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कर्म करना हमारा धर्म और फल पाना सौभाग्य : हेमसुता भारती
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नारायणगढ़ के दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में प्रवचन करतीं साध्वी बहनें। प्रवक्ता
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान हुसैनी रोड स्थित आश्रम में हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान हुसैनी रोड स्थित आश्रम में रविवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी हेमसुता भारती ने श्रद्धालुओं को बताया कि मनुष्य को हमेशा कर्म में लगे रहना चाहिए और कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नहीं छोड़नी चाहिए। क्योंकि कर्म करना हमारा धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य है। जिस प्रकार तेज हवा के कारण सागर में बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं और फिर सागर में समा जाती हैं। उनका अलग अस्तित्व नहीं होता। इसी प्रकार परमात्मा के बिना मानव का भी कोई अस्तित्व नहीं है।
उन्होंने कहा कि कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न दें। एक छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को बीन सकती हैं लेकिन एक विशालकाय हाथी ऐसा नहीं कर सकता। मोह माया में फंसा जीव भटकता रहता है। इस माया को बनाने वाला ही मुक्ति दाता हैं।सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन करके समूह संगत को कृतार्थ किया और प्रसाद का वितरण भी किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान हुसैनी रोड स्थित आश्रम में रविवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी हेमसुता भारती ने श्रद्धालुओं को बताया कि मनुष्य को हमेशा कर्म में लगे रहना चाहिए और कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नहीं छोड़नी चाहिए। क्योंकि कर्म करना हमारा धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य है। जिस प्रकार तेज हवा के कारण सागर में बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं और फिर सागर में समा जाती हैं। उनका अलग अस्तित्व नहीं होता। इसी प्रकार परमात्मा के बिना मानव का भी कोई अस्तित्व नहीं है।
उन्होंने कहा कि कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न दें। एक छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को बीन सकती हैं लेकिन एक विशालकाय हाथी ऐसा नहीं कर सकता। मोह माया में फंसा जीव भटकता रहता है। इस माया को बनाने वाला ही मुक्ति दाता हैं।सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन करके समूह संगत को कृतार्थ किया और प्रसाद का वितरण भी किया गया।
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