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UP: अंशिका ने कानून के खिलाड़ी CO को भी फंसाया था रील के खेल में; युवती ने अस्पताल मैनेजर पर इसलिए चलाई गोली

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 22 Jan 2026 05:18 PM IST
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सार

गोरखपुर में अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा ने रंगदारी न देने पर निजी अस्पताल के मैनेजर पर विशाल मिश्रा पर गोली चलाई थी। बचाव में विशाल के पीछे हट जाने से गोली उसके दोस्त अमिताभ को जा लगी। विशाल की तहरीर पर पुलिस ने अंशिका सिंह और उसके साथी को कोर्ट में पेश किया जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। 

Anshika had fired a gun at hospital manager to extort money but bullet hit her friend instead in gorakhpur
gorakhpur crime - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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गोरखपुर के सिंघड़िया में अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर बीते पांच साल में दुष्कर्म के फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर करीब डेढ़ सौ लोगों से धनउगाही कर चुकी है। हरपुर-बुदहट क्षेत्र के झुड़िया बाबू गांव की रहने वाली अंशिका के जाल में वर्तमान में अयोध्या में तैनात एक सीओ सहित शहर में तैनात 15 पुलिसकर्मी भी फंस चुके थे। वह मैसेंजर के जरिये लोगों से संपर्क बढ़ाती थी।
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पुलिस की जांच में पता चला है कि वर्ष 2021 में अंशिका ने सबसे पहले सोपरा देवरिया के रहने वाले राज विश्वकर्मा के खिलाफ दुष्कर्म, धमकी और पॉक्सो एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सुलह के नाम पर उसने लाखों रुपये ऐंठे। वर्ष 2023 में वह संतकबीरनगर के थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र में किराए के मकान में रहने लगी थी। 
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अंशिका के कमरे में देर रात तक लड़कों को आता देख मकान मालिक गुड़िया पीटर ने एसपी संतकबीरनगर को प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी। मकान मालिक ने कमरा खाली करने को कहा तो अंशिका ने दो लाख रुपये की मांग की। इसके बाद मकान में सीसीटीवी कैमरा लगवाने पर वह कमरा खाली कर गई थी।
 

इसी तरह संतकबीरनगर के डीघा बाईपास निवासी सूरज सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ अंशिका ने मारपीट, धमकी, गाली-गलौज, दुष्कर्म के आरोप के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कराया था। इसके बाद वह सूरज सिंह से सुलह कर धनउगाही के लिए जेल तक पहुंच गई थी। 
 

'फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये वसूले थे'
बताया जा रहा है कि जब सूरज ने रुपये देकर सुलह नहीं की तो उसके जेल से छूटने के एक सप्ताह बाद ही अंशिका ने दुष्कर्म की नई रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। अंशिका ने खलीलाबाद के ही कसैला निवासी प्रियांशु सिंह को भी फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये वसूले थे। प्रियांशु के पिता जगन्नाथ सिंह ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

गीडा थाने के दरोगा से की थी वसूली
जांच में पता चला है कि मैसेंजर एप के जरिये अंशिका ने अयोध्या में तैनात एक सीओ सहित करीब 15 पुलिसकर्मियों से संपर्क कर वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग कर ली थी और दुष्कर्म के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर धन उगाही की। कुछ दिन पहले ही गीडा थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक से इसी तरह की बातचीत के बाद उसने धन की मांग की थी।

एक सप्ताह पहले थाने में चली करीब पांच घंटे की पंचायत के बाद कैश और सोने की चेन देकर मामले को रफा-दफा किया गया था। सूत्रों के मुताबिक अंशिका के मोबाइल में कई लोगों से वीडियो कॉल और चैट की रिकॉर्डिंग मिली है। पीड़ितों में आम लोग, सीओ रैंक के अधिकारी और कुछ नेता भी शामिल हैं।

अंशिका ने रंगदारी के लिए अस्पताल मैनेजर पर चलाई थी गोली, लगी दोस्त को
गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र के सिंघड़िया चौराहे पर अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा ने रंगदारी न देने पर निजी अस्पताल के मैनेजर पर विशाल मिश्रा पर गोली चलाई थी। बचाव में विशाल के पीछे हट जाने से गोली उसके दोस्त अमिताभ को जा लगी। 

 

विशाल की तहरीर पर पुलिस ने हरपुर-बुदहट क्षेत्र के झुड़िया की रहने वाली अंशिका सिंह और उसके साथी देवरिया जिले के बरहज निवासी बंटी उर्फ आकाश वर्मा को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम जुटी हुई है। घायल अमिताभ का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

 

खोराबार थाना क्षेत्र के जंगल सीकरी, जमुना टोला निवासी विशाल मिश्रा ने पुलिस को बताया है कि वह इंजीनियरिंग कॉलेज क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में बतौर मैनेजर कार्यरत है। विशाल के मुताबिक कुछ दिनों पूर्व अंशिका और बंटी अस्पताल आए थे। 
 

