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Bhiwani News: आंधी में उजड़े बस क्यू शेल्टर, दो माह से धूप-बारिश में बस का इंतजार कर रहे यात्री
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गांव तालू के बस स्टैंड पर टूटे बस क्यू शेल्टर के पोल।
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भिवानी। मई माह में आई तेज आंधी से ग्रामीण रूटों पर बने बस क्यू शेल्टर ध्वस्त हो गए हैं। लाखों रुपये की लागत से बने ये शेल्टर कई स्थानों पर पूरी तरह टूट गए हैं। कुछ स्थानों पर वे क्षतिग्रस्त हालात में हैं। यात्रियों को गर्मी, धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करना पड़ रहा है।
पंचायती राज विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए इन शेल्टरों का निर्माण करवाया था। इनका उद्देश्य यात्रियों को मौसम की मार से बचाना था। लेकिन मई की आंधी में ये शेल्टर धराशायी हो गए। कई जगहों पर टिन की छतें उड़कर खेतों में जा गिरी हैं। कहीं-कहीं लोहे के पिलर भी उखड़ गए हैं।
ग्रामीण निवासी सतीश,सचिन और गांव तालू निवासी धर्मबीर, सुनील और सतबीर का आरोप है कि इन शेल्टरों के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया था। इसी कारण वे हल्के से तेज मौसम को भी बर्दाश्त नहीं कर सके। ध्वस्त पड़े ये शेल्टर प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं। बस क्यू शेल्टर टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। यात्रियों को तपती धूप में सड़क किनारे खड़ा होना पड़ता है।
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यात्रियों की परेशानी
गांव से शहर जाने वाली बसों का समय निश्चित नहीं होता है। पहले शेल्टर में बैठकर थोड़ा आराम मिल जाता था। अब आंधी में टूटने के बाद सिर छिपाने की भी जगह नहीं बची है। आसपास कोई पेड़ या दुकान न होने के कारण यात्री सीधे सूर्य की रोशनी में झुलसने को मजबूर हैं। इस समस्या को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मौजिज लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों में भारी रोष है।
बीडीपीओ बोले- जल्द ही दुरुस्त करवाया जाएगा
ग्रामीणों ने विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने ध्वस्त हो चुके बस क्यू शेल्टरों का तुरंत सर्वे करवाने की मांग की है। उनकी जगह नए और मजबूत शेल्टरों का निर्माण सुनिश्चित करने को कहा गया है। यात्रियों की मांग है कि जब तक पक्के शेल्टर नहीं बनते, तब तक अस्थायी रूप से छाया की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बीडीपीओ नवीन मलिक ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में टूटे हुए बस क्यू शेल्टरों को जल्द ही दुरुस्त करवाया जाएगा। उन्होंने लोगों को कोई परेशानी नहीं होने देने का आश्वासन दिया।
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पंचायती राज विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए इन शेल्टरों का निर्माण करवाया था। इनका उद्देश्य यात्रियों को मौसम की मार से बचाना था। लेकिन मई की आंधी में ये शेल्टर धराशायी हो गए। कई जगहों पर टिन की छतें उड़कर खेतों में जा गिरी हैं। कहीं-कहीं लोहे के पिलर भी उखड़ गए हैं।
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ग्रामीण निवासी सतीश,सचिन और गांव तालू निवासी धर्मबीर, सुनील और सतबीर का आरोप है कि इन शेल्टरों के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया था। इसी कारण वे हल्के से तेज मौसम को भी बर्दाश्त नहीं कर सके। ध्वस्त पड़े ये शेल्टर प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं। बस क्यू शेल्टर टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। यात्रियों को तपती धूप में सड़क किनारे खड़ा होना पड़ता है।
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यात्रियों की परेशानी
गांव से शहर जाने वाली बसों का समय निश्चित नहीं होता है। पहले शेल्टर में बैठकर थोड़ा आराम मिल जाता था। अब आंधी में टूटने के बाद सिर छिपाने की भी जगह नहीं बची है। आसपास कोई पेड़ या दुकान न होने के कारण यात्री सीधे सूर्य की रोशनी में झुलसने को मजबूर हैं। इस समस्या को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मौजिज लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों में भारी रोष है।
बीडीपीओ बोले- जल्द ही दुरुस्त करवाया जाएगा
ग्रामीणों ने विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने ध्वस्त हो चुके बस क्यू शेल्टरों का तुरंत सर्वे करवाने की मांग की है। उनकी जगह नए और मजबूत शेल्टरों का निर्माण सुनिश्चित करने को कहा गया है। यात्रियों की मांग है कि जब तक पक्के शेल्टर नहीं बनते, तब तक अस्थायी रूप से छाया की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बीडीपीओ नवीन मलिक ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में टूटे हुए बस क्यू शेल्टरों को जल्द ही दुरुस्त करवाया जाएगा। उन्होंने लोगों को कोई परेशानी नहीं होने देने का आश्वासन दिया।