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जिन्हें अपनों ने ठुकराया, उन्हें गैरों ने अपनाया, जिंदगी के इस मोड़ पर ऐसे मनाया नववर्ष

Thu, 02 Jan 2020 10:20 PM IST
विजय जैन विष्णु त्रिपाठी, गोरखपुर
विष्णु त्रिपाठी, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Thu, 02 Jan 2020 10:20 PM IST
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New year 2020 celebrated in old age home gorakhpur
old age home - फोटो : अमर उजाला
वृद्धाश्रम में रहने वाले इन बुजुर्गों को अब अपनों की याद ज्यादा नहीं सताती। साथ में जो हैं, वहीं अपने हैं और इनका परिवार भी। सब हंसी-खुशी के माहौल में रहते हैं। बुधवार को इन बुजुर्गों ने नए साल का जश्न मनाया। उनकी खुशी में कुछ समाजसेवी भी शामिल हुए। सभी ने एक दूसरे से गले मिलकर नए साल की बधाई दी।


रामगढ़ताल के झरवां में स्थित गोकुलधाम वृद्घाश्रम में चारों ओर हंसी-खुशी का माहौल दिखा। आश्रम में रहने वाले 58 बुजुर्गों ने नए साल के जश्न अपने अंदाज में मनाया। सुबह सबसे पहले मैनेजर रामसिंह निषाद ने सबको मिठाई खिलाई। जश्न में शामिल होने पहुंचे समाजसेवी उर्मिला देवी और शिवसागर चंद ने बुजुर्गों से गले मिलकर उन्हें नववर्ष की बधाई दी। फिर सबका मुंह मीठा कराया गया।
New year 2020 celebrated in old age home gorakhpur
आश्रम में दो महीने पहले आए थे श्री। - फोटो : अमर उजाला
‘हम अपनों के बीच तो ही हैं’
वृद्धाश्रम में रहने वालों से जब पूछा गया कि अपनों की याद नहीं आती? तो उन्होंने दो टूक कहा- कौन अपने, यहां हम अपनों के बीच में ही तो हैं, लगता है, आप उन गैरों की बात कर रहे हैं, जिन्होंने हमें छोड़ दिया। उनके चेहरे के भाव बता रहे थे कि उन्हें सगों के साथ नहीं होने की कसक तो है, लेकिन यहां रह रहे साथियों से बंध गई रिश्तों की डोर इतनी मजबूत हो गई है कि अब उन्हें सगों की याद ज्यादा नहीं सताती। वे तो सगों की जिक्र करने से भी बचते हैं, जिनकी वजह से उन्हें वृद्धाश्रम की शरण लेनी पड़ी। 

झरवां के श्री (80) ने बताया- आश्रम में दो महीना पहले आया हुं। एक बेटा है, वह बंगलुरू में रहकर पेंट पालिश करता है। उसकी पत्नी प्रताड़ित करती थी। लिहाजा हम यहां आ गए। यहां मिले सबके साथ ने हमें अपनों को भूलने में मदद की। यही मेरा परिवार है। कभी-कभार बेटा आ जाता है।
New year 2020 celebrated in old age home gorakhpur
आश्रम में छह महीने पहले आए सुग्रीव । - फोटो : अमर उजाला
खजांची के सुग्रीव (82) ने बताया- आश्रम में छह महीना पहले आया हूं। पत्नी का देहांत हो गया। केवल बेटियां हैं, उनकी शादी हो चुकी है। वे अपने परिवार में व्यस्त हैं। कभी मिलने नहीं आतीं। शुरुआत में उनका इंतजार करता था। लेकिन अब यही मेरा परिवार है। हम सब त्योहार एक साथ ही मनाते हैं।
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New year 2020 celebrated in old age home gorakhpur
प्रभावती देवी। - फोटो : अमर उजाला
झरवां की प्रभावती देवी (78) ने बताया- चार बेटे थे। तीन की मौत हो चुकी है। एक बेटा हमेशा शराब के नशे में रहता है। उसकी पत्नी भी देखभाल नहीं करती थी। बेटा अक्सर घर से निकाल देता था। तंग आकर दो महीने पहले यहां आ गई। यहां मैं खुश हूं। आश्रम के साथियों के साथ ही हर खुशी मनाती हूं।
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New year 2020 celebrated in old age home gorakhpur
फुकनी देवी। - फोटो : अमर उजाला
फुकनी देवी (79) ने बताया- तीन माह से यहां हूं। तीन बेटे और एक बेटी है। सभी की शादी हो चुकी है। शादी के बाद से ही बेटे बेगाने हो गए। उन्होंने अकेला छोड़ दिया। बेटी कभी-कभार आती है मिलने। नववर्ष पर कोई अपना नहीं आया। आसपास के कुछ लोग आए थे। अब यही मेरे अपने हैं।
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