बातचीत में दोनों ने उसका मोबाइल नंबर ले लिया। कुछ दिन बाद अंशिका दोबारा बंटी के साथ अस्पताल पहुंची और पिस्टल दिखाकर धमकाते हुए 12 हजार रुपये वसूल लिए। आरोप है कि इस दौरान दोनों ने जान से मारने और दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी।
 

विशाल ने पुलिस को बताया है कि मंगलवार को वह अपने दोस्त अमिताभ और शैलेश निषाद के साथ करजहा क्षेत्र में मौजूद था। इसी दौरान अंशिका सिंह ने फोन कर 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगी और बताए गए स्थान पर पैसे लेकर नहीं पहुंचने पर उसकी और परिवार की हत्या की धमकी दी। इसके बाद कई बार कॉल करके धमकाया था।
 

रुपये कम मिलने पर चला दी गोली
विशाल का कहना है कि वह 20 हजार रुपये लेकर मंगलवार की शाम करीब पांच बजे अमिताभ व शैलेष के साथ सिंघड़िया मोड़ स्थित मॉडल शॉप पर पहुंचा था। वहां अंशिका सिंह, बंटी वर्मा और उनके चार-पांच अन्य साथियों ने रकम कम होने की बात कहते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। 
 

विशाल का आरोप है कि इसी दौरान अंशिका सिंह ने पिस्टल निकालकर उसके सीने में सटा दी। बचाव के लिए विशाल पीछे हटा तो अंशिका ने गोली चला दी। गोली पास खड़े अमिताभ के पेट में जा लगी। एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि विशाल मिश्रा की तहरीर पर अंशिका, बंटी व उनके तीन अन्य साथियों के खिलाफ हत्या की कोशिश समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अंशिका और बंटी को जेल भिजवा दिया गया है।
 

सोशल मीडिया की दोस्ती पड़ सकती है भारी, गलत भरोसा बर्बाद कर सकता है जिंदगी
सोशल मीडिया पर बनी दोस्ती कब खतरे में बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। हाल ही में सिंघड़िया इलाके में हुई फायरिंग की घटना ने इस सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जांच में सामने आया है कि फायरिंग की आरोपी अंशिका ने सोशल मीडिया के जरिये कई लोगों को अपने जाल में फंसाया था। पहले दोस्ती, फिर भावनात्मक नजदीकियां और उसके बाद ब्लैकमेलिंग उसका तरीका बताया जा रहा है।
 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अंशिका सोशल मीडिया पर फर्जी या आकर्षक प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क करती थी। धीरे-धीरे भरोसा जीतकर निजी बातें, फोटो और वीडियो हासिल कर लेती थी। इसके बाद इन्हीं निजी सामग्रियों को वायरल करने की धमकी देकर वह लोगों पर दबाव बनाती थी। कई लोग बदनामी के डर से चुप रहे, जिससे उसका हौसला और बढ़ता गया।
 

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बनने वाली दोस्ती में भावनात्मक आकर्षण सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। लोग नकली आत्मीयता को असली समझ बैठते हैं और निजी जानकारी साझा कर देते हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी से भी दोस्ती करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अनजान लोगों के साथ निजी फोटो, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी साझा करना भारी पड़ सकता है।
 

अकेलापन की वजह से लोग जल्द करते हैं भरोसा
डीडीयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि लोग गलत संगत के कारण बिगड़ जाते हैं। आम आदमी किसी भी अनुचित कार्य को करने से पहले उसके अंजाम के बारे में सोचता है लेकिन अपराधी प्रवृत्ति के लोग किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने से पहले उसके परिणामों पर विचार नहीं करते। 
 

अकेलापन और भावनात्मक सहारे की तलाश में लोग जल्द भरोसा कर लेते हैं। यही कमजोरी साइबर अपराधी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। एक बार ब्लैकमेलिंग शुरू हो जाए तो व्यक्ति मानसिक तनाव, डर और अवसाद का शिकार हो जाता है। कई मामलों में यह तनाव हिंसा या आत्मघाती कदम तक ले जाता है।

नकली आत्मीयता के जाल में फंस रहे लोग
डीडीयू के समाजशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया, उपभोक्तावादी संस्कृति और आर्थिक असमानता ने रिश्तों को लेन-देन का रूप दे दिया है। ऐसे माहौल में कई पढ़े-लिखे और संभ्रांत लोग भावनात्मक आकर्षण एवं नकली आत्मीयता के जाल में फंसकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। 
 

इसका समाधान सतर्कता और आत्मअनुशासन में निहित है। रिश्तों के शुरुआती दौर में आर्थिक मदद से बचना, स्पष्ट सीमाएं तय करना और सामने वाले की सामाजिक पृष्ठभूमि की जांच करना आवश्यक है। यह समस्या स्त्री या पुरुष की नहीं, बल्कि रिश्तों के बाजारीकरण से उपजा सामाजिक संकट है। विवेक, आत्मसम्मान और सामाजिक चेतना ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी मार्ग हैं।
 

मामले की जांच गहनता से कराई जा रही है। मोबाइल डेटा, वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग और एफआईआर की जानकारी के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। जेल भिजवाई गई युवती के साथियों की तलाश मेें दबिश दी जा रही है।- योगेंद्र सिंह, सीओ कैंट
 
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