{"_id":"6a53f08e4ae043e28402854d","slug":"brackish-water-was-seeping-into-the-brick-tanks-now-the-drinking-water-will-be-protected-by-an-rcc-base-bhiwani-news-c-125-1-bwn1002-153782-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: ईंटों के टैंकों में रिस रहा खारा पानी, अब आरसीसी बेस से सुरक्षित रहेगा पेयजल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: ईंटों के टैंकों में रिस रहा खारा पानी, अब आरसीसी बेस से सुरक्षित रहेगा पेयजल
विज्ञापन
गांव दांग में ईंटों से बने वाटर स्टोरेज टैंक की टूटी दीवार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भिवानी। जिले के पुराने वाटर स्टोरेज टैंकों में भूमिगत खारा पानी रिसकर साफ नहरी पानी में मिल रहा है। इससे पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जनस्वास्थ्य विभाग ने ईंटों से बने ऐसे टैंकों की पहचान कर निदेशालय को जानकारी भेजी है। अब इन ईंटों के वाटर स्टोरेज टैंकों की जगह आरसीसी के टैंक बनाए जाएंगे। सरकार ने इस काम को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जिले में लंबे समय से सेम बढ़ने के कारण पेयजल का स्वाद बिगड़ रहा है। भूमिगत खारा पानी जमीन के अंदर जल स्तर बढ़ने और अधिक सिंचाई या नहरों के रिसाव से सतह पर आ गया है। इसके कारण खेतों में सफेद नमक की परत जम जाती है। इससे उपजाऊ मिट्टी खेती के अयोग्य हो जाती है। अब यह लवणीय पानी जलघरों में बने वाटर स्टोरेज टैंकों को भी खराब कर रहा है।
ये वाटर स्टोरेज टैंक करीब 50 साल से अधिक पुराने हैं। ये टैंक ईंटों से बने हुए हैं। भूमिगत पानी ऊपर आने से ईंटों में से आसानी से रिसाव होकर नहरी पानी में मिल रहा है। सेम ग्रस्त पानी घरों तक आने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। जिले में मुंढाल, बवानीखेड़ा और तोशाम क्षेत्र में सेम की समस्या अधिक है। सरकार ने लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग से ईंटों से बने स्टोरेज टैंकों की सूची मांगी थी। विभाग ने हाल ही में यह सूची सरकार को भेजी है।
विज्ञापन
आरसीसी टैंक बनने से नहरी पानी दूषित होने से बचेगा
जलघरों में ईंटों की जगह आरसीसी बेस टैंक बनाए जाएंगे। आरसीसी बेस टैंक बनने के बाद जमीन के नीचे का खारा पानी पेयजल में नहीं मिल पाएगा। भूमिगत जल के रिसाव को रोकने से नहरी पानी दूषित होने से बचेगा। इससे आमजन को शुद्ध और साफ पानी पीने को मिल सकेगा। यह खारे पानी की समस्या केवल उन्हीं क्षेत्रों में है जहां सेम की समस्या है। वहां भूमिगत पानी काफी ऊपर है जो वाटर टैंक की गहराई की वजह से शुद्ध पानी में मिल जाता है।
लवणीय पानी के स्वास्थ्य पर प्रभाव
फिलहाल जलघरों के वाटर टैंकों में लवणीय पानी मिलकर घरों तक पहुंच रहा है। इससे शरीर में पोषक तत्वों और लवणों का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके लगातार सेवन से गंभीर शारीरिक समस्याएं और बीमारियां पैदा हो सकती हैं। पानी में नमक (सोडियम) की अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है। इससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
खारे पानी में नमक का स्तर शरीर की कोशिकाओं से पानी खींच लेता है। इससे व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। अत्यधिक सोडियम को फिल्टर करने के लिए गुर्दों पर बहुत दबाव पड़ता है। इससे पथरी या किडनी फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खारे पानी के ज्यादा सेवन से पेट में सूजन, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। -डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज, भिवानी।
भूमिगत पानी को नहरी पानी में मिलने से रोकने के लिए ईंटों की जगह आरसीसी के वाटर स्टोरेज टैंक बनाए जाएंगे। सरकार ने जिले में ईंटों से बने वाटर स्टोरेज टैंकों की सूची मांगी थी। विभाग द्वारा यह सूची सरकार को भेजी जा चुकी है। इस पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।- ताजद्दीन, जेई, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, भिवानी।
विज्ञापन
जिले में लंबे समय से सेम बढ़ने के कारण पेयजल का स्वाद बिगड़ रहा है। भूमिगत खारा पानी जमीन के अंदर जल स्तर बढ़ने और अधिक सिंचाई या नहरों के रिसाव से सतह पर आ गया है। इसके कारण खेतों में सफेद नमक की परत जम जाती है। इससे उपजाऊ मिट्टी खेती के अयोग्य हो जाती है। अब यह लवणीय पानी जलघरों में बने वाटर स्टोरेज टैंकों को भी खराब कर रहा है।
विज्ञापन
ये वाटर स्टोरेज टैंक करीब 50 साल से अधिक पुराने हैं। ये टैंक ईंटों से बने हुए हैं। भूमिगत पानी ऊपर आने से ईंटों में से आसानी से रिसाव होकर नहरी पानी में मिल रहा है। सेम ग्रस्त पानी घरों तक आने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। जिले में मुंढाल, बवानीखेड़ा और तोशाम क्षेत्र में सेम की समस्या अधिक है। सरकार ने लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग से ईंटों से बने स्टोरेज टैंकों की सूची मांगी थी। विभाग ने हाल ही में यह सूची सरकार को भेजी है।
विज्ञापन
आरसीसी टैंक बनने से नहरी पानी दूषित होने से बचेगा
जलघरों में ईंटों की जगह आरसीसी बेस टैंक बनाए जाएंगे। आरसीसी बेस टैंक बनने के बाद जमीन के नीचे का खारा पानी पेयजल में नहीं मिल पाएगा। भूमिगत जल के रिसाव को रोकने से नहरी पानी दूषित होने से बचेगा। इससे आमजन को शुद्ध और साफ पानी पीने को मिल सकेगा। यह खारे पानी की समस्या केवल उन्हीं क्षेत्रों में है जहां सेम की समस्या है। वहां भूमिगत पानी काफी ऊपर है जो वाटर टैंक की गहराई की वजह से शुद्ध पानी में मिल जाता है।
लवणीय पानी के स्वास्थ्य पर प्रभाव
फिलहाल जलघरों के वाटर टैंकों में लवणीय पानी मिलकर घरों तक पहुंच रहा है। इससे शरीर में पोषक तत्वों और लवणों का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके लगातार सेवन से गंभीर शारीरिक समस्याएं और बीमारियां पैदा हो सकती हैं। पानी में नमक (सोडियम) की अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है। इससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
खारे पानी में नमक का स्तर शरीर की कोशिकाओं से पानी खींच लेता है। इससे व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। अत्यधिक सोडियम को फिल्टर करने के लिए गुर्दों पर बहुत दबाव पड़ता है। इससे पथरी या किडनी फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खारे पानी के ज्यादा सेवन से पेट में सूजन, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। -डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज, भिवानी।
भूमिगत पानी को नहरी पानी में मिलने से रोकने के लिए ईंटों की जगह आरसीसी के वाटर स्टोरेज टैंक बनाए जाएंगे। सरकार ने जिले में ईंटों से बने वाटर स्टोरेज टैंकों की सूची मांगी थी। विभाग द्वारा यह सूची सरकार को भेजी जा चुकी है। इस पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।- ताजद्दीन, जेई, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, भिवानी।