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UP :46 साल बाद जिंदा हुई ‘मृतक की पत्नी’!, पत्नी बनाकर करवा दी रजिस्ट्री- कुटुंब रजिस्टर में भी चढ़ गया नाम

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Wed, 18 Mar 2026 06:20 AM IST
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सार

आरोप है कि वर्षों बाद जालसाजों ने भानमती नामक महिला को निठुरी प्रसाद की पत्नी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए। इतना ही नहीं, पूर्व ग्राम प्रधान के कथित नकली हस्ताक्षर के सहारे कुटुंब रजिस्टर में उसका नाम भी दर्ज करा दिया गया। साजिश यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि तहसील स्तर पर भी हेरफेर कर जमीन को भानमती के नाम वरासत करा लिया गया। इसके बाद उसने उक्त जमीन तीन अन्य लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी।

The game of registering one acre of land with fake documents is exposed in Gorakhpur
जमीन( सांकेतिक)
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विस्तार

खजनी थाना क्षेत्र के डोहरियां प्राणनाथ गांव में जमीन हड़पने के लिए रची गई एक चौंकाने वाली साजिश सामने आई है। जालसाजों ने 46 साल पहले मृत व्यक्ति की पत्नी बनाकर एक बुजुर्ग महिला के नाम एक एकड़ से अधिक जमीन की फर्जी वरासत और फिर रजिस्ट्री करा दी। मामले का खुलासा होते ही तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया।

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जानकारी के अनुसार, गांव निवासी निठुरी प्रसाद की 12 सितंबर 1979 को हत्या हो गई थी। उनकी पत्नी परभौती का भी 20 अक्तूबर 1981 को निधन हो चुका था। दंपती की कोई संतान नहीं थी, जिसके चलते 30 मार्च 1993 को उनकी संपत्ति छोटे भाई विंध्याचल के नाम दर्ज कर दी गई थी।

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आरोप है कि वर्षों बाद जालसाजों ने भानमती नामक महिला को निठुरी प्रसाद की पत्नी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए। इतना ही नहीं, पूर्व ग्राम प्रधान के कथित नकली हस्ताक्षर के सहारे कुटुंब रजिस्टर में उसका नाम भी दर्ज करा दिया गया।

साजिश यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि तहसील स्तर पर भी हेरफेर कर जमीन को भानमती के नाम वरासत करा लिया गया। इसके बाद उसने उक्त जमीन तीन अन्य लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी। यह पूरा मामला जमीन कब्जाने के लिए सुनियोजित तरीके से किया गया फर्जीवाड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कई स्तरों पर दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई।

मामले की भनक लगते ही असली वारिस विंध्याचल ने तहसीलदार न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि भानमती का इस परिवार से कोई संबंध नहीं है। वह बांसगांव तहसील क्षेत्र की रहने वाली है और उसकी शादी कहीं और हुई है। पीड़ित पक्ष ने यह भी बताया कि वर्ष 2016 में भी इसी तरह का प्रयास किया गया था, जिसे तत्कालीन तहसीलदार ने खारिज कर दिया था।

मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह ने जमीन की रजिस्ट्री और कब्जे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

कैंसर से जूझ रहा वारिस, फिर भी लड़ाई जारी
वर्तमान में विंध्याचल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उनका इलाज चल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखा। उनके पुत्र मलखा ने भी मामले को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
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