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फर्जी IAS: नौकरी दिलाने और टेंडर के नाम पर करोड़ों की ठगी, लगा गैंगस्टर-अब जब्त होगी संपत्ति

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 08 Jun 2026 02:34 AM IST
सार

जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना ललित किशोर खुद को 'गौरव कुमार सिंह' नामक IAS अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करता था। उसका साला अभिषेक कुमार खुद को IAS का स्टेनो और परमानंद गुप्ता गनर बताकर भरोसा जीतते थे। गुलरिहा पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। मुख्य आरोपी ललित किशोर को गिरोह का सरगना बनाया गया है। पुलिस अब आरोपियों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की तैयारी में है।

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Main accused Lalit was made the gang leader, Gulriha police took action, now the property will be confiscated.
फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सरकारी नौकरी और ठेके दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपी फर्जी आईएएस और उसके गिरोह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। अब पुलिस उनकी चल-अचल संपत्तियों की भी जांच कर रही है।
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फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, यह मामला उस समय चर्चा में आया था, जब वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक कारोबारी के पास से रेलवे स्टेशन पर करीब एक करोड़ रुपये बरामद हुए थे। जांच के दौरान ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया था कि फर्जी आईएएस ने टेंडर के नाम पर भी कारोबारी से रुपये लिए थे। 
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फर्जी आईएएस ललित किशोर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे - फोटो : अमर उजाला
कारोबारी मुकुंद माधव की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर 10 दिसंबर 2025 को बिहार के सीतामढ़ी निवासी ललित किशोर, उसके साले अभिषेक कुमार और गोरखनाथ क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी परमानंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था।
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फर्जी आईएएस गौरव कुमार सिंह
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4.15 लाख रुपये नकद, लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, फर्जी पहचान पत्र, कूटरचित दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की थी। जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना ललित किशोर खुद को 'गौरव कुमार सिंह' नामक आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करता था।
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फर्जी आईएएस का साथी गिरफ्तार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसका साला अभिषेक कुमार खुद को आईएएस का स्टेनो और परमानंद गुप्ता गनर बताकर भरोसा जीतते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह सरकारी विभागों में पहुंच और प्रभाव का दावा कर बेरोजगार युवाओं और कारोबारियों को नौकरी और ठेका दिलाने का लालच देता था।
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