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कैंट रेलवे क्राॅसिंग : नहीं शुरू हुआ ओवरब्रिज निर्माण, सेकंड एंट्री का प्रस्ताव भी लटका
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गोरखपुर। कैंट रेलवे क्रॉसिंग (157-ए स्पेशल) पर टू लेन के ओवरब्रिज का निर्माण एजेंसी फाइनल होने के बाद शुरू नहीं हो सका है, जबकि इसके लिए दिसंबर 2024 में ही रेलवे बोर्ड ने स्वीकृति दी थी। इसी तरह कैंट स्टेशन के सेकंड एंट्री गेट का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड में लटक गया है। इससे क्रॉसिंग में जाम से फंसने वालों को फर्राटा से जाने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
कैंट रेलवे क्रॉसिंग पर ''वाई'' आकार में टू लेन का ओवरब्रिज (पुल) बनाया जाना है। रेलवे प्रशासन ने निर्माण कार्य के लिए एजेंसी नामित करने के साथ ही लेटर आफ एक्सेप्टेंस (एलओए) जारी कर दिया है। निर्माण कार्य पूरा करने के के लिए डेढ़ साल का समय भी निर्धारित कर दिया है लेकिन मिट्टी का परीक्षण कराकर छोड़ दिया गया। पुल की चौड़ाई साढ़े सात मीटर और लंबाई 870 मीटर होगी। इसके लिए 26 पिलर बनाए जाएंगे। निर्माण संगठन ने निर्माण कार्य आरंभ करने के लिए लगभग 53 करोड़ रुपये का संशोधित बजट भी पास कर दिया है।
ओवरब्रिज को जीआरडी स्कूल के सामने से शुरू किया जाएगा और रेलवे क्रॉसिंग के बाद 300 मीटर की लंबाई में वाई कनेक्ट कर दिया जाएगा। जानकारों का कहना है कि निर्माण की सुस्त कार्य के चलते 18 महीने में इसे पूरा करना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं, सेकंड एंट्री गेट के लिए रेल प्रशासन ने जीआरडी से जमीन लेने की औपचारिकताएं पूरी कर ली है लेकिन निर्माण का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड में लंबे समय से अटका पड़ा है। इसके बनने से यात्रियों को बड़ी सहूलियत होगा।
रेलवे क्रॉसिंग पर लगता है जाम...मिलेगी मुक्ति
कैंट रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए रेलवे क्रॉसिंग पर रोजाना जाम लगता है। करीब 160 से ज्यादा ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं और शंटिंग के दौरान इंजन भी जाता है। ऐसे में कभी-कभी क्रॉसिंग एक घंटे से ज्यादा समय तक बंद रहता है। ओवरब्रिज के बनने से लोगों को जाम से मुक्ति मिल जाएगी। सबसे ज्यादा राहत एम्स जाने वाले मरीजों को होगी। कैंट स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद वे जाम में फंस जाते हैं। इसके अलावा स्कूली बच्चों और सुबह ऑफिस जाने वालों को दिक्कत नहीं होगी।
इन कॉलोनियों के लोगों को होगी राहत
झरना टोला, गायत्री नगर, मोहनापुर, काशीपुरम, अयोध्यापुरम, टीचर्स कॉलोनी, ऊंचवा, दरगहिया, केंद्रीय विद्यालय परिसर समेत 18 कॉलोनियों के लोगों को राहत मिलेगी।
ओवरब्रिज निर्माण के लिए एजेंसी फाइनल हो गई है। रास्ते में पड़ने वाले कुछ पेड़ों की कटाई भी आवश्यक है। इसके लिए वन विभाग से समन्वय किया जा रहा है। जल्द निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
- सुमित कुमार, सीपीआरओ, एनईआर
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कैंट रेलवे क्रॉसिंग पर ''वाई'' आकार में टू लेन का ओवरब्रिज (पुल) बनाया जाना है। रेलवे प्रशासन ने निर्माण कार्य के लिए एजेंसी नामित करने के साथ ही लेटर आफ एक्सेप्टेंस (एलओए) जारी कर दिया है। निर्माण कार्य पूरा करने के के लिए डेढ़ साल का समय भी निर्धारित कर दिया है लेकिन मिट्टी का परीक्षण कराकर छोड़ दिया गया। पुल की चौड़ाई साढ़े सात मीटर और लंबाई 870 मीटर होगी। इसके लिए 26 पिलर बनाए जाएंगे। निर्माण संगठन ने निर्माण कार्य आरंभ करने के लिए लगभग 53 करोड़ रुपये का संशोधित बजट भी पास कर दिया है।
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ओवरब्रिज को जीआरडी स्कूल के सामने से शुरू किया जाएगा और रेलवे क्रॉसिंग के बाद 300 मीटर की लंबाई में वाई कनेक्ट कर दिया जाएगा। जानकारों का कहना है कि निर्माण की सुस्त कार्य के चलते 18 महीने में इसे पूरा करना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं, सेकंड एंट्री गेट के लिए रेल प्रशासन ने जीआरडी से जमीन लेने की औपचारिकताएं पूरी कर ली है लेकिन निर्माण का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड में लंबे समय से अटका पड़ा है। इसके बनने से यात्रियों को बड़ी सहूलियत होगा।
रेलवे क्रॉसिंग पर लगता है जाम...मिलेगी मुक्ति
कैंट रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए रेलवे क्रॉसिंग पर रोजाना जाम लगता है। करीब 160 से ज्यादा ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं और शंटिंग के दौरान इंजन भी जाता है। ऐसे में कभी-कभी क्रॉसिंग एक घंटे से ज्यादा समय तक बंद रहता है। ओवरब्रिज के बनने से लोगों को जाम से मुक्ति मिल जाएगी। सबसे ज्यादा राहत एम्स जाने वाले मरीजों को होगी। कैंट स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद वे जाम में फंस जाते हैं। इसके अलावा स्कूली बच्चों और सुबह ऑफिस जाने वालों को दिक्कत नहीं होगी।
इन कॉलोनियों के लोगों को होगी राहत
झरना टोला, गायत्री नगर, मोहनापुर, काशीपुरम, अयोध्यापुरम, टीचर्स कॉलोनी, ऊंचवा, दरगहिया, केंद्रीय विद्यालय परिसर समेत 18 कॉलोनियों के लोगों को राहत मिलेगी।
ओवरब्रिज निर्माण के लिए एजेंसी फाइनल हो गई है। रास्ते में पड़ने वाले कुछ पेड़ों की कटाई भी आवश्यक है। इसके लिए वन विभाग से समन्वय किया जा रहा है। जल्द निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
- सुमित कुमार, सीपीआरओ, एनईआर

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