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Gorakhpur News: रहें सतर्क...सांस और आंखों को बीमार बना रहा धूल और प्रदूषण
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 04 Apr 2026 02:17 AM IST
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गोरखपुर। शहर में चल रहे निर्माण कार्य लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को धूल और बालू के छोटे कण से सांस लेने और आंख में पड़ने से परेशानी हो रही है। अस्थमा के मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि, इस समय हवाएं तेज बहती हैं। इससे धूल उड़ती रहती है। ऐसे में इनके पास से गुजरने वाले लोगों में सांस के माध्यम से धूल शरीर के अंदर चली जाती हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सीओपीडी, अस्थमा और टीबी के मरीजों को है। प्रदूषण में मौजूद धूल के महीन कण सांस की नलियों को और ज्यादा संकुचित कर दे रही हैं। इससे हृदय में जकड़न, सांस फूलना, खांसी और बलगम जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। धूल प्रदूषण को कारण कॉर्नियल अल्सर और कंजक्टिवाइटिस जैसी परेशानियां भी बड़ रही हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग के विभागध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार मिश्रा ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ वातावरण शुष्क हो जाता है। ऐसे में धूल के छोटे कण पीएम 2.5, पीएम 10 सांस की नलियों को सिकोड़ने लगते हैं । ऐसे स्थानों पर सांस के मरीजों के साथ आम लोगों को भी मास्क लगाकर जाना चाहिए। सांस के मरीजों को दिन में धूल और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहना चाहिए। घर की खिड़कियां बंद रखें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। सांस लेने में अधिक दिक्कत होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
एम्स के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा सिंह ने बताया कि धूल के कण आंखों में पड़ जाने पर रगड़ने के बजाय स्वच्छ और ठंडे पानी से आंखों को धोएं। आंखों को रगड़ने में पुतली पर घाव हो सकता है। बाजार से एस्टेराइड की दवा लेकर आंखों में न डालें। इससे दिक्कत और बढ़ सकती है। बाहर जाते समय चश्मा जरूर लगाएं।
केस- 1
देवरिया बाईपास के 60 वर्षीय सुमित वर्मा 10 वर्षों से अस्थमा के मरीज हैं। तारामंडल स्थित कार्यस्थल पर जाते समय रोज स्थल से गुजरते हैं। इससे उनकी समस्या और बढ़ गई है। सुमित को सांस फूलने के साथ तेज खांसी आ रही है। डॉक्टर ने बाहर निकलते समय मास्क पहनने और ऐसे स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।
केस- 2
नौसड़ की 25 वर्षीय दीक्षा पढ़ने के लिए शहर आया करती हैं। रास्ते में भूल और प्रदूषण के कारण आंखों में एलर्जी की दिक्कत होने लगी। आंखों से लगातार पानी आने और जलन होने पर डॉक्टर को दिखाया। धूल के कणों से आंख में घाव हो गया था।
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डॉक्टरों का कहना है कि, इस समय हवाएं तेज बहती हैं। इससे धूल उड़ती रहती है। ऐसे में इनके पास से गुजरने वाले लोगों में सांस के माध्यम से धूल शरीर के अंदर चली जाती हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सीओपीडी, अस्थमा और टीबी के मरीजों को है। प्रदूषण में मौजूद धूल के महीन कण सांस की नलियों को और ज्यादा संकुचित कर दे रही हैं। इससे हृदय में जकड़न, सांस फूलना, खांसी और बलगम जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। धूल प्रदूषण को कारण कॉर्नियल अल्सर और कंजक्टिवाइटिस जैसी परेशानियां भी बड़ रही हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग के विभागध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार मिश्रा ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ वातावरण शुष्क हो जाता है। ऐसे में धूल के छोटे कण पीएम 2.5, पीएम 10 सांस की नलियों को सिकोड़ने लगते हैं । ऐसे स्थानों पर सांस के मरीजों के साथ आम लोगों को भी मास्क लगाकर जाना चाहिए। सांस के मरीजों को दिन में धूल और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहना चाहिए। घर की खिड़कियां बंद रखें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। सांस लेने में अधिक दिक्कत होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
एम्स के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा सिंह ने बताया कि धूल के कण आंखों में पड़ जाने पर रगड़ने के बजाय स्वच्छ और ठंडे पानी से आंखों को धोएं। आंखों को रगड़ने में पुतली पर घाव हो सकता है। बाजार से एस्टेराइड की दवा लेकर आंखों में न डालें। इससे दिक्कत और बढ़ सकती है। बाहर जाते समय चश्मा जरूर लगाएं।
केस- 1
देवरिया बाईपास के 60 वर्षीय सुमित वर्मा 10 वर्षों से अस्थमा के मरीज हैं। तारामंडल स्थित कार्यस्थल पर जाते समय रोज स्थल से गुजरते हैं। इससे उनकी समस्या और बढ़ गई है। सुमित को सांस फूलने के साथ तेज खांसी आ रही है। डॉक्टर ने बाहर निकलते समय मास्क पहनने और ऐसे स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।
केस- 2
नौसड़ की 25 वर्षीय दीक्षा पढ़ने के लिए शहर आया करती हैं। रास्ते में भूल और प्रदूषण के कारण आंखों में एलर्जी की दिक्कत होने लगी। आंखों से लगातार पानी आने और जलन होने पर डॉक्टर को दिखाया। धूल के कणों से आंख में घाव हो गया था।