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UP: वाणिज्य कर कार्यालय में लगी भीषण आग, वर्षों पुराने रिकॉर्ड नष्ट- शार्ट सर्किट या साजिशन आग? होगी जांच
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jan 2026 11:04 AM IST
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सार
वाणिज्य कर भवन में आग लगने के बाद एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने भवनों में वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच जरूरी है। साथ ही फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और अग्निशमन उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आयकर भवन में लगी आग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
तारामंडल स्थित वाणिज्य कर कार्यालय भवन में शुक्रवार देर रात अचानक लगी भीषण आग की चपेट में भवन की पहली मंजिल पूरी तरह जल गई। इस दौरान वर्षों पुराने सरकारी रिकॉर्ड, टैक्स से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, फर्नीचर, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल गए।
गनीमत रहा कि घटना के समय कार्यालय बंद था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, लेकिन जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
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गनीमत रहा कि घटना के समय कार्यालय बंद था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, लेकिन जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब एक बजे भवन की पहली मंजिल से अचानक धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। कुछ ही देर में आग की तेज लपटें निकलने लगीं। राहगीरों और आसपास के लोगों ने इसकी सूचना तत्काल अग्निशमन विभाग और रामगढ़ताल थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आवागमन नियंत्रित किया ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो। अग्निशमन कर्मियों ने करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, तब तक कार्यालय में रखा अधिकांश सामान जल चुका था।
पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आवागमन नियंत्रित किया ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो। अग्निशमन कर्मियों ने करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, तब तक कार्यालय में रखा अधिकांश सामान जल चुका था।
भवन में लगी आग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आग की भयावहता को देखते हुए दमकल कर्मियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी ताकि आग अन्य मंजिलों या आसपास के हिस्सों तक न फैले। समय रहते आग पर नियंत्रण पाने के लिए नीचे के तल सुरक्षित रह गए।
आग की सूचना मिलते ही वाणिज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है लेकिन जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
आग की सूचना मिलते ही वाणिज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है लेकिन जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
इसी को देखते हुए डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर एडीएम सिटी की अगुवाई में पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। टीम में अग्निशमन, विद्युत और वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी शामिल हैं जो घटना केकारणों और नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे।
शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है। आग समय रहते नियंत्रित कर लिया गया है जिससे बड़ा हादसा बच गया। पुलिस भी अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है और हर पहलू को खंगाला जा रहा है। हालांकि, विस्तृत जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी: संतोष राय, सीएफओ
शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है। आग समय रहते नियंत्रित कर लिया गया है जिससे बड़ा हादसा बच गया। पुलिस भी अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है और हर पहलू को खंगाला जा रहा है। हालांकि, विस्तृत जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी: संतोष राय, सीएफओ
अंदर लगी आग बुझाते
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अपीलीय दस्तावेज भी जले
वाणिज्य कर विभाग के सूत्रों ने बताया कि आग की चपेट में व्यापारियों और विभाग से जुड़े कुछ अपीलीय दस्तावेज भी जल गए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इससे अपील की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। व्यापारियों की ओर से अपील के दौरान जमा किए गए बांड और अन्य आवश्यक कागजात विभाग और अधिवक्ताओं के पास सुरक्षित हैं, जिससे सुनवाई की फाइलें दोबारा तैयार की जा सकेंगी।
सरकारी रिकॉर्ड के नुकसान पर चिंता
आग में जले सरकारी रिकॉर्ड और टैक्स से जुड़े दस्तावेजों को लेकर विभागीय अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद होने की बात कही जा रही है, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप नहीं होगा। इसके बावजूद भौतिक फाइलों के नष्ट होने से विभाग को अस्थायी रूप से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वाणिज्य कर विभाग के सूत्रों ने बताया कि आग की चपेट में व्यापारियों और विभाग से जुड़े कुछ अपीलीय दस्तावेज भी जल गए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इससे अपील की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। व्यापारियों की ओर से अपील के दौरान जमा किए गए बांड और अन्य आवश्यक कागजात विभाग और अधिवक्ताओं के पास सुरक्षित हैं, जिससे सुनवाई की फाइलें दोबारा तैयार की जा सकेंगी।
सरकारी रिकॉर्ड के नुकसान पर चिंता
आग में जले सरकारी रिकॉर्ड और टैक्स से जुड़े दस्तावेजों को लेकर विभागीय अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद होने की बात कही जा रही है, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप नहीं होगा। इसके बावजूद भौतिक फाइलों के नष्ट होने से विभाग को अस्थायी रूप से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फायर सेफ्टी पर फिर उठ रहे सवाल
वाणिज्य कर भवन में आग लगने के बाद एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने भवनों में वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच जरूरी है। साथ ही फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और अग्निशमन उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आरटीओ दफ्तर में भी लगी थी, जल गए थे डीएल के रिकॉर्ड
आरटीओ दफ्तर में भी अप्रैल 2003 में रात में ही आग लगी थी और ड्राइविंग अनुभाग में सारा रिकॉर्ड जल गया था। उस दौरान रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ था। बाद में आवेदकों से डीएल की फोटो कॉपी लेकर उसे सत्यापित करके नया डीएल जारी किया गया था।
वाणिज्य कर भवन में आग लगने के बाद एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने भवनों में वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच जरूरी है। साथ ही फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और अग्निशमन उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आरटीओ दफ्तर में भी लगी थी, जल गए थे डीएल के रिकॉर्ड
आरटीओ दफ्तर में भी अप्रैल 2003 में रात में ही आग लगी थी और ड्राइविंग अनुभाग में सारा रिकॉर्ड जल गया था। उस दौरान रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ था। बाद में आवेदकों से डीएल की फोटो कॉपी लेकर उसे सत्यापित करके नया डीएल जारी किया गया था।