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Gorakhpur News: परदेस में पिता...डूब गया भविष्य
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- हरीश परिवार का इकलौता बेटा था, सचिन छठवीं और अनुज कक्षा तीन का छात्र
- नाग पंचमी पर तालाब में डूबने से तीनों की मौत ने बदौली बाबू की खुशियां मातम में बदलीं
- किसी के पिता दुबई में तो किसी के सूरत और गुजरात में कर रहे थे मजदूरी- छुट्टी में लौटने वाले पिता अब बेटों की अर्थी देखने को मजबूर
गोरखपुर। नाग पंचमी के उल्लास के बीच बदौली बाबू गांव में हुए हादसे ने तीन परिवारों से उनकी दुनिया छीन ली। तालाब में डूबकर जान गंवाने वाले हरीश, सचिन और अनुज की उम्र भले ही कम थी लेकिन तीनों के घरों ने उनके लिए बड़े सपने संजो रखे थे। कोई परिवार का इकलौता बेटा था तो कोई पढ़-लिखकर आगे बढ़ने की उम्र में था। रोजी-रोटी के लिए पिता घर से दूर थे। उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे के बेहतर भविष्य के लिए वे परदेस में पसीना बहा रहे हैं, एक दिन उसी की मौत की खबर उन्हें दूर देश से मिलेगी।
राधेश्याम यादव का 11 वर्षीय बेटा हरीश उर्फ करिया अपने परिवार का इकलौता बेटा था। परिजन के मुताबिक, काफी पूजा-पाठ और मन्नतों के बाद हरीश का जन्म हुआ था। उसकी एक बहन शालू है। घर में हरीश सबका दुलारा था। हरीश के पिता राधेश्याम यादव दुबई में नौकरी करते हैं। परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए वह घर से दूर रहते हैं। परिवार के बड़े पिता शुभकरण यादव बीएसएफ में तैनात थे। उनका निधन हो चुका है। वहीं दूसरे भाई संगम यादव सेना में सेवा दे रहे हैं। ऐसे परिवार में पला हरीश भी अपनों की आंखों का तारा था। उसकी मौत की खबर ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया।
छठवीं कक्षा के सचिन से थीं परिवार को उम्मीदें
भजुराम का 14 वर्षीय बेटा सचिन कक्षा छह का छात्र था। पढ़ाई के साथ वह अपने परिवार का चहेता था। उसका बड़ा भाई सन्नी करीब 15 वर्ष का है और कक्षा आठ में पढ़ता है। सचिन के पिता सूरत में मजदूरी करते हैं। परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पिता घर से दूर मेहनत कर रहे थे। सचिन की मौत की खबर पहुंचते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे के लिए पिता परदेस में मेहनत कर रहे थे, उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
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कक्षा तीन का छात्र था अनुज
सत्यप्रकाश का नौ वर्षीय बेटा अनुज कक्षा तीन का छात्र था। छोटी उम्र में ही उसने तालाब के हादसे में जान गंवा दी। उसका बड़ा भाई अनूप करीब 14 वर्ष का है और कक्षा आठ में पढ़ता है। अनुज के पिता गुजरात में पेंट-पॉलिश का काम करते हैं। बेटे की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों के लिए वह घर से दूर रहकर कमाई कर रहे थे। अनुज के जाने के बाद परिवार में चीख-पुकार मची है। मां और परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
तीन घरों के चिराग बुझने से गांव में मातम
नाग पंचमी पर हुई तीन मौतों ने बदौली बाबू के माहौल को गमगीन कर दिया है। तीनों बच्चों के परिवारों की परिस्थितियां अलग थीं लेकिन दर्द एक जैसा है। किसी पिता की मेहनत परदेस में छूट गई, किसी मां की गोद सूनी हो गई और भाई-बहनों से उनका साथी हमेशा के लिए बिछड़ गया। गांव में त्योहार की रौनक की जगह मातम पसरा है। तीन मासूम चेहरों को याद कर हर आंख नम है।
