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Gorakhpur News: वैदिक मंत्रों के बीच 53 दंपतियों ने यज्ञ में दी आहुति, सुख-समृद्धि की कामना
Thu, 29 Oct 2026 03:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 29 Oct 2026 03:01 AM IST
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गोरखपुर। असुरन चौक स्थित विष्णु मंदिर में मानस उत्थान समिति की ओर से आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 53 दंपतियों ने यज्ञ में आहुति देकर सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्य यज्ञाचार्य पंडित सुंदर श्याम त्रिपाठी के नेतृत्व में यज्ञ संपन्न हुआ।
यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। मुख्य यजमान प्रकाश नारायण त्रिपाठी, सुमित्रा देवी, विजय कुमार सिंह, राजेश चंद्र त्रिपाठी, माया सिंह, राजेश शुक्ला, बलबीर सिंह और अनुराधा वर्मा सहित 53 दंपति शामिल रहे। पुराण परायण और अखंड हरि-संकीर्तन अनवरत चल रहा है।
संस्कारों से मिलती है जीवन को सही दिशा : वृंदावन से आए कथावाचक पंडित हनुमतेश मिश्रा ने कहा कि भगवान राम और शिव का परस्पर पूज्य होना सनातन धर्म की विशेषता है। सोलह संस्कार मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण हैं। नामकरण संस्कार का महत्व बताते हुए उन्होंने अजामिल का प्रसंग सुनाया। कहा कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। कथा के प्रारंभ में नगर निगम के मुख्य अभियंता अमित कुमार शर्मा, महामंडलेश्वरी कनकेश्वरी नंद गिरी, व्यापारी राजन और समिति अध्यक्ष राधेश्याम श्रीवास्तव ने व्यास पीठ का पूजन और आरती की।
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यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। मुख्य यजमान प्रकाश नारायण त्रिपाठी, सुमित्रा देवी, विजय कुमार सिंह, राजेश चंद्र त्रिपाठी, माया सिंह, राजेश शुक्ला, बलबीर सिंह और अनुराधा वर्मा सहित 53 दंपति शामिल रहे। पुराण परायण और अखंड हरि-संकीर्तन अनवरत चल रहा है।
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संस्कारों से मिलती है जीवन को सही दिशा : वृंदावन से आए कथावाचक पंडित हनुमतेश मिश्रा ने कहा कि भगवान राम और शिव का परस्पर पूज्य होना सनातन धर्म की विशेषता है। सोलह संस्कार मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण हैं। नामकरण संस्कार का महत्व बताते हुए उन्होंने अजामिल का प्रसंग सुनाया। कहा कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। कथा के प्रारंभ में नगर निगम के मुख्य अभियंता अमित कुमार शर्मा, महामंडलेश्वरी कनकेश्वरी नंद गिरी, व्यापारी राजन और समिति अध्यक्ष राधेश्याम श्रीवास्तव ने व्यास पीठ का पूजन और आरती की।
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