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सर्वसुलभ न्याय से स्थापित होता है विधि का शासन : सीएम योगी
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अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर किया पांच लाख रुपये
10 जिलों में बन रहा इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीवानी कचहरी परिसर में आयोजित बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के परिचय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है जब न्याय गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ होता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय के सबसे बड़े वाहक अधिवक्ता ही होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध तरीके से न्याय सर्वसुलभ कराने के लिए देश में जो तीन नए कानून आए, उन्हें सफलतापूर्वक लागू कराने में सबसे बड़ा योगदान अधिवक्ताओं ने दिया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि पहले डेढ़ लाख रुपये थी, उसे उन्होंने बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया । इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के पहले 10 ऐसे जिले थे जहां कोर्ट ही नहीं थे। वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 3000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सरकार ने अधिवक्ता सामाजिक सुरक्षा निधि से 87 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान करने के साथ, पुस्तकों और पत्रिकाओं के क्रय के लिए भी 1 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि जारी की।
उन्होंने कहा कि जिस यूपी की पहचान पलायन और बेरोजगारी बन गई थी, आज वह सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य बन गया है। इंसेफेलाइटिस का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में ही बना ली थी लेकिन इसे भारत आने में 100 साल लग गए। 2005 में यह वैक्सीन तब उपलब्ध हुई जब उन्होंने अधिवक्ताओं और अन्य नागरिकों ने इसके लिए आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस नियंत्रण समेत अन्य तस्वीर सिर्फ राजनीतिक निर्णय से नहीं बदली है बल्कि सबके साथ से बदली है। परिचय समारोह को जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के मंत्री अनुज अस्थाना ने किया।
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सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रकाश मिश्र, बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव, उपाध्यक्षगण शिव कुमार निषाद, अभिषेक सिंह, सुमित मिश्रा, अंशुमान पाठक, कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार शुक्ला, संयुक्त मंत्री प्रशासन रमेश कुमार यादव, संयुक्त मंत्री पुस्तकालय अमरनाथ कुशवाहा, संयुक्त मंत्री प्रकाशन आशुतोष दूबे, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य धनंजय त्रिपाठी, रंजन श्रीवास्तव, आशुतोष कुमार श्रीवास्तव, केसरी चंद, रमेश सिंह, राकेश शुक्ला, कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य रोशनी आर्या, आलोक कुमार गोयल, हर्ष कुमार शुक्ला, अमित कुमार पांडेय, आनंद तिवारी, सज्जन पांडेय, एडवोकेट अजय गुप्ता बजरंगी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
बार एसोसिएशन के समृद्ध विरासत का सीएम ने कराया स्मरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सिविल कोर्ट की स्थापना का एक लंबा इतिहास है। 1895 में इस कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह पीढ़ी दर पीढ़ी न्याय तथा समाज के मूल्यों को आगे बढ़ाता रहा है। देश की आजादी के आंदोलन में इस कचहरी की बड़ी भूमिका थी। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बाबू चारुचंद्र दास, जस्टिस इस्माइल, पंडित हरीशचन्द्रपति त्रिपाठी आदि का नाम गोरखपुर बार एसोसिएशन के इतिहास में आदर के साथ लिया जाता है। प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य कर इस बार को सम्मानित किया। एडवोकेट केपी सिंह राजनीति के क्षेत्र में दो बार विधान परिषद के सदस्य चुने गये। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जितने भी बड़े नेता थे वे अधिवक्ता थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर के अधिवक्ता एक समृद्ध परम्परा के वाहक हैं।
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10 जिलों में बन रहा इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीवानी कचहरी परिसर में आयोजित बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के परिचय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है जब न्याय गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ होता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय के सबसे बड़े वाहक अधिवक्ता ही होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध तरीके से न्याय सर्वसुलभ कराने के लिए देश में जो तीन नए कानून आए, उन्हें सफलतापूर्वक लागू कराने में सबसे बड़ा योगदान अधिवक्ताओं ने दिया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि पहले डेढ़ लाख रुपये थी, उसे उन्होंने बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया । इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के पहले 10 ऐसे जिले थे जहां कोर्ट ही नहीं थे। वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 3000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सरकार ने अधिवक्ता सामाजिक सुरक्षा निधि से 87 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान करने के साथ, पुस्तकों और पत्रिकाओं के क्रय के लिए भी 1 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि जारी की।
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उन्होंने कहा कि जिस यूपी की पहचान पलायन और बेरोजगारी बन गई थी, आज वह सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य बन गया है। इंसेफेलाइटिस का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में ही बना ली थी लेकिन इसे भारत आने में 100 साल लग गए। 2005 में यह वैक्सीन तब उपलब्ध हुई जब उन्होंने अधिवक्ताओं और अन्य नागरिकों ने इसके लिए आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस नियंत्रण समेत अन्य तस्वीर सिर्फ राजनीतिक निर्णय से नहीं बदली है बल्कि सबके साथ से बदली है। परिचय समारोह को जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के मंत्री अनुज अस्थाना ने किया।
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सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रकाश मिश्र, बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव, उपाध्यक्षगण शिव कुमार निषाद, अभिषेक सिंह, सुमित मिश्रा, अंशुमान पाठक, कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार शुक्ला, संयुक्त मंत्री प्रशासन रमेश कुमार यादव, संयुक्त मंत्री पुस्तकालय अमरनाथ कुशवाहा, संयुक्त मंत्री प्रकाशन आशुतोष दूबे, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य धनंजय त्रिपाठी, रंजन श्रीवास्तव, आशुतोष कुमार श्रीवास्तव, केसरी चंद, रमेश सिंह, राकेश शुक्ला, कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य रोशनी आर्या, आलोक कुमार गोयल, हर्ष कुमार शुक्ला, अमित कुमार पांडेय, आनंद तिवारी, सज्जन पांडेय, एडवोकेट अजय गुप्ता बजरंगी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
बार एसोसिएशन के समृद्ध विरासत का सीएम ने कराया स्मरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सिविल कोर्ट की स्थापना का एक लंबा इतिहास है। 1895 में इस कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह पीढ़ी दर पीढ़ी न्याय तथा समाज के मूल्यों को आगे बढ़ाता रहा है। देश की आजादी के आंदोलन में इस कचहरी की बड़ी भूमिका थी। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बाबू चारुचंद्र दास, जस्टिस इस्माइल, पंडित हरीशचन्द्रपति त्रिपाठी आदि का नाम गोरखपुर बार एसोसिएशन के इतिहास में आदर के साथ लिया जाता है। प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य कर इस बार को सम्मानित किया। एडवोकेट केपी सिंह राजनीति के क्षेत्र में दो बार विधान परिषद के सदस्य चुने गये। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जितने भी बड़े नेता थे वे अधिवक्ता थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर के अधिवक्ता एक समृद्ध परम्परा के वाहक हैं।