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Bhiwani News: पुलिस कर्मचारी के घर से पांच साल का बच्चा रेस्क्यू, मामला बाल तस्करी से जुड़े होने का अंदेशा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2026 01:47 AM IST
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A five-year-old boy was rescued from a police officer's home, and the case is suspected to be linked to child trafficking.
स्टेट क्राइम ब्रांच व बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम द्वारा रेस्क्यू किया गया पांच साल का बच्च
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भिवानी। शहर के हनुमान गेट क्षेत्र में एक पुलिस कर्मचारी के घर से स्टेट क्राइम ब्रांच और बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम ने मंगलवार को दोपहर बाद पांच साल के बच्चे को रेस्क्यू किया है। मामला बाल तस्करी से जुड़े होने का अंदेशा भी जताया जा रहा है। बच्चे को बाल कल्याण समिति ने अपनी निगरानी में ले लिया है वहीं संबंधित पुलिस कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
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बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुनील वर्मा ने इस बारे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत दी थी। इसके बाद मामले में संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक भिवानी को सूचित किया गया। मंगलवार को जिला पुलिस की ओर से निरीक्षक अमरदीप, एएसआई कपिल देव, महिला एसआई अमिता तथा स्टेट क्राइम ब्रांच के एसआई प्रदीप और एएसआई मंजीता की टीम गठित की गई।
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बाल कल्याण समिति की ओर से चेयरमैन प्रदीप तंवर, धीरज सैनी, सतेंद्र तंवर और सामाजिक कार्यकर्ता रिंकू भी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। संयुक्त टीम ने एक पुलिस कर्मचारी के घर से पांच साल के बच्चे को बरामद किया। जांच के दौरान पुलिसकर्मी बच्चे के संबंध में कोई भी गोदनामा या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। साथ ही बच्चे के वहां तक पहुंचने के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी जिसके बाद टीम ने बच्चे को रेस्क्यू कर लिया।
शिकायतकर्ता सुशील वर्मा ने कहा कि रेस्क्यू के दौरान सामने आए तथ्य यह संकेत देते हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं हो सकती बल्कि इसके पीछे बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है जिसकी निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है। बच्चे को बिना किसी वैध दस्तावेज के स्कूल में दाखिला दे दिया गया जो गंभीर लापरवाही और जिम्मेदारी का उल्लंघन है।

संदिग्ध परिस्थितियों में तीसरी जगह पहुंचा बच्चा, जांच में कई पहलू सामने
मामले की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि पांच साल के इस बच्चे के तार किसी संगठित बच्चा चोर गिरोह या अपहरण कर बच्चों की तस्करी करने वाले नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। करीब डेढ़ साल के दौरान बच्चा पहले रोहतक में समर गोपाल के पास फिर झज्जर लाया गया। इसके बाद झज्जर से उसे भिवानी लाया गया। कुछ समय पहले बहादुरगढ़ में भी संगठित गिरोह के भंडाफोड़ का मामला सामने आया था। जिस घर से बच्चा बरामद हुआ है वह पुलिस कर्मी भी बहादुरगढ़ में ट्रैफिक थाने में तैनात बताया जा रहा है।


मैं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से आग्रह करता हूं कि इस मामले में बिना किसी दबाव या प्रभाव के सच्चाई सामने लाई जाए और जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। यह लड़ाई सिर्फ एक बच्चे के लिए नहीं है बल्कि उन हजारों बच्चों के लिए है जिनकी आवाज अक्सर दबा दी जाती है। -सुशील वर्मा, शिकायतकर्ता, पूर्व सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
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