सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Railway Fake Recruitment Scam exposed Inter-Pass Mastermind Became Crorepati Worked With Exam Agency

रेलवे फर्जी भर्ती: पांच साल में करोड़पति बना अनिल... इंटर पास मास्टरमाइंड, परीक्षा कराने वाली एजेंसी में नौकरी

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 11 Jan 2026 04:07 PM IST
विज्ञापन
सार

गोरखपुर में रेलवे फर्जी भर्ती का खुलासा हुआ है। फर्जी भर्ती का मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ल उर्फ अनिल पांडेय पांच साल में करोड़ों का मालिक बन गया। इंटर पास मास्टरमाइंड परीक्षा कराने वाली एजेंसी में नौकरी करता था। वहीं से बिहार के गिरोह के संपर्क में आया।

Railway Fake Recruitment Scam exposed Inter-Pass Mastermind Became Crorepati Worked With Exam Agency
बांसगांव की फुलहर गांव में राघवेंद्र शुक्ला उर्फ अनिल पांडेय का मकान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

गोरखपुर में रेलवे में फर्जी भर्ती के मामले के मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ल उर्फ अनिल पांडेय ने पांच साल में ही करोड़ों की संपत्ति हासिल कर ली। यह भी पता चला है कि इंटर पास अनिल ने रेलवे भर्ती की परीक्षा कराने वाली एजेंसी में नौकरी की। 
Trending Videos


इसी दौरान वह फर्जीवाड़ा करने वाले बिहार के गिरोह के संपर्क में आ गया। बिहार में फर्जीवाड़े में पकड़े गए दो युवकों के जरिये अनिल का नाम सामने आया तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम उसकी तलाश में जुट गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


अनिल बांसगांव क्षेत्र के फुलहर गांव का रहने वाला है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने बृहस्पतिवार को अनिल पांडेय के बांसगांव स्थित फुलहर गांव स्थित मकान में छापा मारकर करीब आठ घंटे तक उसके भाई और अन्य से पूछताछ की थी। 

पूछताछ के दौरान ईडी ने आय से अधिक संपत्ति की जांच-पड़ताल की। परिजनों से पूछताछ में पता चला कि अनिल ने संस्कृत विद्यालय अम्मरपुर, बांसगांव से कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज, बांसगांव में स्नातक में प्रवेश लिया लेकिन पढ़ाई छोड़ दी।

रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा कराने वाली एजेंसी में काम करता था अनिल
बताया जा रहा है कि इसी बीच गांव के एक ही एक युवक से उसकी नजदीकियां बढ़ गईं, जो रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा कराने वाली एक एजेंसी में काम करता था। अनिल भी उसी के मार्फत नौकरी करने लगा। 

 

बांसगांव कस्बे में खुद को बताता था प्रॉपटी डीलर
सूत्रों के मुताबिक, यहीं से उसका संपर्क नौकरी में जालसाजी करने वालों से गैंग से हो गया। इसके बाद उसका गांव आना-जाना कम हो गया। जब भी वह आता तो गांव और बांसगांव कस्बे में खुद को प्रॉपटी डीलर बताता था। पांच साल के भीतर उसने कराड़ों की संपत्ति बनाई और उसका रहन-सहन भी बदल गया।

गांव के लोगों का कहना है कि जब भी वह गांव आता था, लग्जरी गाड़ी में कुछ लोग के साथ रहते थे। हर बार गाड़ी भी बदल-बदल कर आता था। ईडी के छापे के बाद बांसगांव कस्बे में उसे लेकर तरह-तरह की चर्चा है।
 

दो-तीन गांवों के कुछ युवकों के खाते में भेजता था रुपये
अनिल पांडेय ने अपने गांव के अलावा दो-तीन गांवों के युवकों से संपर्क भी साधा था। जब भी वह गांव आता तो कुछ युवक उससे मिलते थे। सूत्रों के मुताबिक, वह कुछ युवकों के खाते में रुपये भेजता था और कमीशन देकर बाकी रुपये ले लेता था।

ईडी ने जांच के दौरान उसके नाम के खातों के अलावा परिवार के सभी सदस्यों के खातों की फोटो कॉपी ली है। अब मिलान किया जाएगा कि रुपये कहां और कब ट्रांसफर हुए हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed