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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Those hostile to Lord Ram cannot tolerate Ayodhya's grandeur: CM Yogi thunders in Gorakhpur.

गोरखपुर न्यूज: रामद्रोहियों को बर्दाश्त नहीं हो रहा अयोध्या का वैभव, गोरखपुर में गरजे सीएम योगी

Wed, 30 Sep 2026 04:05 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Wed, 30 Sep 2026 04:05 PM IST
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Those hostile to Lord Ram cannot tolerate Ayodhya's grandeur: CM Yogi thunders in Gorakhpur.
सीएम योगी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1949 में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला का प्रकटीकरण श्रीराम मंदिर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है तो रामद्रोहियों को इसका वैभव बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
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रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा। हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए किसी प्रकार के भ्रम या संशय की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के तहत श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर, काशी में बाबा विश्वनाथ का धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम का वैभव, प्रयागराज का दिव्य कुंभ और वृंदावन का वैष्णव कुंभ सनातन की समृद्ध परंपरा के प्रतीक हैं। इससे चिढ़ने वाले लोग भ्रम और दुष्प्रचार फैलाने का प्रयास करेंगे। सनातन धर्मावलंबियों को ऐसे प्रयासों के प्रति सजग रहना होगा।
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वैष्णव कुंभ पर बांके बिहारी और राधारानी की कृपा
सीएम योगी ने 2019 में प्रयागराज में आयोजित भव्य कुंभ के बाद वृंदावन में हुए वैष्णव कुंभ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय कोरोना का प्रकोप था लेकिन बांके बिहारी लाल और राधारानी की कृपा से आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति का प्रभाव इसी तरह दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शैव परंपरा की गोरक्षपीठ संपूर्ण सनातन के लिए समर्पित है। यह किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति के साथ भेदभाव नहीं करती। अलग-अलग पंथों की अपनी उपासना पद्धति हो सकती है, लेकिन सभी के कल्याण की भावना व्यापक सनातन धर्म में निहित है।

अलग-अलग चलना दुर्गति का कारण बनेगा
सीएम योगी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करने के लिए सभी पंथों और संप्रदायों को एक भाव, एक स्वर और एक साथ आगे बढ़ना होगा। 140 करोड़ भारतवासी एक साथ चलने का सामर्थ्य जुटा लें तो दुनिया की कोई ताकत उनके सामने नहीं ठहर पाएगी। अलग-अलग स्वर और अलग गति से चलना दुर्गति का कारण बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत और महापुरुष केवल वर्तमान के लिए नहीं सोचते, बल्कि उनके कार्य भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। करीब 95 वर्ष पहले, जब देश गुलाम था और साधन-संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की।

उन्होंने स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्श महाराणा प्रताप के नाम पर शिक्षा के इस प्रकल्प का नाम रखा। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ को अपने कार्यों का श्रेय लेने की इच्छा नहीं थी। उनका मानना था कि गोरक्षपीठ हिंदू और लोककल्याण की पीठ है तथा इसकी संपत्ति लोकोपयोगी कार्यों के लिए है।

शिक्षा क्षेत्र में योगदान आज भी अनुकरणीय
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की गुलामी के दौर में महंत दिग्विजयनाथ ने बालिका महाविद्यालय की स्थापना की। संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्कृत महाविद्यालय भी स्थापित किया। उनका मानना था कि भारत को उसकी परंपरा और विरासत के अनुरूप आगे बढ़ाना चाहिए। महंत और सांसद के रूप में उनके प्रयास आज भी अनुकरणीय हैं। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की 50 से अधिक संस्थाएं उनके आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ने का संकल्प ले रही हैं।

संतों के कार्य असाधारण होते हैं : स्वामी राजेंद्रदास
श्रद्धांजलि सभा में रेवासाधाम वृंदावन से आए मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को नमन किया। उन्होंने कहा कि संत असाधारण होते हैं, इसलिए उनके कार्य भी असाधारण होते हैं। गोरक्षपीठ महान संतों की तपस्या और सेवा से पवित्र हुई भूमि है।

नाथपंथ की परंपरा के महान वाहक थे दिग्विजयनाथ : बालकनाथ
मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर के महंत और राजस्थान विधानसभा के सदस्य बालकनाथ ने कहा कि नाथ परंपरा ने सदैव लोककल्याण की भावना से समाज को एकजुट रखने का काम किया। महंत दिग्विजयनाथ इसी परंपरा के महान वाहक थे। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थाओं की स्थापना के माध्यम से उन्होंने जनकल्याण को आगे बढ़ाया।

लोककल्याण के लिए समर्पित रहे दिग्विजयनाथ
श्रीरामजानकी मंदिर वाराणसी से आए डॉ. रामकमलदास वेदांती ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ की साधना लोक और राष्ट्र कल्याण के लिए समर्पित थी। अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में राष्ट्रीय मूल्यों और सनातन मानबिंदुओं को प्रतिष्ठित करने का अभियान आगे बढ़ाया।

काशी से आए जगद्गुरु विष्णुस्वामी संप्रदायाचार्य संतोषाचार्य ‘सतुआ बाबा’ ने कहा कि उन्होंने धर्म और अध्यात्म के साथ शिक्षा के माध्यम से समाज को एकसूत्र में जोड़ने का कार्य किया। सभा को आदिशक्ति मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सदस्य एवं पूर्व कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने भी संबोधित किया।

संस्थाओं के प्रमुखों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रमुखों ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय, दिग्विजयनाथ आयुर्वेद चिकित्सालय, दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज, महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज समेत परिषद की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


पुस्तक का विमोचन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामनरेश पांडेय की पुस्तक ‘श्री हनुमत्कथापूजनम’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश मोहन सरकार ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना और श्रद्धांजलि गीत प्रस्तुत किया।
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