डिजिटल रिव्यू: स्पेशल ऑप्स (वेब सीरीज)
देश में नोटबंदी का एलान हो चुका है। रॉ का चीफ एनालिस्ट अभी एटीएम से बड़ी मुश्किल से ढाई हजार के नोट लेकर निकला है और फोन आता है। फोन पर उसका तैयार किया हुआ दुबई का एक एजेंट है जिसे वहां के अंडरवर्ल्ड में अपना भरोसा स्थापित करने के लिए कश्मीर में आतंकवादियों को एक करोड़ रुपये की नकदी पहुंचाने का काम मिलता है, वह भी नई करेंसी के नोटों में। या फिर, एक दूसरा एजेंट है। विदेश में कही किसी ऊंची जगह पर टेलीस्कोपिक राइफल लिए एक बंदे की खोपड़ी उड़ाने की तैयारी में। चीफ एनालिस्ट का फोन आता है। एजेंट ब्लफ करता है। चीफ एनालिस्ट उसे उसकी लोकेशन समेत ये भी बता देता है कि जिस पर वह निशाना लगाए बैठा है, वह केजीबी (रूसी खुफिया एजेंसी) का एजेंट है। यह है जासूसी फिल्मों के मास्टर नीरज पांडे की स्पेशल ऑप्स। इस सीरीज को देखते हुए आपको देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अक्स सीरीज के मुख्य किरदार हिम्मत सिंह में नजर आ सकता है। और, अगर ऐसा होता है तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है।
Special Ops Review: अंत तक बांधने में सफल नीरज पांडे की पहली वेब सीरीज, दिखा वेडनेसडे बेबी वाला हुनर
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कागज के फूल, गाइड, मुगल ए आजम, हम किसी से कम नहीं, चौदहवीं का चांद, कुर्बानी, शतरंज के खिलाड़ी और शोले, कहने को तो ये हिंदी सिनेमा की आठ कल्ट फिल्में हैं लेकिन स्पेशल ऑप्स के आठ एपीसोड का नामकरण और विस्तार नीरज ने इन्हीं की थीम पर किया है। कहानी, निर्देशन, अभिनय, संगीत और तकनीकी पक्ष, इन पांचों कसौटियों पर ये बिल्कुल खरी उतरती है।
स्पेशल ऑप्स की कहानी है रॉ एजेंट हिम्मत सिंह की जिसके बारे में शो की शुरुआत में ही पता चल जाता है कि ये शख्स कराची में भी महीनों रह चुका है। इस पर इल्जाम ये है कि इसने देश के खजाने के 28 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं और इसका हिसाब इसके पास नहीं है। वह कहता भी है, ‘जब हिसाब रखना न आता हो तो हिसाब देना बहुत मुश्किल हो जाता है।’ उसके खिलाफ जांच बैठी है और जांच समिति के सामने वह इन खर्चों को गिनाने के क्रम में अपने ऑपरेशन की कहानी सुनाता है, ये कहानी ही स्पेशल ऑप्स का विस्तार है।
कहानी का मूल सूत्र ये है कि संसद पर हुए आतंकी हमले में हिम्मत सिंह को एक छठे आतंकी के होने का विश्वास है और उसकी खोज में वह पिछले 19 साल से लगा हुआ है। सीरीज की रिसर्च पर भी काफी मेहनत की गई दिखती है। संसद पर हमले का दृश्य दिखाते हुए असल घटना की तरह यहां भी एक महिला कांस्टेबल शहीद होती दिखाई जाती है। दुबई में बैठे लोगों के रिश्ते हिंदी सिनेमा के शाहरुख और एक बड़ी हीरोइन से बताए जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के एलान को भारत में रात के आठ बजे के हिसाब से दुबई में शाम 6.30 बजे ही दिखाया जाता है।
अभिनय के लिहाज से के के मेनन ने कमाल की एक्टिंग की है। देश के दुश्मनों को तलाशते एक रॉ एजेंट की कैसे अपनी बेटी से उसके बॉयफ्रेंड के बारे में पूछताछ करते बोलती बंद हो जाती है, देखने लायक है। या फिर, अपनी पत्नी से उसके अंतरंग क्षणों के दृश्य भी खासे प्रभावशाली बन पड़े हैं। अजमल कसाब के उसकी शिष्टता की तारीफ करते ही कैसे वह तुरंत खालिस पुलिसिया भाषा में उससे बात करता है, वह भी देखने लायक है।