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Chandigarh-Haryana News: धान की सीधी रोपाई में पहली बार 22 जिले शामिल, 5 लाख एकड़ का लक्ष्य
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वर्ष 2021 में 8 जिले और 2022 में योजना के तहत 12 जिले किए गए थे शामिल
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में धान की सीधी रोपाई (डीएसआर) में पहली बार 23 में 22 जिले शामिल किए गए हैं। इस बार 22 जिलों में 5 लाख एकड़ डीएसआर का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में मिले अच्छे परिणामों के आधार पर योजना को विस्तार दिया गया है।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार खरीफ-2026 के लिए डीएसआर के तहत प्रमोशन पायलट प्रोजेक्ट को इस बार लागू किया गया है। धान की सीधी रोपाई करने वालों को 4500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान का प्रावधान है। वर्ष 2021 में अत्यधिक जल दोहन को देखते हुए 8 जिलों से योजना की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2022 से 2025 तक योजना में 12 जिले शामिल रहे। इस योजना में अब महेंद्रगढ़ को छोड़कर शेष सभी जिलों को शामिल किया गया है। कृषि निदेशालय ने योजना की निगरानी के लिए मुख्यालय के 13 अधिकारियों को 22 जिलों में निगरानी का जिम्मा सौंपा है।
धान की सीधी रोपाई से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत : नरेंद्र
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त जल वैज्ञानिक नरेंद्र खट्टर के अनुसार धान की 1 एकड़ फसल को तैयार करने के लिए 10 से 12 लाख लीटर तक पानी उपयोग होता है। इस तरह से एक किलोग्राम चावल तैयार करने में औसतन 3 से 4 हजार लीटर पानी खप जाता है। धान की सीधी रोपाई का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह फसल 7 से 10 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है। सीधी रोपाई से बीमारियों का असर भी कम होता है। इससे लागत कम होने के साथ ही 15 से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है।
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डीएसआर योजना की 5 वर्षों की स्थिति
वर्ष लक्ष्य (एकड़ में) : उपलिब्ध (एकड़ में)
2021 20000 : 17444
2022 100000 : 72923.4
2023 200000 : 184054.3
2024 302000 : 100902.3
2025 400000 : 167875.4
स्रोत : हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।
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अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में धान की सीधी रोपाई (डीएसआर) में पहली बार 23 में 22 जिले शामिल किए गए हैं। इस बार 22 जिलों में 5 लाख एकड़ डीएसआर का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में मिले अच्छे परिणामों के आधार पर योजना को विस्तार दिया गया है।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार खरीफ-2026 के लिए डीएसआर के तहत प्रमोशन पायलट प्रोजेक्ट को इस बार लागू किया गया है। धान की सीधी रोपाई करने वालों को 4500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान का प्रावधान है। वर्ष 2021 में अत्यधिक जल दोहन को देखते हुए 8 जिलों से योजना की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2022 से 2025 तक योजना में 12 जिले शामिल रहे। इस योजना में अब महेंद्रगढ़ को छोड़कर शेष सभी जिलों को शामिल किया गया है। कृषि निदेशालय ने योजना की निगरानी के लिए मुख्यालय के 13 अधिकारियों को 22 जिलों में निगरानी का जिम्मा सौंपा है।
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धान की सीधी रोपाई से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत : नरेंद्र
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त जल वैज्ञानिक नरेंद्र खट्टर के अनुसार धान की 1 एकड़ फसल को तैयार करने के लिए 10 से 12 लाख लीटर तक पानी उपयोग होता है। इस तरह से एक किलोग्राम चावल तैयार करने में औसतन 3 से 4 हजार लीटर पानी खप जाता है। धान की सीधी रोपाई का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह फसल 7 से 10 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है। सीधी रोपाई से बीमारियों का असर भी कम होता है। इससे लागत कम होने के साथ ही 15 से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है।
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डीएसआर योजना की 5 वर्षों की स्थिति
वर्ष लक्ष्य (एकड़ में) : उपलिब्ध (एकड़ में)
2021 20000 : 17444
2022 100000 : 72923.4
2023 200000 : 184054.3
2024 302000 : 100902.3
2025 400000 : 167875.4
स्रोत : हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।