चार साल बाद लंपी का असली हिसाब: हरियाणा के पशुपालकों को लगी थी 247 करोड़ की चोट; 2900 गायों की हुई थी माैत
हरियाणा में 2022-23 में लंपी वायरस काफी तेजी से फैला था। इससे करीब 2900 गायों की मौत हो गई थी। उस दौरान नुकसान का आकलन नहीं किया गया था।
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वर्ष 2022-23 में फैली लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) से हरियाणा के पशुपालकों को करीब 247.6 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। यह नुकसान पशुओं की मौत, दूध उत्पादन में कमी, इलाज पर बढ़े खर्च और पशुओं की कार्य क्षमता घटने के कारण हुआ।
इसका खुलासा हरियाणा पशुपालन विभाग, आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरिनरी एपिडेमियोलॉजी एंड डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स (बेंगलुरु) और लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के संयुक्त अध्ययन में हुआ है।
शोधकर्ताओं ने समय पर टीकाकरण और प्रभावी निगरानी को भविष्य में ऐसे नुकसान से बचने का सबसे कारगर उपाय बताया है।
हरियाणा में 2022-23 में लंपी वायरस काफी तेजी से फैला था। इससे करीब 2900 गायों की मौत हो गई थी। उस दौरान नुकसान का आकलन नहीं किया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध के लिए हरियाणा को इसलिए चुना गया, क्योंकि भारत के कुल दूध उत्पादन में इसका योगदान लगभग 5.4% है और राज्य के कुल दूध उत्पादन में भैंसों का योगदान लगभग 80% है। इसके अलावा इस शोध का मकसद हरियाणा जैसे राज्य में लंपी बीमारी के बोझ को समझना था, जहां देसी नस्ल पशुओं की आबादी ज्यादा है।
अध्ययन के लिए वर्ष 2024 में करनाल और हिसार जिलों के 227 पशुपालक परिवारों का सर्वे किया गया। शोध में पाया गया कि सर्वे किए गए 86.5 प्रतिशत गांव और 35.6 प्रतिशत डेयरी फार्म लंपी बीमारी से प्रभावित हुए। यह शोध 10 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय जर्नल एल्सेवियर के प्रिवेंटिव वेटरिनरी मेडिसिन: रीजनल स्टडीज एंड रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है। शोध भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान, बंगलूरू, पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार का नाडेन केंद्र, पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार ने संयुक्त रूप से किया।
लंपी से घटा दूध उत्पादन, एक संक्रमित गाय से 90 लीटर तक का नुकसान
शोध के अनुसार, वर्ष 2022-23 में लंपी बीमारी का सबसे ज्यादा असर गायों पर देखने को मिला। देशी गायों में संक्रमण दर 23 प्रति 100 पशु-वर्ष और क्रॉसब्रीड गायों में 20 प्रति 100 पशु-वर्ष दर्ज की गई। वहीं, देशी गायों में मृत्यु दर 6 प्रति 100 पशु-वर्ष और क्रॉसब्रीड गायों में 3 प्रति 100 पशु-वर्ष रही।
अध्ययन की सबसे खास बात यह रही कि सर्वे के दौरान भैंसों में लंपी बीमारी का एक भी मामला सामने नहीं आया। हालांकि, शोध में पूरे हरियाणा में इस बीमारी से मरने वाले पशुओं की कुल संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है। लंपी का असर दूध उत्पादन पर भी साफ दिखाई दिया। एक संक्रमित देशी गाय से औसतन 45 लीटर और एक क्रॉसब्रीड गाय से 90 लीटर दूध का नुकसान हुआ।
शोधकर्ताओं का कहना है कि हरियाणा देश के कुल दूध उत्पादन में 5.4 प्रतिशत योगदान देता है। ऐसे में लंपी जैसी बीमारी का असर केवल राज्य के पशुपालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव देश के दुग्ध उत्पादन पर भी पड़ता है।
पशुओं की मौत सबसे ज्यादा नुकसान
अध्ययन में सामने आया कि वर्ष 2022-23 में लंपी बीमारी से हरियाणा के पशुपालकों को कुल 247.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें सबसे बड़ा नुकसान पशुओं की मौत से हुआ, जिससे करीब 112.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इसके अलावा पशुओं के इलाज पर करीब 57.2 करोड़ रुपये, बैलों की काम करने की क्षमता कम होने से 28 करोड़ रुपये, दूध उत्पादन घटने से 22 करोड़ रुपये, अतिरिक्त मजदूरी पर 21.2 करोड़ रुपये, पारंपरिक उपचार पर 3.8 करोड़ रुपये और बीमारी फैलाने वाले कीड़ों की रोकथाम पर 3.2 करोड़ रुपये खर्च हुए। शोधकर्ताओं ने बताया कि समय पर टीकाकरण, बीमारी की जल्द पहचान, लगातार निगरानी और पशुओं की बेहतर देखभाल से भविष्य में लंपी बीमारी से होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकता है।
यूपी में लंपी की दस्तक, हरियाणा में 19.5 लाख गायों के टीकाकरण की तैयारी
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में लंपी वायरस के मामले सामने आने के बाद हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है। हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के वेटरनरी सर्जन डा. नरेंद्र ठकराल ने बताया कि लंपी बीमारी फैलने के बाद हरियाणा ही एक ऐसा राज्य है, जहां व्यापक स्तर पर पशुओं को टीकाकरण किया जाता है। पशुओं को इस बीमारी से बचाने के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। हरियाणा में करीब 19.5 लाख गायों को लंपी से बचाव की वैक्सीन लगाई जाएगी। सरकार ने इसके लिए वैक्सीन की खरीद कर ली है और जल्द ही पशुओं का टीकाकरण शुरू किया जाएगा। हरियाणा में इस अभी तक कोई केस नहीं है।