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Charkhi Dadri News: एसटीपी पर लगेगा फ्लोटिंग सोलर प्लांट, बिजली खर्च में होगी बड़ी बचत
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:24 AM IST
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दादरी के दिल्ली रोड स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। दिल्ली रोड और चिड़िया रोड स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में बिजली खपत में कमी लाने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य विभाग फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगवाने की योजना पर काम कर रहा है। इस पहल के माध्यम से एक तरफ जहां विभाग को सालाना लाखों रुपये की बचत होगी वहीं सौर ऊर्जा को अपनाने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
विभाग के अधिकारियों ने इस परियोजना के लिए करीब 28 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। योजना के अनुसार दोनों एसटीपी पर 500-500 किलोवाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में इन प्लांटों में दूषित पानी को साफ करने के लिए भारी क्षमता वाली मोटरों का उपयोग होता है जो चौबीसों घंटे चलती हैं। इन मोटरों के निरंतर संचालन के कारण बिजली की खपत अत्यधिक होती है। आंकड़ों के अनुसार, समसपुर स्थित एसटीपी पर सालाना लगभग 10 लाख यूनिट और चिड़िया रोड स्थित एसटीपी पर करीब सात लाख यूनिट बिजली खर्च होती है। इस भारी खपत के कारण विभाग को हर महीने लाखों रुपये के बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है।
फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की स्थापना के बाद विभाग को प्रति वर्ष 17 लाख बिजली यूनिट की बचत होने की उम्मीद है। इस सौर ऊर्जा परियोजना से विभाग को सालाना करीब 40 लाख रुपये का सीधा वित्तीय लाभ होगा। फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की तकनीक सामान्य सोलर प्लांट से काफी भिन्न और प्रभावी है। इसमें सौर पैनलों को जमीन के बजाय जल निकायों जैसे जलाशयों, झीलों या एसटीपी के पॉन्ड की सतह पर तैरती हुई संरचनाओं पर लगाया जाता है। इससे जमीन की बचत के साथ-साथ पानी के संपर्क में रहने के कारण पैनलों का तापमान भी नियंत्रित रहता है। तापमान कम रहने की वजह से ये पैनल सामान्य जमीन आधारित पैनलों की तुलना में 5 से 15 प्रतिशत तक अधिक कार्यक्षमता के साथ बिजली पैदा कर सकते हैं।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव बजट की मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा। उच्च अधिकारियों से स्वीकृति मिलने के साथ ही एसटीपी के तालाबों में फ्लोटिंग स्ट्रक्चर स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
वर्सन :
हमने शहर के दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगवाने के लिए प्रपोजल और एस्टीमेट तैयार किया है। संबंधित योजना को मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।-- सचिन तलेजा, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, दादरी।
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विभाग के अधिकारियों ने इस परियोजना के लिए करीब 28 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। योजना के अनुसार दोनों एसटीपी पर 500-500 किलोवाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में इन प्लांटों में दूषित पानी को साफ करने के लिए भारी क्षमता वाली मोटरों का उपयोग होता है जो चौबीसों घंटे चलती हैं। इन मोटरों के निरंतर संचालन के कारण बिजली की खपत अत्यधिक होती है। आंकड़ों के अनुसार, समसपुर स्थित एसटीपी पर सालाना लगभग 10 लाख यूनिट और चिड़िया रोड स्थित एसटीपी पर करीब सात लाख यूनिट बिजली खर्च होती है। इस भारी खपत के कारण विभाग को हर महीने लाखों रुपये के बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है।
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फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की स्थापना के बाद विभाग को प्रति वर्ष 17 लाख बिजली यूनिट की बचत होने की उम्मीद है। इस सौर ऊर्जा परियोजना से विभाग को सालाना करीब 40 लाख रुपये का सीधा वित्तीय लाभ होगा। फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की तकनीक सामान्य सोलर प्लांट से काफी भिन्न और प्रभावी है। इसमें सौर पैनलों को जमीन के बजाय जल निकायों जैसे जलाशयों, झीलों या एसटीपी के पॉन्ड की सतह पर तैरती हुई संरचनाओं पर लगाया जाता है। इससे जमीन की बचत के साथ-साथ पानी के संपर्क में रहने के कारण पैनलों का तापमान भी नियंत्रित रहता है। तापमान कम रहने की वजह से ये पैनल सामान्य जमीन आधारित पैनलों की तुलना में 5 से 15 प्रतिशत तक अधिक कार्यक्षमता के साथ बिजली पैदा कर सकते हैं।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव बजट की मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा। उच्च अधिकारियों से स्वीकृति मिलने के साथ ही एसटीपी के तालाबों में फ्लोटिंग स्ट्रक्चर स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
वर्सन :
हमने शहर के दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगवाने के लिए प्रपोजल और एस्टीमेट तैयार किया है। संबंधित योजना को मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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