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Gorakhpur News: सरकारी योजनाओं के लाभ का लालच देकर खुलवाते थे बैंक खाते, तीन आरोपी गिरफ्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sat, 04 Apr 2026 02:30 AM IST
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सार

एसपी ने बताया कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई खातों में साइबर अपराध कर चुका है। प्रारंभिक जांच में लगभग 50 पीड़ितों की पहचान हुई है, जबकि वास्तविक संख्या और बड़ी होने की आशंका है। आरोपियों से बरामद सभी इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल साक्ष्यों को कब्जे में लेकर उसकी जांच की जा रही है।

Three arrested for luring people to open bank accounts in Gorakhpur by promising benefits of government scheme
गिरफ्तार तीनों आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

बेलघाट थाना पुलिस ने सरकारी योजनाओं का लाभ देने का लालच देकर ग्रामीणों के खाते खुलवाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों के पास से 39 चेकबुक, 35 एटीएम कार्ड, 19 पासबुक, 15 मुहर, आठ आधार कार्ड, दो वोटर कार्ड, छह पैन कार्ड, एक मेट्रो कार्ड, एक वाहन आरसी कार्ड, दो पासपोर्ट, तीन डायरी, छह क्यूआर कोड व सात मोबाइल बरामद किए गए हैं।

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आरोपियों की पहचान बेलघाट के भभया निवासी अभिषेक शुक्ला, बिहार के औरंगाबाद गोह निवासी सतीश कुमार गुप्ता और नीरज कुमार खत्री के रूप में हुई है। शुक्रवार को कम्हरिया रोड से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

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एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी ने बताया कि आरोपी ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के लाभ का लालच देकर बैंक में करेंट अकाउंट खुलवाते थे। इसके बाद एटीएम कार्ड, पासबुक और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर खाते में जमा राशि निकाल लेते थे। गिरोह के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर 27 शिकायतें दर्ज हैं। शुरुआती जांच में लगभग 55 लाख रुपये लोन होल्ड किए गए।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि सभी लेन-देन शशि रंजन कुमार (औरंगाबाद, बिहार) के निर्देशानुसार होते थे। प्रति खाता उन्हें 17 हजार रुपये का कमीशन मिलता था। आरोपियों ने बताया कि मोबाइल फोन के माध्यम से ही साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

जांच में पता चला कि आरोपी डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने और छिपाने की कोशिश कर रहे थे। मोबाइल में पासवर्ड ब्लॉक, चैट डिलीट और ऑडियो कॉल डिलीट करने जैसी प्रवृत्ति ने संकेत दिया कि आरोपियों ने सबूत नष्ट करने की कोशिश की।

बरामद डायरी और मोबाइल की जांच में बैंक खातों के विवरण, रोजाना खर्च और साइबर अपराध से प्राप्त धन का हिसाब मिला। आरोपियों ने बताया कि वे लालच में आकर साइबर फ्रॉड में शामिल हुए थे।

एसपी ने बताया कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई खातों में साइबर अपराध कर चुका है। प्रारंभिक जांच में लगभग 50 पीड़ितों की पहचान हुई है, जबकि वास्तविक संख्या और बड़ी होने की आशंका है। आरोपियों से बरामद सभी इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल साक्ष्यों को कब्जे में लेकर उसकी जांच की जा रही है।

इंटरनेट बैंकिंग के जरिये करते थे ठगी
जांच में पता चला कि गिरोह लगभग एक ही रणनीति अपनाता था। गिरोह लगातार ग्रामीणों के खातों में एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर धन निकालता और उसका हिस्सा आपस में बांटता था। आरोपी स्वीकार करते हैं कि उन्हें लालच में आकर शशि रंजन के साथ यह काम करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अब तक कई खातों में साइबर अपराध कर चुका है।
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