फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   UP MLC Teacher Election BJP and SP Face Setbacks as Rebel Leaders and Teacher Issues Shape Results

यूपी एमएलसी चुनाव: छोटा चुनाव, बड़ा संदेश, भाजपा के लिए अलर्ट, सपा का पीडीए समीकरण भी न चला; ये दांव पड़ा भारी

Thu, 29 Oct 2026 01:04 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 29 Oct 2026 01:04 PM IST
सार

यूपी एमएलसी शिक्षक चुनाव: यूपी एमएलसी चुनाव के नतीजों ने भाजपा और सपा के लिए बड़े संदेश दिया है। नतीजे भाजपा के लिए अलर्ट हैं, सपा का पीडीए समीकरण भी चला नहीं। भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह चुनाव के बीच ही बागी हो गए। वहीं, सपा को प्रत्याशी बदलना भारी पड़ गया।

विज्ञापन
UP MLC Teacher Election BJP and SP Face Setbacks as Rebel Leaders and Teacher Issues Shape Results
UP MLC Teacher - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भले ही सीमित मतदाताओं का था, लेकिन इसके संदेश बड़े हैं। आठ महीने से तैयारी कर रहे कमलेश यादव का सपा से टिकट कटना, भाजपा से टिकट न मिलने पर डॉ संजयन का सपा में जाना, भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के बागी तेवर ने इस चुनाव का रुख बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। विधानसभा चुनाव से पहले इन घटनाक्रम ने भाजपा व सपा के साथ शिक्षक संगठनों के लिए बड़े संदेश दिए हैं।
विज्ञापन
Trending Videos

देवेंद्र का बागी तेवर, शिक्षकों के मुद्दों पर ध्यान न देना भारी पड़ा
भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह चुनाव के बीच ही बागी हो गए। सरकार को कटघरे में खड़ा करके संकेतों में ही संदेश देकर शिक्षक मतदाताओं से मतदान की अपील करने लगे। पार्टी इस पर कड़ा रुख नहीं अपना पाई और नेतृत्व मौन रहा। भाजपा के शिक्षक संवाद सम्मेलन में गोरखपुर क्षेत्र से एमपी-एमएलए को आमंत्रित किया गया था लेकिन कई जिलों से लोगों ने शिरकत नहीं की।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

पिछले शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा ने शर्मा गुट के प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी को समर्थन दिया था। इस चुनाव में पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया। दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य एवं राजनीतिक विश्लेषक डॉ. ओपी सिंह कहते हैं, शर्मा गुट का अपना वर्चस्व रहता था और ध्रुव इसी गुट से तीन बार चुनाव जीते थे। 
विज्ञापन

ऐसे में ध्रुव का भाजपा में जाने का शिक्षकों में सकारात्मक संदेश नहीं गया। इसके अलावा भाजपा में रहते हुए डॉ. संजयन त्रिपाठी ने मतदाता बनवाए थे। सपा में उनके जाने का भी मतों पर असर पड़ा। शिक्षकों के मुद्दों पर कहीं न कहीं चूक हुई जिसका सकारात्मक असर चुनाव पर नहीं गया। इसके चलते भाजपा को कड़ी चुनौती झेलनी पड़ी। सरकार को अब शिक्षकों के मुद्दों पर गौर करने की जरूरत है।

सपा को प्रत्याशी बदलना भारी पड़ा, पीडीए फॉर्मूला नाकाम
सपा ने पीडीए (पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक) को नया राजनीतिक हथियार बनाया है। इस वोट बैंक के ध्रुवीकरण ने भी नए सियासी संदेश दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषक एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य महेंद्र सिंह कहते हैं, सपा ने कमलेश यादव को आठ महीने पहले प्रत्याशी बना दिया। 

वे लगातार सक्रिय रहे और चुनाव के ठीक पहले उन्हें बैठा दिया गया और भाजपा छोड़कर आए डॉ. संजयन त्रिपाठी को टिकट दे दिया गया। पार्टी को उम्मीद थी कि ब्राह्मण चेहरे को प्रत्याशी बनाने से उनके साथ पीडीए वोट बैंक जुड़ेगा तो चुनाव में पलड़ा भारी रहेगा लेकिन हुआ इसका उल्टा। इस बदलाव को सपा का एक बड़ा वोट बैंक स्वीकार नहीं कर पाया। वह निर्दलीय राजीव यादव के साथ खड़ा हो गया।

मुद्दों को उठाकर शिक्षकों के बीच राजीव ने बनाई पैठ
भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देने वाले निर्दलीय राजीव यादव ने ऑल टीचर्स एंड एम्प्लॉय वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के माध्यम से शिक्षकों के मुद्दों को लेकर लगातार जमीन पर संघर्ष करते रहे। वहीं, चुनाव के ठीक पहले सपा ने अपने प्रत्याशी कमलेश यादव का टिकट काटकर डॉ. संजयन त्रिपाठी को दे दिया। सपा का कैडर वोट बैंक खिसक गया। इसका सीधा लाभ राजीव यादव को मिला।

 

गोरखपुर विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य एवं राजनीतिक विश्लेषक अमित उपाध्याय कहते हैं, दल से ज्यादा प्रत्याशी पर मतदाता ने भरोसा जताया है। शिक्षकों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मुद्दों पर अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो नुकसान उठाना पड़ेगा।

जहां तक राजीव यादव को ज्यादा मत मिलने की बात है तो उन्होंने हमेशा शिक्षकों के मुद्दों की लड़ाई लड़ी। इसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला। शिक्षक समुदाय का बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा नजर आया। शिक्षकों ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि भले ही वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े हों, मुद्दे उनके लिए अहम हैं।

देवेंद्र सिंह, चितरंजन मिश्र की बात का भी नहीं दिखा असर
चुनाव में चार बार के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह और आवासीय विश्वविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष चितरंजन मिश्र जैसे चर्चित चेहरों ने सपा प्रत्याशी का खुलकर पैरवी की। मगर इसका कोई ठोस असर नजर नहीं आया। शिक्षकों ने बड़ी खामोशी से अपनी पसंद पर वोट किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed