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4 महीने में सुधरे आंकड़े: महिला सुरक्षा में सुधार- अपराध तो रुके, लेकिन दहेज हत्या रोकना अभी भी बड़ी चुनौती

Sat, 09 May 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 09 May 2026 02:32 AM IST
सार

गोरखपुर जिले में पिछले चार महीनों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पुलिस विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और अन्य महिला अपराधों के मामलों में गिरावट आई है। इसे महिला सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियानों और पुलिस की सख्ती का नतीजा माना जा रहा है।

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In Gorakhpur, Drop in Crimes Against Women in 4 Months, Dowry Deaths Remain a Concern
दहेज हत्या रोकना अभी भी बड़ी चुनौती पुलिस ने महिला अपराध तो रोके - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया

विस्तार

महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामलों में वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में कमी दर्ज की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हत्या, छेड़खानी, अपहरण, उत्पीड़न और दुष्कर्म जैसी घटनाओं में गिरावट देखने को मिली है। दहेज हत्या के मामले अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

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पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में महिलाओं से संबंधित अपराधों के कुल मामलों की संख्या काफी अधिक रही। उस वर्ष हत्या के 16, छेड़खानी के 88, अगवा के 125, उत्पीड़न के 967, दुष्कर्म के 10 और दहेज हत्या के 30 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं वर्ष 2025 में अधिकांश अपराधों में कमी देखने को मिली।

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हत्या के मामले घटकर 11 रह गए जबकि छेड़खानी के 72 और अगवा के 112 मामले दर्ज हुए। सबसे बड़ी गिरावट उत्पीड़न के मामलों में दर्ज की गई, जो 967 से घटकर 255 तक पहुंच गई। इसी तरह दुष्कर्म के मामले भी 10 से घटकर पांच रह गए।

वर्ष 2026 में एक जनवरी से 30 अप्रैल तक के आंकड़े राहत देने वाले माने जा रहे हैं। इस अवधि में हत्या के पांच, छेड़खानी के 40, अगवा के 40, उत्पीड़न के 58, दुष्कर्म के दो और दहेज हत्या के 19 मामले दर्ज किए गए हैं। यदि इन आंकड़ों की तुलना पिछले वर्षों से की जाए तो अधिकांश अपराधों में कमी स्पष्ट दिखाई देती है।

एसएसपी डॉ. कौस्तुभ का कहना है कि महिला सुरक्षा को लेकर लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई का असर अपराध के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है। महिला हेल्पलाइन, मिशन शक्ति अभियान और थानों में महिला डेस्क जैसी व्यवस्थाओं से भी पीड़िताओं को शिकायत दर्ज कराने और सहायता पाने में आसानी हुई है।

महिला अपराधों पर नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ ही महिला सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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