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दीक्षांत से पहले पेच: डीडीयू के गोल्ड मेडल पर 'टाई' का ट्विस्ट, नियम तय करेंगे कौन बनेगा 'नंबर-1'
Tue, 07 Jul 2026 02:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:54 AM IST
सार
परीक्षा नियंत्रक कुलदीप सिंह का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। सात जुलाई के बाद होने वाले फैसले के बाद गोल्ड मेडलिस्ट की अंतिम सूची जारी होगी और तभी यह साफ होगा कि बराबरी के दावेदारों में 'नंबर-1' का ताज किसके सिर सजेगा।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय( सांकेतिक)
- फोटो : डीडीयू सोशल मीडिया पेज
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से ठीक पहले गोल्ड मेडल को लेकर बड़ा पेच सामने आ गया है। विश्वविद्यालय के तीन मेधावी विद्यार्थियों का सीजीपीए एक समान हैं। ऐसे में 'नंबर-1' गोल्ड मेडलिस्ट कौन होगा, इस पर फैसला फिलहाल समिति के निर्णय पर टिक गया है।
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एमएससी प्लांट बायोटेक्नाेलॉजी, एमए समाजशास्त्र और एमएससी होम साइंस के दो-दो विद्यार्थियों के सीजीपीए एक समान हैं। इससे मामला अब विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड रूम तक पहुंच चुका है, जहां इस संबंध में औपचारिक आपत्ति दर्ज की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपत्तियों के निस्तारण की तिथि जुलाई तय की है।
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हालांकि कुछ परीक्षा परिणाम अभी घोषित नहीं किए जा सके हैं। अगर परीक्षा परिणाम आने में देरी हुई तो आपत्तियों के निस्तारण की तिथि भी बदल जाएगी। आपत्ति दर्ज कराने वाले अभ्यर्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों और परीक्षा रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
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इसके बाद विश्वविद्यालय की पूर्व निर्धारित नियमावली के आधार पर समिति यह तय करेगी कि बराबर सीजीपीए की स्थिति में किस विद्यार्थी को सर्वोच्च स्थान और गोल्ड मेडल का पहला अधिकार मिलेगा।
परीक्षा नियंत्रक कुलदीप सिंह का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। सात जुलाई के बाद होने वाले फैसले के बाद गोल्ड मेडलिस्ट की अंतिम सूची जारी होगी और तभी यह साफ होगा कि बराबरी के दावेदारों में 'नंबर-1' का ताज किसके सिर सजेगा।
बराबर सीजीपीए आने पर फैसला लेने के लिए विश्वविद्याालय में पहले से नियमावली तय है। सभी आपत्तियों को कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। समिति ही इसका निस्तारण करेगी। जितनी भी आपत्तियां दर्ज कराई गईं हैं, सभी नियमानुसार निस्तारित होंगी: प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू