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Haryana: सदन में उठ सकता है मिड डे मील का मुद्दा, शिक्षा विभाग ने मौलिक शिक्षा अधिकारियों से मांगी जानकारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 20 Feb 2026 08:49 AM IST
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सार
विभाग ने वर्ष 2019 से अब तक प्रत्येक जिले में योजना के लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत और वितरित राशि का वर्षवार विवरण तथा भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों की संख्या मांगी है।
हरियाणा शिक्षा विभाग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में मिड डे मील योजना का मुद्दा उठ सकता है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। मौलिक शिक्षा निदेशालय, हरियाणा ने राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी तलब की है। यह निर्देश 19 फरवरी 2026 को पंचकूला स्थित शिक्षा सदन से जारी किए गए।
विभाग ने वर्ष 2019 से अब तक प्रत्येक जिले में योजना के लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत और वितरित राशि का वर्षवार विवरण तथा भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों की संख्या मांगी है। यह जानकारी बजट सत्र के दौरान सदन में रखी जा सकती है।
निदेशालय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सूचना 20 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे तक सॉफ्ट और हार्ड कॉपी दोनों रूप में अनिवार्य रूप से भेजी जाए। देरी या लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रति बच्चे के भोजन में शामिल दूध, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थों की दरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। दरें कम तय किए जाने के आरोप में शिक्षक संगठनों ने विरोध भी जताया है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह मुद्दा सदन में गूंज सकता है।
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विभाग ने वर्ष 2019 से अब तक प्रत्येक जिले में योजना के लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत और वितरित राशि का वर्षवार विवरण तथा भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों की संख्या मांगी है। यह जानकारी बजट सत्र के दौरान सदन में रखी जा सकती है।
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निदेशालय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सूचना 20 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे तक सॉफ्ट और हार्ड कॉपी दोनों रूप में अनिवार्य रूप से भेजी जाए। देरी या लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रति बच्चे के भोजन में शामिल दूध, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थों की दरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। दरें कम तय किए जाने के आरोप में शिक्षक संगठनों ने विरोध भी जताया है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह मुद्दा सदन में गूंज सकता है।