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Haryana: अंबाला में मेयर पद पर त्रिकोणीय मुकाबला, भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए पहला चुनाव बना चुनौती

माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा) Published by: Naveen Updated Thu, 30 Apr 2026 09:32 AM IST
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सार

अंबाला के निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं को भितरघात का डर है। जहां एक तरफ भाजपा से पूर्व मेयर शैलजा संदीप सचदेवा अब तक चुनावी मैदान में दिखी नहीं हैं।

Triangular Contest for Mayor's Post in Ambala First Election Proves Challenge for BJP and Congress Candidates
अंबाला निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी - फोटो : संवाद
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विस्तार

नगर निगम चुनाव में मेयर पद पर त्रिकोणीय मुकाबला है। जहां भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी अपने-अपने हैं तो इन्हें आजाद प्रत्याशी सोनिया भी चुनौती दे रही हैं। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ने नए चेहरों पर दाव खेला है, यह बात दोनाें के लिए चुनौती बन गई है। सही मायने में तो शहर में पूर्व मंत्री असीम गोयल और कांग्रेस से विधायक निर्मल सिंह की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी है।

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दोनों की ही प्रत्याशियों के चयन से लेकर प्रबंधन तक में प्रमुख भूमिका रही है। भाजपा ने युवा चेहरे के रूप में 32 वर्षीय अक्षिता सैनी तो कांग्रेस ने 60 वर्षीय कुलविंदर कौर को उतारा है। वहीं पूर्व में पार्षद रही चुकीं 42 वर्षीय सोनिया रानी भी आजाद मैदान में हैं।
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भाजपा का शासन देखा, कांग्रेस को भी जिताया पर नहीं बना कोई काम
नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वर्षों से लोगों की शहर से जुड़ी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। वार्डों में सड़कें खराब पड़ी हैं। जलभराव की समस्या से लोग हर साल जूझते हैं। इसके ऊपर प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी ने लोगों को बहुत रुलाया है। एडवोकेट गोपाल गुप्ता बताते हैं कि पिछले निगम के कार्यकाल में भाजपा की मेयर को मौका मिला, वार्ड सदस्यों की संख्या भी ठीक थी मगर गुटबाजी में काम नहीं होने दिए गए।

भाजपा की महिला मेयर शैलजा सचदेवा खुद भी इसका विरोध कर रही थीं। अधिकारियों के खिलाफ लिख चुकी थीं मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विधानसभा चुनाव में शहर के मतदाताओं ने कांग्रेस से विधायक बनाया था। इसके बावजूद शहर का विकास अटका हुआ है। ऐसे में दोनों पार्टियों के काम और उनके माननीयों को लोग देख चुके हैं।

भितरघात का डर
भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं को भितरघात का डर है। जहां एक तरफ भाजपा से पूर्व मेयर शैलजा संदीप सचदेवा अब तक चुनावी मैदान में दिखी नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में बने विभिन्न गुट सिटी विधायक निर्मल सिंह समर्थित प्रत्याशियों को कितना साथ देंगे यह भी चुनौती बन रहा है। इसके अलावा भाजपा से टिकट न मिलने पर भाजपा से करीब पांच नेता बागी होकर आजाद मैदान में हैं। वह भी नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे।

शहर को उम्मीद देने का अवसर
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रोहित जैन ने बताया कि अंबाला शहर में अधिकांश बड़ी परियोजनाएं अटकी हुई हैं। जलभराव की समस्या का वर्षों से समाधान नहीं मिला है। ऐसे में जो भी मेयर पद पर जीतेगा उससे लोगों को काफी उम्मीद होगी। इसके साथ ही नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार ने भी लोगों को काफी परेशान किया है। इसके समाधान के लिए कड़े फैसले लेने की आवश्यकता है। अगर यह कोई कर पाता है तो वही सफल हो सकेगा।

जातीय गणित भी रहेगा अहम
भाजपा ने सैनी समाज से युवा चेहरे को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने पंजाबी सैनी को मौका दिया है। भाजपा सैनी समाज और अपने कोर वोटर के माध्यम से इस चुनाव को जीतना चाहती है। वहीं कांग्रेस ने पंजाबी सैनी को उतारकर इस चुनाव में चुनौती दे दी है। अंबाला सिटी में पंजाबी समाज के लोगों की भी अच्छी तादात है। यही कारण है कि नामांकन के दौरान भाजपा ने दिल्ली से मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को बुलाया था। उनकी पंजाबी समाज में अच्छी पकड़ है।

केंद्र सरकार की नीतियों पर लोगों को विश्वास है। पीएम मोदी के विकास के विजन पर अंबाला के लोग भी वोट करेंगे। किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। चुनाव को चुनाव के ढंग से लड़ा जाना चाहिए। पूरे संगठन को लगाकर बड़े से बड़े चुनाव को जीता जा सकता है। - शैलजा संदीप सचेदवा, पूर्व मेयर।

नगर निगम में मतदाता
कुल मतदाता- 1.98 लाख
महिला मतदाता- 95,550
पुरुष मतदाता- 1.02 लाख

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