गोरखपुर में सपा के अधिकृत प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता के नामांकन न कराने से भाजपा प्रत्याशी व कैंपियरगंज के विधायक फतेह बहादुर की पत्नी साधना सिंह का निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया है। अब सिर्फ औपचारिक तौर पर घोषणा और जीत का प्रमाण पत्र दिया जाना ही बाकी है। नाम वापसी वाले दिन 29 जून को दोपहर तीन बजे यह रस्म अदायगी भी पूरी हो जाएगी। साधना ने चार सेट में पर्चा दाखिल किया था। पूरे घटनाक्रम से नाराज सपा नेताओं ने शास्त्री चौक पर प्रदर्शन किया। साथ ही पुलिस-प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की है।
गोरखपुर: सपा प्रत्याशी का नामांकन से किनारा, भाजपा की साधना सिंह का निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय
सपा प्रत्याशी जितेंद्र नामंकन दाखिल करने निकले लेकिन कलेक्ट्रेट गेट पर ही भाजपा कार्यकर्ताओं से विवाद हो गया।
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इसी बीच पता चला कि अधिकृत प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता नामांकन कराने नहीं आ रहे हैं। इससे सपाइयों की चिंता बढ़ गई। आनन-फानन में जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का दूसरा प्रत्याशी बनाया गया। जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी व तमाम नेता जितेंद्र का नामांकन कराने निकल भी पड़े। शास्त्री चौक पर सपा का काफिला रोका गया।
प्रशासन की तरफ से कहा गया कि प्रत्याशी, प्रस्तावक व जिलाध्यक्ष ही नामांकन कक्ष तक जा सकते हैं। सपा नेता जैसे ही कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे, वैसे ही भाजपा नेताओं ने हूटिंग शुरू कर दी। इससे बात बढ़ी और विवाद होने लगा। आरोप है कि भाजपा नेताओं ने सपा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य पारस यादव को पीट दिया। साथ ही मुख्य द्वार पर कब्जा कर लिया। अंदर से द्वार बंद कर दिया। इसलिए सपा के दूसरे प्रत्याशी जितेंद्र यादव नामांकन नहीं कर सके। जैसे ही नामांकन की समयसीमा खत्म हुई, वैसे ही भाजपा खेमे में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सबने एक दूसरे को बधाई दी और कहा कि पार्टी प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है।
भाजपा का सवाल जितेंद्र ने नामांकन पत्र ही नहीं खरीदा, फिर प्रत्याशिता कैसे?
भाजपा समर्थकों का कहना था कि सपा की तरफ से आलोक कुमार गुप्ता और धर्मेंद्र यादव पर्चा ले गए थे। दोनों ही नामांकन करने नहीं पहुंचे। जितेंद्र यादव ने तो पर्चा ही नहीं लिया तो वे नामांकन कैसे कर सकते हैं। समर्थकों का आक्रोश देख सपा जिलाध्यक्ष नगीना, प्रत्याशी जितेंद्र यादव व उनके समर्थक व अनुमोदक, कलेक्ट्रेट के भीतर जाने का हौसला ही नहीं जुटा पाए और नामांकन में आधे घंटे का वक्त रहते ही दोपहर 2:30 बजे लौट गए। बाद में कुछ सपा कार्यकर्ताओं ने शास्त्री चौक पर प्रदर्शन कर विरोध जताया।
सपा ने नाटकीय ढंग से आखिरी वक्त में बदला प्रत्याशी
समाजवादी पार्टी ने नामांकन शुरू होने के चंद घंटे पहले ही एक नाटकीय घटनाक्रम में अपना प्रत्याशी बदल दिया। उन्होंने आलोक कुमार गुप्ता की जगह वार्ड नंबर 47 से जितेंद्र यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया जबकि उन्होंने नामांकन पत्र भी नहीं लिया था। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से वार्ड नंबर 46 से निर्वाचित आलोक कुमार गुप्ता को उम्मीदवार घोषित किया गया था। आलोक ने दो सेट में नामांकन पत्र भी खरीदा था। उनके अलावा पार्टी के ही वार्ड नंबर 16 से धर्मेंद्र यादव ने भी एक सेट में पर्चा लिया था। मगर नामांकन वाले दिन दोनों के नामांकन करने के लिए आगे नहीं आने पर सपा ने वार्ड नंबर 47 से जितेंद्र यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।
फूल-मालाओं से लाद ही गई साधना व फतेह बहादुर
नामांकन का समय खत्म होने के समय तीन बजे तक जब कोई और नामांकन नहीं हो सका तो साधना सिंह का निर्विरोध निर्वाचन तय देख भाजपा समर्थकों व फतेहबहादुर के करीबियों में खुशी की लहर दौड़ गई। कलेक्ट्रेट में साधना सिंह और फतेह बहादुर सिंह को फूल-मालाओं से लाद दिया गया। मिठाइयां बांटी गईं। जश्न का माहौल पार्क रोड स्थित फतेहबहादुर के आवास और कैंपियरगंज क्षेत्र में दिखाई पड़ा। जगह-जगह समर्थकों ने साधना सिंह और फतेहबहादुर के पक्ष में नारेबाजी की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। कई जगह पटाखे भी फोड़े गए।
कुल आठ दावेदारों ने खरीदा था पर्चा
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी साधना सिंह, सपा के आलोक कुमार गुप्ता और धर्मेंद्र यादव समेत आठ दावेदारों ने नामांकन पत्र खरीदा था। इनमें वार्ड संख्या पांच भटहट से अर्चिता सिंह पत्नी अजय कुमार सिंह, वार्ड नंबर आठ भटहट से मनोज मिश्रा, वार्ड नंबर 11 चरगांवा से संगीता पत्नी राजू पासवान, वार्ड नंबर 59 ब्रह्मपुर से सावित्री पत्नी रामप्रीत और वार्ड नंबर एक से राम दयाल यादव ने पर्चा लिया। सभी ने एक-एक सेट पर्चा खरीदा।