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Gorakhpur News: बैंककर्मी ने ग्राहक के दस्तावेज और सिम से खुलवाया म्यूल खाता, 75 लाख की लेन-देन
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गोरखपुर। बंधन बैंक, तारामंडल के कर्मचारी पर ग्राहक के दस्तावेज और पुराने बैंक खाते से जुड़े सिम का इस्तेमाल कर म्यूल खाता खुलवाने और उसमें साइबर ठगी की करीब 75 लाख रुपये की रकम मंगाकर अलग-अलग खातों में भेजने का आरोप लगा है। रामगढ़ताल थाना पुलिस ने मामले में बैंककर्मी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपियों में बंधन बैंक तारामंडल का कर्मचारी और संतकबीरनगर के बखिरा निवासी हरीश कुमार सिंह, रायगंज निवासी सुशांत विश्वकर्मा और काली मंदिर, कुनराघाट निवासी विनय साहनी शामिल हैं। पीड़ित ने तहरीर में बताया कि हरीश के बार-बार अनुरोध पर वर्ष 2023 में उसकी फर्म के नाम से बैंक खाता खुलवाया गया था। बैंक की सेवाओं से असंतुष्ट होने पर उसी साल खाता बंद करने के लिए आवेदन दिया गया।
वर्ष 2025 में हरीश ने बेहतर सेवाएं देने का भरोसा देकर दोबारा दस्तावेज लिए और फर्म के नाम से खाता खुलवाया। खाते की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ित को भेजी गई। अप्रैल 2026 में वाहन खरीदने के लिए ऋण की जानकारी मांगने पर हरीश ने आधार, पैन समेत अन्य दस्तावेज लिए। ईएमआई अधिक होने के कारण वाहन नहीं खरीदा गया। आरोप है कि मई में हरीश वर्ष 2023 में खुले खाते से जुड़ा सिम भी अपने साथ ले गया और बाद में व्हाट्सएप पर इसकी जानकारी दी।
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पुलिस के अनुसार, 27 जून को पीड़ित को राजस्थान से उसके खाते में अवैध वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली। उसे अपना पक्ष रखने के लिए राजस्थान बुलाया गया। जांच में उसके खाते में करीब 75 लाख रुपये की अवैध धनराशि आने और फिर उसे अलग-अलग खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पीड़ित ने रामगढ़ताल थाने में शिकायत दर्ज कराई।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि दस्तावेज का कथित तौर पर फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर खाता खुलवाया गया था। खाते में साइबर ठगी से संबंधित करीब 75 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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गिरफ्तार आरोपियों में बंधन बैंक तारामंडल का कर्मचारी और संतकबीरनगर के बखिरा निवासी हरीश कुमार सिंह, रायगंज निवासी सुशांत विश्वकर्मा और काली मंदिर, कुनराघाट निवासी विनय साहनी शामिल हैं। पीड़ित ने तहरीर में बताया कि हरीश के बार-बार अनुरोध पर वर्ष 2023 में उसकी फर्म के नाम से बैंक खाता खुलवाया गया था। बैंक की सेवाओं से असंतुष्ट होने पर उसी साल खाता बंद करने के लिए आवेदन दिया गया।
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वर्ष 2025 में हरीश ने बेहतर सेवाएं देने का भरोसा देकर दोबारा दस्तावेज लिए और फर्म के नाम से खाता खुलवाया। खाते की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ित को भेजी गई। अप्रैल 2026 में वाहन खरीदने के लिए ऋण की जानकारी मांगने पर हरीश ने आधार, पैन समेत अन्य दस्तावेज लिए। ईएमआई अधिक होने के कारण वाहन नहीं खरीदा गया। आरोप है कि मई में हरीश वर्ष 2023 में खुले खाते से जुड़ा सिम भी अपने साथ ले गया और बाद में व्हाट्सएप पर इसकी जानकारी दी।
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पुलिस के अनुसार, 27 जून को पीड़ित को राजस्थान से उसके खाते में अवैध वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली। उसे अपना पक्ष रखने के लिए राजस्थान बुलाया गया। जांच में उसके खाते में करीब 75 लाख रुपये की अवैध धनराशि आने और फिर उसे अलग-अलग खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पीड़ित ने रामगढ़ताल थाने में शिकायत दर्ज कराई।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि दस्तावेज का कथित तौर पर फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर खाता खुलवाया गया था। खाते में साइबर ठगी से संबंधित करीब 75 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।