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राष्ट्रीय पर्यटन दिवस : पर्यटन के नक्शे पर उभरने की बाट जोह रहा ऐतिहासिक दादरी जिला
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:49 PM IST
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बिरही कलां में मौजूद यूरेशियन स्पूनबिल प्रजाति के पक्षी।
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चरखी दादरी। किसी भी क्षेत्र की विरासत, पहचान व अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए वहां पर्यटन स्थलों का होना बेहद जरूरी है। पर्यटन के महत्व को समझाने व बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष 25 जनवरी को पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इसे विडंबना ही कहेंगे कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत होने के बाद भी जिले में कोई भी आधिकारिक पर्यटन स्थल नहीं है। नगर परिषद से लेकर वन्यजीव विभाग तक की योजनाएं या तो ठंडे बस्ते में हैं या जमीन न मिलने के कारण दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
चिड़ियाघर के लिए जमीन प्रस्ताव पास करने तक सिमटी
कुछ वर्ष पहले दादरी नगर परिषद ने शहरवासियों को मनोरंजन की सौगात देने के लिए लघु चिड़िया घर की स्थापना के लिए जमीन की तलाश शुरू की। इसके लिए नगर परिषद हाउस की बैठक में प्रस्ताव भी पास किया गया। लेकिन उसके बाद यह योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई।
ऐतिहासिक श्यामसर सरोवर भी नहीं बन सका पर्यटन स्थल
शहर की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक श्यामसर सरोवर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना थी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए। सरोवर का सुंदरीकरण हुआ और घाट भी नए सिरे से बनाए गए। यहां पर बोटिंग, लाइटिंग व सुंदर पार्क विकसित करने भी योजना थी, लेकिन न तो यहां बोटिंग शुरू हो सकी। वहीं रखरखाव के अभाव में सरोवर में दोबारा गंदगी का आलम बना हुआ है।
बिरही कलां में बर्ड सेंचुरी बनने की संभावनाएं
जिले के गांव बिरही कलां में स्थित करीब 70 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। यहां हर वर्ष सर्दियों के मौसम में विदेशी प्रजातियों के पक्षी हजारों मील का सफर तय कर पहुंचते हैं। गत 13 जनवरी को की गई गणना में यहां कुल 38 प्रजातियों के 689 पक्षी मिले थे। इनमें 22 भारतीय तथा 16 विदेशी प्रजातियों के पक्षी शामिल थे। इनमें दो प्रजाति विदेशी और दो प्रजाति भारतीय पक्षियों की ऐसी भी थी, जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। विभाग की ओर से इसे बर्ड सेंचुरी के रूप में विकसित करने का खाका तैयार किया गया लेकिन जमीन न मिलने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। पक्षी विशेषज्ञ टीके रॉय का कहना है कि यहां बर्ड सेंचुरी बनने की काफी संभावनाएं हैं। यदि यह योजना सिरे चढ़ती है तो दादरी में पर्यटन स्थल के रूप में भी यह जगह शामिल हो सकती है।
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चिड़ियाघर के लिए जमीन प्रस्ताव पास करने तक सिमटी
कुछ वर्ष पहले दादरी नगर परिषद ने शहरवासियों को मनोरंजन की सौगात देने के लिए लघु चिड़िया घर की स्थापना के लिए जमीन की तलाश शुरू की। इसके लिए नगर परिषद हाउस की बैठक में प्रस्ताव भी पास किया गया। लेकिन उसके बाद यह योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई।
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ऐतिहासिक श्यामसर सरोवर भी नहीं बन सका पर्यटन स्थल
शहर की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक श्यामसर सरोवर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना थी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए। सरोवर का सुंदरीकरण हुआ और घाट भी नए सिरे से बनाए गए। यहां पर बोटिंग, लाइटिंग व सुंदर पार्क विकसित करने भी योजना थी, लेकिन न तो यहां बोटिंग शुरू हो सकी। वहीं रखरखाव के अभाव में सरोवर में दोबारा गंदगी का आलम बना हुआ है।
बिरही कलां में बर्ड सेंचुरी बनने की संभावनाएं
जिले के गांव बिरही कलां में स्थित करीब 70 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। यहां हर वर्ष सर्दियों के मौसम में विदेशी प्रजातियों के पक्षी हजारों मील का सफर तय कर पहुंचते हैं। गत 13 जनवरी को की गई गणना में यहां कुल 38 प्रजातियों के 689 पक्षी मिले थे। इनमें 22 भारतीय तथा 16 विदेशी प्रजातियों के पक्षी शामिल थे। इनमें दो प्रजाति विदेशी और दो प्रजाति भारतीय पक्षियों की ऐसी भी थी, जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। विभाग की ओर से इसे बर्ड सेंचुरी के रूप में विकसित करने का खाका तैयार किया गया लेकिन जमीन न मिलने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। पक्षी विशेषज्ञ टीके रॉय का कहना है कि यहां बर्ड सेंचुरी बनने की काफी संभावनाएं हैं। यदि यह योजना सिरे चढ़ती है तो दादरी में पर्यटन स्थल के रूप में भी यह जगह शामिल हो सकती है।