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Gorakhpur News: आयुक्त न्यायालय की जमीन मिलने की आस, दीवानी कचहरी बनेगी खास
Tue, 07 Jul 2026 02:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:56 AM IST
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गोरखपुर। वर्षों से जगह की कमी से जूझ रही दीवानी कचहरी के विस्तार की उम्मीद अब आयुक्त न्यायालय की जमीन से जुड़ गई है। आयुक्त न्यायालय के निकट भविष्य में दूसरे परिसर में स्थानांतरित होने की संभावना को देखते हुए बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। अधिवक्ताओं का दावा है कि यदि ऐसा होता है तो बहुप्रतीक्षित इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण की सबसे बड़ी बाधा दूर हो जाएगी।
अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मौजूदा आयुक्त न्यायालय की जमीन और भवन को दीवानी न्यायालय परिसर में शामिल किया जाए। अधिवक्ताओं ने बताया कि शासन स्तर पर इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना है लेकिन मौजूदा दीवानी परिसर में पर्याप्त जमीन नहीं होने से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसी बीच आयुक्त न्यायालय के स्थानांतरण की चर्चा ने अधिवक्ताओं को नई उम्मीद दी है। उनका कहना है कि अलग स्थान पर नई दीवानी कचहरी बसाने के बजाय मौजूदा परिसर का विस्तार अधिक व्यावहारिक, कम खर्चीला और आम लोगों के हित में होगा।
वर्तमान में दीवानी कचहरी में अधिवक्ताओं के अधिकांश चैंबर जर्जर और तंग हैं। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। न्यायिक अधिकारियों के आवास, रिकॉर्ड रूम, वादकारियों के प्रतीक्षालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। बढ़ते मुकदमों के अनुपात में परिसर छोटा पड़ चुका है, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित होता है।
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बार एसोसिएशन का कहना है कि आयुक्त न्यायालय की भूमि मिलने पर आधुनिक अधिवक्ता चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, पर्याप्त पार्किंग, कैंटीन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डिजिटल रिकॉर्ड सेंटर और वादकारियों के लिए बेहतर सुविधाओं वाला इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा सकता है। इससे वर्षों से टूटे-फूटे चैंबरों में काम करने को मजबूर अधिवक्ताओं को भी राहत मिलेगी।
बोले अधिवक्तायदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो दशकों बाद दीवानी कचहरी को योजनाबद्ध विस्तार मिलेगा। अब निगाहें शासन के फैसले पर टिकी हैं कि आयुक्त न्यायालय के संभावित स्थानांतरण के बाद उसकी जमीन दीवानी कचहरी के हिस्से में आती है या नहीं। यही निर्णय गोरखपुर की न्यायिक व्यवस्था की दिशा और दशा बदल सकता है।
- अनुज अस्थाना, मंत्री, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट
बोले अधिवक्ता
इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आधुनिक अधिवक्ता चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधा, स्पोर्ट्स सुविधा, पर्याप्त पार्किंग और कैंटीन की व्यवस्था होगी। टूटे-फूटे चैंबर में काम करने को अधिवक्ता मजबूर नहीं होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अधिवक्ताओं को काफी उम्मीदें हैं।
- शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट
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अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मौजूदा आयुक्त न्यायालय की जमीन और भवन को दीवानी न्यायालय परिसर में शामिल किया जाए। अधिवक्ताओं ने बताया कि शासन स्तर पर इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना है लेकिन मौजूदा दीवानी परिसर में पर्याप्त जमीन नहीं होने से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसी बीच आयुक्त न्यायालय के स्थानांतरण की चर्चा ने अधिवक्ताओं को नई उम्मीद दी है। उनका कहना है कि अलग स्थान पर नई दीवानी कचहरी बसाने के बजाय मौजूदा परिसर का विस्तार अधिक व्यावहारिक, कम खर्चीला और आम लोगों के हित में होगा।
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वर्तमान में दीवानी कचहरी में अधिवक्ताओं के अधिकांश चैंबर जर्जर और तंग हैं। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। न्यायिक अधिकारियों के आवास, रिकॉर्ड रूम, वादकारियों के प्रतीक्षालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। बढ़ते मुकदमों के अनुपात में परिसर छोटा पड़ चुका है, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित होता है।
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बार एसोसिएशन का कहना है कि आयुक्त न्यायालय की भूमि मिलने पर आधुनिक अधिवक्ता चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, पर्याप्त पार्किंग, कैंटीन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डिजिटल रिकॉर्ड सेंटर और वादकारियों के लिए बेहतर सुविधाओं वाला इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा सकता है। इससे वर्षों से टूटे-फूटे चैंबरों में काम करने को मजबूर अधिवक्ताओं को भी राहत मिलेगी।
बोले अधिवक्तायदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो दशकों बाद दीवानी कचहरी को योजनाबद्ध विस्तार मिलेगा। अब निगाहें शासन के फैसले पर टिकी हैं कि आयुक्त न्यायालय के संभावित स्थानांतरण के बाद उसकी जमीन दीवानी कचहरी के हिस्से में आती है या नहीं। यही निर्णय गोरखपुर की न्यायिक व्यवस्था की दिशा और दशा बदल सकता है।
- अनुज अस्थाना, मंत्री, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट
बोले अधिवक्ता
इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आधुनिक अधिवक्ता चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधा, स्पोर्ट्स सुविधा, पर्याप्त पार्किंग और कैंटीन की व्यवस्था होगी। टूटे-फूटे चैंबर में काम करने को अधिवक्ता मजबूर नहीं होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अधिवक्ताओं को काफी उम्मीदें हैं।
- शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट