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Ambala News: कचरा निस्तारण पर संकट, सेना और सिविल एरिया में ठप हो सकती है सफाई व्यवस्था

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:43 AM IST
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Garbage disposal is in trouble, and sanitation in military and civilian areas could come to a standstill.
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- पोर्टल के माध्यम से 7 एजेंसियों ने किया था आवेदन, मूल्यांकन के दौरान सभी अयोग्य घोषित
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311.996 मीट्रिक टन कचरा रोजाना निकलता है।
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंटोनमेंट बोर्ड के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि सेना और सिविल क्षेत्र से निकलने वाले कचरे के प्रसंस्करण का अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। वर्तमान में बोर्ड के पास कचरा निस्तारण का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है। इस कारण शहर में गंदगी के ढेर लगने की आशंका है।

बोर्ड ने कचरा प्रबंधन के लिए जैम पोर्टल के माध्यम से नए टेंडर आमंत्रित किए थे। इनमें 7 कंपनियों ने बोलियां लगाई थीं लेकिन तकनीकी मूल्यांकन के दौरान कमेटी ने सभी को अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद 11 अप्रैल को दोबारा टेंडर जारी किया गया है, इसमें समय लगना तय है।
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एयरफोर्स की आपत्ति से बंद पड़ा है प्लांट

कैंटोनमेंट बोर्ड ने पंजोखरा रोड पर 5 टन क्षमता का वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया था लेकिन वायुसेना अधिकारियों ने भारतीय विमान नियम 1937 के नियम 91 का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद से यह प्लांट बंद पड़ा है। ऐसे में बोर्ड पूरी तरह बाहरी एजेंसी पर निर्भर है।



पुराने ठेकेदार ने मांगी 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी

वर्तमान में मेसर्स सनटैन लाइफ, पंचकूला जून 2022 से जटवाड़ स्थित अपने प्लांट में कचरे का निस्तारण कर रही है। कंपनी ने अनुबंध के नवीनीकरण के लिए सहमति तो दी है लेकिन पुरानी दरों यानि 982 रुपये प्रति टन में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग रखी है। कंपनी का तर्क है कि ईंधन, लेबर और रखरखाव के खर्च में भारी इजाफा हुआ है। सैन्य व कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन सिविल क्षेत्र से रोजाना लगभग 311.996 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें कैंटोनमेंट बोर्ड की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत यानी लगभग 36.330 मीट्रिक टन है। पुरानी दर 982 रुपये प्रति टन के हिसाब से कचरे का निस्तारण किया जा रहा था। अब प्रस्तावित नई दर के तहत कचरा निस्तारण पर लगभग 1080 रुपये खर्च होंगे। अधिकारियों के अनुसार, स्वच्छता व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए बोर्ड के पास पुराने ठेकेदार के साथ ही अनुबंध आगे बढ़ाने के अलावा फिलहाल दूसरा विकल्प नहीं बचा है। जल्द इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।


अभी पुराने ठेकेदार से ही काम करवाया जा रहा है। वहीं ठेकेदार से नए रेट में कुछ कमी करने को कहा गया है ताकि नए सिरे से ठेका जारी किया जा सके। अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा से निविदा जारी की जाएगी।
- सतीश कुमार, अभियंता, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला
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