवारी ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि काम की कमी, पेमेंट में देरी और लंबे काम के घंटों की वजह से कई वर्कर्स मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म्स और वर्टिकल फिल्मों के बढ़ने से इंडस्ट्री में काम करने का तरीका बदल गया है। इस समस्या के बारे में बात करते हुए तिवारी ने कहा, 'असल में कई बातें हैं। बहुत सारे OTT प्लेटफॉर्म्स खुल गए हैं। वर्टिकल फिल्में बननी शुरू हो गई हैं। उनमें क्वालिटी का कोई मतलब नहीं रह गया है। हर कोई ज्यादा आउटपुट की तलाश में है'।
20 घंटे काम और आठ घंटे की भी दिहाड़ी नहीं
बी एन तिवारी ने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो कैमरे के पीछे काम करते हैं। इनमें स्पॉट बॉय, लाइट मैन, आर्ट डायरेक्टर और छोटे कलाकार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कई लोगों को लंबे समय तक काम करने के बाद भी सही पेमेंट नहीं मिल रहा है। उनके संघर्ष के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'सबसे बड़ा नुकसान मजदूरों की रोज की दिहाड़ी का है। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों से 20 घंटे काम करवाया जा रहा है, जबकि कई मामलों में उन्हें उनके आठ घंटे के काम की बेसिक पेमेंट भी नहीं दी जा रही है।
'ऐसा ही रहा तो बंद हो जाएगी इंडस्ट्री'
तिवारी ने कहा, 'उन्हें आठ घंटे की पेमेंट भी नहीं मिल रही है और उनसे 20-20 घंटे काम करवाया जा रहा है। 50-60% की कटौती हो रही है। कई मजदूर कम पैसे लेने पर मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें काम की जरूरत है और उन्हें अपने परिवारों का पेट भरना है'। बी एन तिवारी ने OTT और डिजिटल प्रोजेक्ट्स में पेमेंट में होने वाली देरी के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि कभी-कभी पेमेंट महीनों बाद आता है और तब तक कंपनी या प्रोड्यूसर का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इंडस्ट्री के भविष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, 'अगर ऐसा ही चलता रहा, तो एक दिन फिल्म इंडस्ट्री बंद हो जाएगी और लोग सड़कों पर आ जाएंगे। स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। तिवारी ने कहा कि फेडरेशन कर्मचारियों तक पहुंचने, उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें इंसाफ दिलाने में मदद करने की कोशिश कर रहा है।