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- नाग पंचमी पर तालाब में डूबने से तीनों की मौत ने बदौली बाबू की खुशियां मातम में बदलीं
- किसी के पिता दुबई में तो किसी के सूरत और गुजरात में कर रहे थे मजदूरी- छुट्टी में लौटने वाले पिता अब बेटों की अर्थी देखने को मजबूर
गोरखपुर। नाग पंचमी के उल्लास के बीच बदौली बाबू गांव में हुए हादसे ने तीन परिवारों से उनकी दुनिया छीन ली। तालाब में डूबकर जान गंवाने वाले हरीश, सचिन और अनुज की उम्र भले ही कम थी लेकिन तीनों के घरों ने उनके लिए बड़े सपने संजो रखे थे। कोई परिवार का इकलौता बेटा था तो कोई पढ़-लिखकर आगे बढ़ने की उम्र में था। रोजी-रोटी के लिए पिता घर से दूर थे। उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे के बेहतर भविष्य के लिए वे परदेस में पसीना बहा रहे हैं, एक दिन उसी की मौत की खबर उन्हें दूर देश से मिलेगी।
राधेश्याम यादव का 11 वर्षीय बेटा हरीश उर्फ करिया अपने परिवार का इकलौता बेटा था। परिजन के मुताबिक, काफी पूजा-पाठ और मन्नतों के बाद हरीश का जन्म हुआ था। उसकी एक बहन शालू है। घर में हरीश सबका दुलारा था। हरीश के पिता राधेश्याम यादव दुबई में नौकरी करते हैं। परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए वह घर से दूर रहते हैं। परिवार के बड़े पिता शुभकरण यादव बीएसएफ में तैनात थे। उनका निधन हो चुका है। वहीं दूसरे भाई संगम यादव सेना में सेवा दे रहे हैं। ऐसे परिवार में पला हरीश भी अपनों की आंखों का तारा था। उसकी मौत की खबर ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया।
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छठवीं कक्षा के सचिन से थीं परिवार को उम्मीदें
भजुराम का 14 वर्षीय बेटा सचिन कक्षा छह का छात्र था। पढ़ाई के साथ वह अपने परिवार का चहेता था। उसका बड़ा भाई सन्नी करीब 15 वर्ष का है और कक्षा आठ में पढ़ता है। सचिन के पिता सूरत में मजदूरी करते हैं। परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पिता घर से दूर मेहनत कर रहे थे। सचिन की मौत की खबर पहुंचते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे के लिए पिता परदेस में मेहनत कर रहे थे, उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
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कक्षा तीन का छात्र था अनुज
सत्यप्रकाश का नौ वर्षीय बेटा अनुज कक्षा तीन का छात्र था। छोटी उम्र में ही उसने तालाब के हादसे में जान गंवा दी। उसका बड़ा भाई अनूप करीब 14 वर्ष का है और कक्षा आठ में पढ़ता है। अनुज के पिता गुजरात में पेंट-पॉलिश का काम करते हैं। बेटे की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों के लिए वह घर से दूर रहकर कमाई कर रहे थे। अनुज के जाने के बाद परिवार में चीख-पुकार मची है। मां और परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
तीन घरों के चिराग बुझने से गांव में मातम
नाग पंचमी पर हुई तीन मौतों ने बदौली बाबू के माहौल को गमगीन कर दिया है। तीनों बच्चों के परिवारों की परिस्थितियां अलग थीं लेकिन दर्द एक जैसा है। किसी पिता की मेहनत परदेस में छूट गई, किसी मां की गोद सूनी हो गई और भाई-बहनों से उनका साथी हमेशा के लिए बिछड़ गया। गांव में त्योहार की रौनक की जगह मातम पसरा है। तीन मासूम चेहरों को याद कर हर आंख नम है।