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Gorakhpur News: सहायक अभियंता पर रिश्वत मांगने के आरोप में प्राथमिकी, जांच का आदेश
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- डीआरडीए के बैजनाथ सिंह पर विद्यालय निर्माण के लिए विधायक निधि में पांच प्रतिशत राशि रिश्वत के रूप में मांगने का आरोप
गोरखपुर। भ्रष्टाचार के मामले में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ओमकार शुक्ला ने विकास भवन में तैनात तत्कालीन सहायक अभियंता बैजनाथ सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना का आदेश थानाध्यक्ष कैंट को दिया है।
अदालत में विद्यालय प्रबंधक संकट मोचन मिश्रा ने बताया कि उन्होंने सिकरीगंज थाना क्षेत्र के एसडीएम डिजिटल सेंट्रल एकेडमी विद्यालय के निर्माण के लिए विधायक खजनी के श्रीराम चौहान से कुल 15 लाख रुपये विधायक निधि से अवमुक्त करने का निवेदन किया था। विद्यालय स्थल निरीक्षण के लिए डीआरडीए के सहायक अभियंता बैजनाथ सिंह को नियुक्त किया गया था।
प्रबंधक के अनुसार, सहायक अभियंता ने निरीक्षण और जांच रिपोर्ट लगाने के लिए कुल धनराशि 15 लाख में से पांच प्रतिशत राशि रिश्वत के रूप में मांगी। जब राशि देने में असमर्थता जताई तो उसे जांच रिपोर्ट न देने की धमकी दी गई। बताया कि थकहार कर 15 फरवरी 2025 को 1.25 बजे वह सहायक अभियंता के कार्यालय गए और आठ हजार रुपये नकद दिए। इस दौरान उन्होंने घटना का वीडियो भी बना लिया। उच्च अधिकारियों को भी शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विशेष न्यायाधीश ने इस गंभीर आरोप के मद्देनजर मामले की जांच के लिए थानाध्यक्ष कैंट को निर्देशित किया है। पुलिस अब मामले में औपचारिक जांच शुरू करेगी।
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गोरखपुर। भ्रष्टाचार के मामले में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ओमकार शुक्ला ने विकास भवन में तैनात तत्कालीन सहायक अभियंता बैजनाथ सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना का आदेश थानाध्यक्ष कैंट को दिया है।
अदालत में विद्यालय प्रबंधक संकट मोचन मिश्रा ने बताया कि उन्होंने सिकरीगंज थाना क्षेत्र के एसडीएम डिजिटल सेंट्रल एकेडमी विद्यालय के निर्माण के लिए विधायक खजनी के श्रीराम चौहान से कुल 15 लाख रुपये विधायक निधि से अवमुक्त करने का निवेदन किया था। विद्यालय स्थल निरीक्षण के लिए डीआरडीए के सहायक अभियंता बैजनाथ सिंह को नियुक्त किया गया था।
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प्रबंधक के अनुसार, सहायक अभियंता ने निरीक्षण और जांच रिपोर्ट लगाने के लिए कुल धनराशि 15 लाख में से पांच प्रतिशत राशि रिश्वत के रूप में मांगी। जब राशि देने में असमर्थता जताई तो उसे जांच रिपोर्ट न देने की धमकी दी गई। बताया कि थकहार कर 15 फरवरी 2025 को 1.25 बजे वह सहायक अभियंता के कार्यालय गए और आठ हजार रुपये नकद दिए। इस दौरान उन्होंने घटना का वीडियो भी बना लिया। उच्च अधिकारियों को भी शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विशेष न्यायाधीश ने इस गंभीर आरोप के मद्देनजर मामले की जांच के लिए थानाध्यक्ष कैंट को निर्देशित किया है। पुलिस अब मामले में औपचारिक जांच शुरू करेगी।