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Bhiwani News: स्क्रीन की चमक में धुंधला रही नजर
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डॉ हरजीत सिंह।
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भिवानी। आधुनिक डिजिटल युग में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग लोगों की आंखों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। खासकर युवाओं और किशोरों में डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता बोझ आंखों की रोशनी को कमजोर कर रहा है। इसके कारण आंखों में दर्द, सिर दर्द, धुंधला दिखाई देना, कम दिखाई देना और आंखों के सामने जाला आने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
भारत में अंधत्व निवारण सप्ताह हर साल एक से सात अप्रैल तक मनाया जाता है। शहर के पंडित नेकीराम शर्मा व राजकीय नेत्र अस्पताल में प्रतिदिन इस तरह के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी भी शामिल हैं जो आंखों में दर्द और कम दिखाई देने की शिकायत लेकर चिकित्सकों से परामर्श ले रहे हैं। चिकित्सक मरीजों को खान-पान सुधारने और आंखों की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
ये है कारण
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में कार्यरत डॉ. हरजीत के अनुसार डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक और अत्यधिक उपयोग आंखों की रोशनी को प्रभावित करता है। लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों की प्राकृतिक नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है जिससे आंखों में सूखापन की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे सिरदर्द, आंखों में भारीपन और धुंधला दिखाई देने की समस्या उत्पन्न होती है। कोरोना काल के बाद बच्चों की पढ़ाई से लेकर कार्यालयों का काम भी डिजिटल स्क्रीन पर निर्भर हो गया है जिससे यह समस्या तेजी से बढ़ी है। युवाओं का अधिकतर समय ऑनलाइन पढ़ाई और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। रात के समय अंधेरे में मोबाइल का अधिक उपयोग भी आंखों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
जिले में आंखों के मरीजों की स्थिति
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग और किशनलाल राजकीय नेत्र अस्पताल में आंखों के मरीजों की निशुल्क जांच की जा रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 150 मरीज पहुंच रहे हैं जबकि राजकीय नेत्र अस्पताल में करीब 350 मरीज जांच के लिए आ रहे हैं। इसके अलावा जिले में 10 से 15 निजी नेत्र अस्पताल भी संचालित हैं जहां बड़ी संख्या में मरीज आंखों की जांच के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे करें बचाव
डॉ. हरजीत ने बताया कि आंख शरीर का अत्यंत संवेदनशील अंग है इसलिए इसकी विशेष देखभाल जरूरी है। कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग सीमित करना चाहिए। काम के दौरान हर 30 मिनट से एक घंटे के अंतराल पर आंखों को कुछ देर आराम देना चाहिए। रात में मोबाइल की रोशनी कम रखनी चाहिए और छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और पर्याप्त नींद लेना भी आवश्यक है। आंखों की सुरक्षा के लिए ब्लू लाइट फिल्टर या विशेष चश्मों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन आंखों की रोशनी बनाए रखने में सहायक होता है।
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भारत में अंधत्व निवारण सप्ताह हर साल एक से सात अप्रैल तक मनाया जाता है। शहर के पंडित नेकीराम शर्मा व राजकीय नेत्र अस्पताल में प्रतिदिन इस तरह के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी भी शामिल हैं जो आंखों में दर्द और कम दिखाई देने की शिकायत लेकर चिकित्सकों से परामर्श ले रहे हैं। चिकित्सक मरीजों को खान-पान सुधारने और आंखों की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
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ये है कारण
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में कार्यरत डॉ. हरजीत के अनुसार डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक और अत्यधिक उपयोग आंखों की रोशनी को प्रभावित करता है। लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों की प्राकृतिक नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है जिससे आंखों में सूखापन की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे सिरदर्द, आंखों में भारीपन और धुंधला दिखाई देने की समस्या उत्पन्न होती है। कोरोना काल के बाद बच्चों की पढ़ाई से लेकर कार्यालयों का काम भी डिजिटल स्क्रीन पर निर्भर हो गया है जिससे यह समस्या तेजी से बढ़ी है। युवाओं का अधिकतर समय ऑनलाइन पढ़ाई और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। रात के समय अंधेरे में मोबाइल का अधिक उपयोग भी आंखों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
जिले में आंखों के मरीजों की स्थिति
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग और किशनलाल राजकीय नेत्र अस्पताल में आंखों के मरीजों की निशुल्क जांच की जा रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 150 मरीज पहुंच रहे हैं जबकि राजकीय नेत्र अस्पताल में करीब 350 मरीज जांच के लिए आ रहे हैं। इसके अलावा जिले में 10 से 15 निजी नेत्र अस्पताल भी संचालित हैं जहां बड़ी संख्या में मरीज आंखों की जांच के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे करें बचाव
डॉ. हरजीत ने बताया कि आंख शरीर का अत्यंत संवेदनशील अंग है इसलिए इसकी विशेष देखभाल जरूरी है। कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग सीमित करना चाहिए। काम के दौरान हर 30 मिनट से एक घंटे के अंतराल पर आंखों को कुछ देर आराम देना चाहिए। रात में मोबाइल की रोशनी कम रखनी चाहिए और छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और पर्याप्त नींद लेना भी आवश्यक है। आंखों की सुरक्षा के लिए ब्लू लाइट फिल्टर या विशेष चश्मों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन आंखों की रोशनी बनाए रखने में सहायक होता है।