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Gorakhpur News: पीपीगंज-बंधुपुर अंडरपास की छत में आईं दरार, भर रहे केमिकल
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ब्रिज में दरार की मरम्मत करती कार्यदायी संस्था।
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केमिकल से भरी जा रहीं दरारें, लोग अपना रहे वैकल्पिक रास्ता
इससे पहले जंगल कौड़िया अंडरपास में भी आई थीं दरारें, एनएचएआई का दावा-पूरी तरह सुरक्षित है अंडरपास
संवाद न्यूज एजेंसी
भरोहिया। पीपीगंज-बंधुपुर अंडरपास की छत में भी कुछ दरारें आई हैं। कार्यदायी संस्था की ओर से यातायात रोककर इसमें केमिकल भरा जा रहा है। आवागमन के लिए लोग वैकल्पिक रास्ता अपना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कार्यदायी संस्था पीएनसी की ओर से पीपीगंज-बंधुपुर अंडरपास की छत में मरम्मत कार्य किया जा रहा है। अंडरपास के नीचे मचान और स्कैफोल्डिंग लगाकर इंजेक्शन ग्राउटिंग सहित अन्य तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। कार्यदायी संस्था के लोगों का कहना है कि गर्मी में ढलाई की वजह से ये दरारें आई हैं। इससे अंडरपास की मजबूती को कोई असर नहीं पड़ेगा। अंडरपास आवागमन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
इससे पहले जंगल कौड़िया अंडरपास में भी इसी तरह की दरारें पाई गई थीं। इसके बाद उसमें भी केमिकल भरा गया था। दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने इसकी जांच की और उसे आवागमन के लिए सुरक्षित बताया था। विशेषज्ञों ने इसका लोड टेस्ट भी कराया था।
इस संबंध में एनएचएआई के परियोजना निदेशक ललित प्रताप पाल ने बताया कि दरार से अंडरपास की मजबूती पर कोई असर नहीं है। ज्यादा गर्मी में ढलाई की वजह से ऐसा हो जाता है। इसमें केमिकल भरा जा रहा है। अंडरपास आवागमन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
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इससे पहले जंगल कौड़िया अंडरपास में भी आई थीं दरारें, एनएचएआई का दावा-पूरी तरह सुरक्षित है अंडरपास
संवाद न्यूज एजेंसी
भरोहिया। पीपीगंज-बंधुपुर अंडरपास की छत में भी कुछ दरारें आई हैं। कार्यदायी संस्था की ओर से यातायात रोककर इसमें केमिकल भरा जा रहा है। आवागमन के लिए लोग वैकल्पिक रास्ता अपना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कार्यदायी संस्था पीएनसी की ओर से पीपीगंज-बंधुपुर अंडरपास की छत में मरम्मत कार्य किया जा रहा है। अंडरपास के नीचे मचान और स्कैफोल्डिंग लगाकर इंजेक्शन ग्राउटिंग सहित अन्य तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। कार्यदायी संस्था के लोगों का कहना है कि गर्मी में ढलाई की वजह से ये दरारें आई हैं। इससे अंडरपास की मजबूती को कोई असर नहीं पड़ेगा। अंडरपास आवागमन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
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इससे पहले जंगल कौड़िया अंडरपास में भी इसी तरह की दरारें पाई गई थीं। इसके बाद उसमें भी केमिकल भरा गया था। दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने इसकी जांच की और उसे आवागमन के लिए सुरक्षित बताया था। विशेषज्ञों ने इसका लोड टेस्ट भी कराया था।
इस संबंध में एनएचएआई के परियोजना निदेशक ललित प्रताप पाल ने बताया कि दरार से अंडरपास की मजबूती पर कोई असर नहीं है। ज्यादा गर्मी में ढलाई की वजह से ऐसा हो जाता है। इसमें केमिकल भरा जा रहा है। अंडरपास आवागमन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।