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विकसित भारत के लिए ज्ञान के साथ संस्कार भी जरूरी : राज्यपाल
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एमएमएमयूटी के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल बोलीं-भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है संयुक्त परिवार व्यवस्था
बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने के साथ वैवाहिक संबंधों में सम्मान और समानता करनी होगी सुनिश्चित
एमएमएमयूटी के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 20 मेधावियों को 46 स्वर्ण पदक देकर किया सम्मानित
गोरखपुर। प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल तकनीक और आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से होगा। आज के विद्यार्थी ही वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माता हैं, इसलिए उन्हें डिग्री के साथ मानवीय मूल्य, चरित्र और सेवा भाव को भी अपनाना होगा।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के 11वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 20 मेधावियों को 46 पदक देकर सम्मानित करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। कहा कि पदक प्राप्त करने वालों में 60 प्रतिशत छात्राएं तथा 40 प्रतिशत छात्र हैं। यह उच्च शिक्षा में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है। राज्यपाल ने युवाओं से नशा मुक्ति को जनआंदोलन बनाने, ''एक पेड़ मां के नाम'' विद्यार्थियों को दीक्षा देते हुए राज्यपाल ने संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी जीवन मूल्यों के सबसे बड़े शिक्षक हैं। विद्यार्थियों से उन्होंने बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं लेकिन दहेज, घरेलू हिंसा और पारिवारिक अपराध जैसी कुरीतियां समाज के लिए चुनौती हैं। बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने के साथ वैवाहिक संबंधों में सम्मान और समानता सुनिश्चित करनी होगी।
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नशा मुक्त युवा अभियान के उलट हो रहा कार्य
राज्यपाल ने युवाओं को नशे से दूर रहने की नसीहत दी। कहा कि यहां नशामुक्त युवा अभियान के उलट कार्य हो रहा है। इसकी गवाही हॉस्टल के कूड़ेदान दे रहे हैं। जनभवन की टीम को निरीक्षण में जो कुछ मिला वह चिंताजनक है। जो कमियां मिली हैं उनको जल्द से जल्द दूर किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी तकनीकी विश्वविद्यालय बैठक कर भवनों के निर्माण की डिजाइन तैयार करें। साथ ही सुविधाओं और जरूरतों की समीक्षा करने के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाएं, जिसमें छात्रों को भी रखें।
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बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने के साथ वैवाहिक संबंधों में सम्मान और समानता करनी होगी सुनिश्चित
एमएमएमयूटी के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 20 मेधावियों को 46 स्वर्ण पदक देकर किया सम्मानित
गोरखपुर। प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल तकनीक और आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से होगा। आज के विद्यार्थी ही वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माता हैं, इसलिए उन्हें डिग्री के साथ मानवीय मूल्य, चरित्र और सेवा भाव को भी अपनाना होगा।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के 11वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 20 मेधावियों को 46 पदक देकर सम्मानित करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। कहा कि पदक प्राप्त करने वालों में 60 प्रतिशत छात्राएं तथा 40 प्रतिशत छात्र हैं। यह उच्च शिक्षा में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है। राज्यपाल ने युवाओं से नशा मुक्ति को जनआंदोलन बनाने, ''एक पेड़ मां के नाम'' विद्यार्थियों को दीक्षा देते हुए राज्यपाल ने संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी जीवन मूल्यों के सबसे बड़े शिक्षक हैं। विद्यार्थियों से उन्होंने बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं लेकिन दहेज, घरेलू हिंसा और पारिवारिक अपराध जैसी कुरीतियां समाज के लिए चुनौती हैं। बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने के साथ वैवाहिक संबंधों में सम्मान और समानता सुनिश्चित करनी होगी।
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नशा मुक्त युवा अभियान के उलट हो रहा कार्य
राज्यपाल ने युवाओं को नशे से दूर रहने की नसीहत दी। कहा कि यहां नशामुक्त युवा अभियान के उलट कार्य हो रहा है। इसकी गवाही हॉस्टल के कूड़ेदान दे रहे हैं। जनभवन की टीम को निरीक्षण में जो कुछ मिला वह चिंताजनक है। जो कमियां मिली हैं उनको जल्द से जल्द दूर किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी तकनीकी विश्वविद्यालय बैठक कर भवनों के निर्माण की डिजाइन तैयार करें। साथ ही सुविधाओं और जरूरतों की समीक्षा करने के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाएं, जिसमें छात्रों को भी रखें।
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