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Haryana: बंधुआ मजदूरी के शिकार किशोर को मिला 10 लाख का मुआवजा, हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने किया था हस्तक्षेप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 26 Jun 2026 10:31 AM IST
सार
बिहार के किशनगंज निवासी बालक को रोजगार का झांसा देकर बहादुरगढ़ के एक डेयरी फार्म में दो माह से अधिक समय तक बंधुआ मजदूरी कराई गई। उससे चारा काटने वाली मशीन सहित कई खतरनाक कार्य करवाए गए।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग
- फोटो : फाइल
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विस्तार
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण और अमानवीय व्यवहार का शिकार हुए 15 वर्षीय बालक को 10 लाख का मुआवजा मिला है। आयोग की अनुशंसा पर हरियाणा सरकार ने 16 जून 2026 को विशेष मामले के रूप में यह राशि स्वीकृत की, जबकि हरियाणा विक्टिम कम्पेंसेशन स्कीम-2020 में ऐसे मामलों में अधिकतम 2 लाख मुआवजे का प्रावधान है।
आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच कराई। जांच में सामने आया कि बिहार के किशनगंज निवासी बालक को रोजगार का झांसा देकर बहादुरगढ़ के एक डेयरी फार्म में दो माह से अधिक समय तक बंधुआ मजदूरी कराई गई। उससे चारा काटने वाली मशीन सहित कई खतरनाक कार्य करवाए गए। इसी दौरान मशीन की चपेट में आने से उसका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। आरोप है कि नियोक्ता ने उपचार कराने के बजाय घायल अवस्था में उसे सुनसान स्थान पर छोड़ दिया।
मामले में बहादुरगढ़ जीआरपी थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 और किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोप-पत्र अदालत में दाखिल किया जा चुका है। आयोग ने माना कि यह मामला मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, बंधुआ मजदूरी और संविधान के अनुच्छेद 21 व 23 के हनन से जुड़ा है।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने बालक की स्थायी विकलांगता और पुनर्वास की जरूरत को देखते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के तहत 10 लाख मुआवजे की अनुशंसा की। आयोग ने जांच अधिकारी के प्रयासों की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत को प्रशंसा-पत्र जारी किया है, जबकि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
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आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच कराई। जांच में सामने आया कि बिहार के किशनगंज निवासी बालक को रोजगार का झांसा देकर बहादुरगढ़ के एक डेयरी फार्म में दो माह से अधिक समय तक बंधुआ मजदूरी कराई गई। उससे चारा काटने वाली मशीन सहित कई खतरनाक कार्य करवाए गए। इसी दौरान मशीन की चपेट में आने से उसका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। आरोप है कि नियोक्ता ने उपचार कराने के बजाय घायल अवस्था में उसे सुनसान स्थान पर छोड़ दिया।
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मामले में बहादुरगढ़ जीआरपी थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 और किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोप-पत्र अदालत में दाखिल किया जा चुका है। आयोग ने माना कि यह मामला मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, बंधुआ मजदूरी और संविधान के अनुच्छेद 21 व 23 के हनन से जुड़ा है।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने बालक की स्थायी विकलांगता और पुनर्वास की जरूरत को देखते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के तहत 10 लाख मुआवजे की अनुशंसा की। आयोग ने जांच अधिकारी के प्रयासों की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत को प्रशंसा-पत्र जारी किया है, जबकि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।