{"_id":"696fe1eb7d365dedbd00f0cb","slug":"aiims-doctors-learn-the-method-of-robotic-knee-and-hip-surgery-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1204377-2026-01-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"एम्स : चिकित्सकों ने जानी घुटने एवं कूल्हे के रोबोटिक सर्जरी की विधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एम्स : चिकित्सकों ने जानी घुटने एवं कूल्हे के रोबोटिक सर्जरी की विधि
विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos
- ऑस्ट्रेलिया के प्रो क्रॉफर्ड ने डॉक्टरों को रोबोटिक सर्जरी के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की ओर से मंगलवार को घुटना एवं कूल्हा रोबोटिक सर्जरी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने चिकित्सा क्षेत्र में उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार के लिए रोबोटिक सर्जरी जैसे उपचार की नई विधियों की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया के प्रो. क्रॉफर्ड ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से इम्प्लांट की सटीक पोजिशनिंग, बेहतर एलाइनमेंट और सॉफ्ट टिशू बैलेंसिंग संभव होती है, जो पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में बेहतर एवं दीर्घकालिक परिणाम प्रदान करती है। रोबोटिक तकनीक में मरीज की व्यक्तिगत शारीरिक संरचना के अनुसार पूर्व-ऑपरेटिव योजना बनाई जाती है और सर्जरी के दौरान रियल टाइम फीडबैक प्राप्त होता है, जिससे सर्जिकल त्रुटियों की आशंका कम हो जाती है।
इस दौरान आयोजन अध्यक्ष डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. अनिल मीणा, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. अनिल मीणा, डॉ. श्रीशा, सहायक प्राध्यापक व डॉ. सुहास मॉल आदि लोग मौजूद रहे।
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की ओर से मंगलवार को घुटना एवं कूल्हा रोबोटिक सर्जरी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने चिकित्सा क्षेत्र में उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार के लिए रोबोटिक सर्जरी जैसे उपचार की नई विधियों की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया के प्रो. क्रॉफर्ड ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से इम्प्लांट की सटीक पोजिशनिंग, बेहतर एलाइनमेंट और सॉफ्ट टिशू बैलेंसिंग संभव होती है, जो पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में बेहतर एवं दीर्घकालिक परिणाम प्रदान करती है। रोबोटिक तकनीक में मरीज की व्यक्तिगत शारीरिक संरचना के अनुसार पूर्व-ऑपरेटिव योजना बनाई जाती है और सर्जरी के दौरान रियल टाइम फीडबैक प्राप्त होता है, जिससे सर्जिकल त्रुटियों की आशंका कम हो जाती है।
इस दौरान आयोजन अध्यक्ष डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. अनिल मीणा, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. अनिल मीणा, डॉ. श्रीशा, सहायक प्राध्यापक व डॉ. सुहास मॉल आदि लोग मौजूद रहे।
