रंग, पैटर्न और पर्सनैलिटी: GEN-Z को भाया मैक्सिमलिज्म? जानें ‘Less is More’ कैसे बन रहा ‘Less is Bore’ ट्रेंड
Gen-Z के बीच मैक्सिमलिज्म तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बोल्ड रंग, आकर्षक पैटर्न, वॉलपेपर और पर्सनलाइज्ड डेकोर के जरिए युवा अपनी अलग पहचान दिखाना चाहते हैं। नई पीढ़ी के लिए घर और फैशन सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने का माध्यम बन चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अगर आपको लगता है कि जेन-जी सिर्फ नए स्लैंग बनाने, रील्स देखने या सोशल मीडिया ट्रेंड्स फॉलो करने में बिजी रहती है, तो शायद आप इस पीढ़ी को अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। यह पीढ़ी सिर्फ ट्रेंड्स फॉलो नहीं करती, बल्कि अपनी पहचान को अपने अंदाज में गढ़ती है। वह यह बताने से डरती नहीं कि उसे क्या पसंद है, वह कैसी दिखना चाहती है।
आज के युवाओं के कमरे, कपड़े, मोबाइल कवर, इंस्टाग्राम प्रोफाइल और यहां तक कि उनकी सोच भी पहले से कहीं ज्यादा रंगीन, बोल्ड और एक्सप्रेसिव दिखाई देती है। सादगी और खालीपन वाली मिनिमल लाइफस्टाइल के बजाय जेन-जी अब रंगों, पैटर्न, टेक्सचर, पोस्टर, एक्सेसरीज और पर्सनल टच से भरी दुनिया को अपना रही है। उनके लिए 'ज्यादा' अब ओवर नहीं, बल्कि ओरिजिनल है।
यही वजह है कि जेन-जी के बीच मैक्सिमलिज्म तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह सिर्फ सजावट या फैशन का ट्रेंड नहीं, बल्कि अपनी पहचान, मूड, पसंद और पर्सनैलिटी को खुलकर दिखाने का तरीका बन गया है।
क्या है मैक्सिमलिज्म?
मैक्सिमलिज्म शब्द लैटिन शब्द Maximus से आया है, जिसका अर्थ है ‘सबसे बड़ा’ या ‘अधिकतम’। आसान शब्दों में कहें तो मैक्सिमलिज्म का मतलब है- रंगों, डिजाइनों, पैटर्न, चीजों और भावनाओं को दबाकर नहीं, बल्कि खुलकर दिखाना। जहां मिनिमलिज्म कहता है 'कम ही काफी है', वहीं मैक्सिमलिज्म कहता है 'जो आपका है, उसे पूरी चमक के साथ दिखाओ।'

जेन-जी की दुनिया में मैक्सिमलिज्म का अर्थ क्या?
जेन-जी के लिए मैक्सिमलिज्म का मतलब होता है- अपने शौक, पसंद और व्यक्तित्व को बिना किसी रोक-टोक के दिखाना। चाहे फैशन हो, कमरे की सजावट हो या सोशल मीडिया प्रोफाइल। जेन-जी हर जगह अपनी अलग पहचान छोड़ना चाहते हैं। उनके लिए चमकीले रंग, अलग-अलग पैटर्न और बोल्ड स्टाइल किसी दिखावे का हिस्सा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का प्रतीक हैं।
मैक्सिमलिज्म Vs मिनिमलिज्म
एक समय था जब फैशन की दुनिया में मैक्सिमलिज्म का बोलबाला था। खासकर भारत में। रंग-बिरंगे कपड़े, अलग-अलग पैटर्न, बड़े एक्सेसरीज और यूनिक स्टाइल लोगों की पहली पसंद हुआ करते थे। लेकिन इसके बाद मिनिमलिज्म और 'क्वाइट लग्जरी' का दौर आया। जहां सादगी, हल्के रंग और सिंपल लुक को स्टाइलिश माना जाने लगा।

हालांकि अब तस्वीर बदल रही है। जेन-जी एक बार फिर मैक्सिमलिज्म को अपनाकर फैशन के पुराने नियमों को चुनौती दे रही है। मैक्सिमलिज्म के लिए जेन-जी की दीवानगी सिर्फ एक फैशन के तौर पर नहीं हैं, इसमें उनकी अलग सोच है। नई पीढ़ी खुद को मिलेनियल्स से अलग दिखाना चाहती है। यही वजह है कि वह मिनिमलिज्म की बजाय मैक्सिमलिज्म को अपना रही है।
वॉलपेपर से वुड पैनल तक तय कर रहे GEN-Z
- 56% GEN-Z मैक्सिमलिज्म को पंसद करते हैं।
- 23% GEN-Z ही मिनिमलिज्म से आकर्षित हैं।
- 38% युवा बोल्ड रंगों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
- 31% GEN-Z ने वॉलपेपर को अपना पसंद बताया।
- 30% युवा ने स्टेन्ड ग्लास खिड़कियों को अच्छा बताया।
- 26% युवाओं ने वुड पैनलिंग को आकर्षक माना।
ये तीनों डिजाइन अन्य किसी भी पीढ़ी की तुलना में GEN-Zके बीच अधिक लोकप्रिय पाए गए।
‘Less is Bore’: सादगी नहीं, अब बोल्ड पहचान चाहती है GEN-Z
GEN-Z के लिए मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल अब उतनी आकर्षक नहीं रही। उनका मानना है कि जब हर चीज बहुत ज्यादा सादी, व्यवस्थित और एक जैसी दिखने लगे, तो उसमें इंसान की अपनी पहचान कहीं खो जाती है। सफेद दीवारें, कम सामान, खाली स्पेस और एक जैसे इंटीरियर उन्हें शांत तो लग सकते हैं, लेकिन दिलचस्प नहीं। इसी सोच से GEN-Z ने मिनिमलिज्म के पुराने मंत्र ‘Less is More’ को पलटकर नया अंदाज दिया है ‘Less is Bore’। यानी कम चीजें रखना अब हर किसी के लिए स्टाइल नहीं, कई बार बोरियत की निशानी भी हो सकता है।
यही वजह है कि नई पीढ़ी अब ऐसे घर, कपड़े और लाइफस्टाइल पसंद कर रही है, जहां रंगों की भरमार हो, दीवारों पर आकर्षक वॉलपेपर हों, अलग-अलग डिजाइन का फर्नीचर हो और हर कोना उनकी पसंद और पर्सनैलिटी की कहानी कहता हो। उनके लिए कमरा सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि खुद की अलग पहचान बनाने का कैनवास है। कौन-सा पोस्टर दीवार पर लगेगा, कौन-सा कुशन सोफे पर रहेगा, कौन-सा रंग मूड को दिखाएगा, जेन-जी इन छोटी-छोटी चीजों से भी अपनी पहचान बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव बताता है कि नई पीढ़ी तयशुदा फैशन और डिजाइन नियमों से आगे बढ़ रही है। वे अब यह नहीं देखना चाहते कि 'ट्रेंड में क्या है', बल्कि यह तय करना चाहते हैं कि 'मेरे जैसा क्या है'?

लॉकडाउन ने बदला घरों को देखने का नजरिया
इस ट्रेंड को बढ़ाने में कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की भी बड़ी भूमिका मानी जाती है। जब लोग लंबे समय तक घरों में रहने को मजबूर हुए, तब घर सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा, बल्कि पढ़ाई, काम, आराम, मनोरंजन और भावनात्मक सुकून का केंद्र बन गया। ऐसे में युवाओं ने अपने आसपास के माहौल को ज्यादा रंगीन, जीवंत और प्रेरणादायक बनाने की कोशिश शुरू की।
विशेषज्ञों के अनुसार, उस समय दुनिया अनिश्चितता और तनाव से भरी हुई थी। ऐसे माहौल में जेन-जी ने अपने कमरों और घरों को ऐसी जगह में बदलना शुरू किया, जहां उन्हें सुकून, खुशी और गुड वाइब्स मिल सकें। रंगीन लाइट्स, फोटो वॉल, पौधे, पोस्टर, हैंडमेड सजावट और अलग-अलग टेक्सचर उनके लिए सिर्फ डेकोरेशन नहीं रहे, बल्कि मानसिक राहत का जरिया बन गए।
बाजार भी समझ रहा है जेन-जी की पसंद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रांड्स भी इस बदलाव को तेजी से समझ रहे हैं। युवाओं की अलग-अलग पसंद और पर्सनल स्टाइल को देखते हुए कंपनियां अब ज्यादा कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड विकल्प पेश कर रही हैं। फैशन, होम डेकोर और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स अब केवल ट्रेंड्स का पालन करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों की कहानी, पसंद और व्यक्तित्व को दिखाने का माध्यम बन रहे हैं।
आज युवा ऐसा सामान चाहते हैं जो सिर्फ सुंदर न दिखे, बल्कि उनसे जुड़ा हुआ भी लगे। यही कारण है कि यूनिक प्रिंट्स, बोल्ड कलर्स, मिक्स-मैच फैशन, हैंडमेड प्रोडक्ट्स और पर्सनलाइज्ड डेकोर की मांग बढ़ रही है। अब बाजार में वही चीज ज्यादा ध्यान खींचती है, जो अलग दिखे और किसी व्यक्ति की अपनी कहानी से जुड़ सके।