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Gorakhpur News: संस्कृत और आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर
Tue, 18 Aug 2026 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 18 Aug 2026 02:11 AM IST
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- एमजीयूजी में चरक जयंती और संस्कृत सप्ताह का समापन
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में चरक जयंती और संस्कृत सप्ताह का समापन समारोह में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि संस्कृत और आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं।
गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के संहिता सिद्धांत एवं संस्कृत विभाग, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आचार्य चरक का आयुर्वेद के विकास में योगदान अतुलनीय है। वर्तमान समय में आयुर्वेद के वैज्ञानिक अध्ययन, विकास और व्यापक प्रसार की जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तर प्रदेश के सेवा प्रमुख डॉ. पीसी त्रिपाठी ने कहा कि जीवनशैली आधारित आयुर्वेदिक दृष्टिकोण आज की कई स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में उपयोगी है। परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. ज्वाला प्रसाद मिश्रा ने आयुर्वेद की लोक कल्याणकारी भूमिका पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम में माधवकर और नागार्जुन बैच के विद्यार्थियों की रचनात्मक कृति ‘श्लोकावली’ का विमोचन किया गया। विद्यार्थियों ने संस्कृत नाटिका के माध्यम से आचार्य चरक के जीवन, चिकित्सा-दृष्टि और लोककल्याण की भावना को प्रस्तुत किया। संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदांतम, डॉ. शांति भूषण हंडूर, डॉ. प्रज्ञा सिंह, साध्वी नंदन पांडेय, डॉ. विनम्र शर्मा, डॉ. कमलेश कुमार पांडेय, डॉ. देवी नायर सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में चरक जयंती और संस्कृत सप्ताह का समापन समारोह में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि संस्कृत और आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं।
गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के संहिता सिद्धांत एवं संस्कृत विभाग, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आचार्य चरक का आयुर्वेद के विकास में योगदान अतुलनीय है। वर्तमान समय में आयुर्वेद के वैज्ञानिक अध्ययन, विकास और व्यापक प्रसार की जरूरत है।
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विशिष्ट अतिथि विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तर प्रदेश के सेवा प्रमुख डॉ. पीसी त्रिपाठी ने कहा कि जीवनशैली आधारित आयुर्वेदिक दृष्टिकोण आज की कई स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में उपयोगी है। परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. ज्वाला प्रसाद मिश्रा ने आयुर्वेद की लोक कल्याणकारी भूमिका पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम में माधवकर और नागार्जुन बैच के विद्यार्थियों की रचनात्मक कृति ‘श्लोकावली’ का विमोचन किया गया। विद्यार्थियों ने संस्कृत नाटिका के माध्यम से आचार्य चरक के जीवन, चिकित्सा-दृष्टि और लोककल्याण की भावना को प्रस्तुत किया। संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदांतम, डॉ. शांति भूषण हंडूर, डॉ. प्रज्ञा सिंह, साध्वी नंदन पांडेय, डॉ. विनम्र शर्मा, डॉ. कमलेश कुमार पांडेय, डॉ. देवी नायर सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।