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ऑनलाइन गेमिंग एप से ठगी: IDFC बैंक का तत्कालीन मैनेजर भी जांच के घेरे में, विवेचना में बढ़ा नाम- जानिए क्यों

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 11 Jan 2026 11:12 AM IST
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सार

सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि विवेचना के दौरान बैंक मैनेजर की जालसाजों से सांठगांठ के पुख्ता सबूत मिले हैं। लिहाजा उसका नाम विवेचना में शामिल किया गया है। उसके स्थायी पते के लिए बैंक प्रबंधन से भी पत्राचार किया गया है। जल्द ही बैंक मैनेजर से पूछताछ की जाएगी।

IDFC Bank's then manager under scrutiny, names crop up in investigation in Gorakhpur
गुलरिहा में आईडीएफसी बैंक की शाखा। संवाद
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विस्तार
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ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं। गुलरिहा थाना क्षेत्र में कॉल सेंटर खोलकर ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर सट्टेबाजी और म्यूल खातों के जरिये बड़े पैमाने पर जालसाजी की बात सामने आ रही है।

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अब आईडीएफसी बैंक के मैनेजर की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस को ऐसे ठोस सबूत मिले हैं, जिनसे बैंक मैनेजर और मुख्य आरोपी के बीच सांठगांठ की आशंका गहराती जा रही है। लिहाजा पुलिस ने बैंक मैनेजर का नाम विवेचना में शामिल कर लिया है।

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पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर फ्रॉड के इस नेटवर्क में आईडीएफसी बैंक सहित अन्य बैंकों के करीब 55 खातों का संचालन किया गया। ये खाते म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए गए, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये ठगी की रकम जमा कराई जाती थी और फिर तेजी से निकासी कर ली जाती थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी गुलरिहा के नारायणपुर नंबर दो टोला हरिजनगंज निवासी राकेश प्रजापति प्रतिदिन पांच से छह बार गुलरिहा स्थित आईडीएफसी बैंक शाखा में आता-जाता था। बैंक के कर्मचारी कमलेश से उसकी जान-पहचान होने के बाद म्यूल खातों का यह खेल शुरू हुआ।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, विजय नामक व्यक्ति के खाते में एक महीने के भीतर करीब 2.6 लाख रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि जाने आलम के खाते में उसी अवधि में 21 लाख रुपये जमा कराए गए, जिनमें से लगभग 20 लाख रुपये निकाल लिए गए।

ये दोनों खाते करीब एक महीने तक सक्रिय रहे लेकिन साइबर जालसाजी की सूचना मिलने के बाद उन्हें बंद कर दिया गया। पुलिस की जांच में यह भी तथ्य सामने आए हैं कि चालू खाते बिना बैंक मैनेजर की सहमति के खुलना संभव नहीं होता। ऐसे में बैंक मैनेजर सुजीत दुबे की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

पुलिस ने आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की तो चौंकाने वाला सुराग हाथ लगा। छह माह के भीतर बैंक मैनेजर सुजीत दुबे और आरोपी राकेश प्रजापति के बीच मोबाइल फोन पर करीब 750 बार बातचीत हुई है। इसके अलावा दोनों के बीच व्हाट्सएप चैटिंग के भी प्रमाण मिले हैं। जांच के दायरे को और बढ़ाते हुए पुलिस ने मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट फाॅरेंसिक जांच के लिए भेज दी है।

बैंक प्रबंधन से पत्राचार कर मैनेजर का मांगा गया पता
गुलरिहा पुलिस ने बैंक प्रबंधन से पत्राचार कर बैंक मैनेजर सुजीत दुबे का स्थायी और वर्तमान पता भी मांगा है। साथ ही बीते एक वर्ष में बैंक शाखा में खुले करीब तीन हजार खातों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कितने म्यूल खाते हैं, वे कब खुले और कब बंद किए गए।

तीन माह से बैंक नहीं आए कर्मचारी और मैनेजर
मामले के खुलासे के बाद बैंक कर्मचारी कमलेश पिछले तीन महीनों से बैंक छोड़कर भागा बताया जा रहा है। वहीं, विवेचना में नाम शामिल होने के बाद बैंक मैनेजर भी अंडरग्राउंड हो गया है। पुलिस दोनों की तलाश में जुटी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बैंक मैनेजर व कर्मचारी का मोबाइल बंद होने के चलते उनकी लोकेशन भी नहीं मिल पा रही है।

हाईकोर्ट पहुंचा जाने आलम
इस मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपी राकेश प्रजापति का साथी भटहट के चिलबिलवां निवासी जाने आलम की ओर से हाईकोर्ट में जमानत के लिए नोटिस भी आ चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विवेचना के दौरान बैंक मैनेजर की जालसाजों से सांठगांठ के पुख्ता सबूत मिले हैं। लिहाजा उसका नाम विवेचना में शामिल किया गया है। उसके स्थायी पते के लिए बैंक प्रबंधन से भी पत्राचार किया गया है। जल्द ही बैंक मैनेजर से पूछताछ की जाएगी: रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ
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