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Charkhi Dadri News: 11 साल से खुले में सड़ रहे सूखे पेड़ कर्मियों को सता रहा रिकवरी का डर

Thu, 20 Aug 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 20 Aug 2026 01:22 AM IST
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Staff haunted by fear of recovery for dried trees left rotting in the open for 11 years
सांजरवास ब्लॉक में स्टॉक में खराब हुए पेड़।  - फोटो : 1
चरखी दादरी। वन विभाग के विभिन्न ब्लॉकों के स्टॉक डिपुओं में वर्षों से खुले आसमान के नीचे रखे गए सूखे और जब्त किए गए पेड़ अब विभाग के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। तेज धूप, बारिश और मौसम की मार के चलते इन पेड़ों में घुन, फंगस और दीमक लग चुकी है जिससे उनकी गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। हरियाणा वन कर्मचारी संघ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।
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वन विभाग के विभिन्न डिपुओं में पिछले करीब 11 वर्षों से बड़ी संख्या में सूखे और जब्त किए गए पेड़ खुले में पड़े हुए हैं। समय पर नीलामी और उठान नहीं होने के कारण अब इनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। लंबे समय तक धूप और बारिश की मार झेलने के कारण पेड़ों में घुन, फंगस और दीमक लग गई है तथा कई पेड़ मिट्टी में तब्दील होने की कगार में पहुंच गए हैं।
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बाॅक्स: 5 हजार से अधिक पेड़ रखे
हरियाणा वन कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव विक्रांत दांगी ने बताया कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार स्टॉक डिपुओं में लगभग 5 हजार से अधिक पेड़ रखे हुए हैं जबकि वन क्षेत्रों में भी करीब 15 हजार से अधिक पेड़ खुले में पड़े हैं। इन पेड़ों की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर होती है। ऐसे में यदि पेड़ों का मूल्य घटता है या वे पूरी तरह खराब हो जाते हैं तो कर्मचारियों पर रिकवरी की कार्रवाई का खतरा बना रहता है।
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बार-बार उठाई समस्या
कर्मचारी लगातार इस समस्या को विभागीय अधिकारियों के समक्ष उठाते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। वर्षों से लंबित पड़े इन पेड़ों की नीलामी या अन्य प्रक्रिया पूरी नहीं होने से विभाग को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों और अधिकारियों में इस बात को लेकर चिंता बनी हुई है कि भविष्य में खराब हो चुकी लकड़ी का जिम्मेदार उन्हें न ठहरा दिया जाए। वन कर्मचारी संघ का कहना है कि प्राकृतिक कारणों से खराब हो रही लकड़ी के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

रिकवरी की कार्रवाई पर लगे रोक
संघ ने मांग की है कि लंबे समय से लंबित पड़े स्टॉक का जल्द निस्तारण किया जाए तथा कर्मचारियों पर डाली जा रही या भविष्य में संभावित रिकवरी की कार्रवाई को रोका जाए। इसके अलावा लकड़ी के सुरक्षित भंडारण के लिए उचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि समय रहते इन पेड़ों का निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में अधिकांश लकड़ी पूरी तरह अनुपयोगी हो सकती है। इससे न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान होगा बल्कि विभागीय रिकॉर्ड और जवाबदेही से जुड़े विवाद भी बढ़ सकते हैं।

दो साल में शुरू हो जाती है खराब होने की प्रक्रिया : एक्सपर्ट
वन विभाग के पूर्व अधिकारी जीवन सिंह ने बताया कि लकड़ी को लंबे समय तक खुले में रखना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि किसी भी पेड़ या लकड़ी को यदि लगातार मौसम की मार झेलनी पड़े तो उसमें नमी, फंगस और कीटों का प्रभाव बढ़ने लगता है। सामान्यतः दो वर्ष के भीतर ही लकड़ी में घुन लगने और गुणवत्ता घटने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यदि उचित संरक्षण नहीं मिले तो धीरे-धीरे लकड़ी की मजबूती कम हो जाती है और उसका आर्थिक मूल्य भी घट जाता है।
उन्होंने कहा कि विभाग को ऐसे स्टॉक के लिए सुरक्षित शेड, नियमित निरीक्षण और समयबद्ध नीलामी व्यवस्था अपनानी चाहिए ताकि सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही कर्मचारियों पर अनावश्यक रिकवरी का बोझ डालने के बजाय समस्या के मूल कारणों को दूर करने की आवश्यकता है।


वर्सन:
वर्किंग प्लान की अनुमति नहीं मिलने के कारण गोदामों में रखे सूखे और जब्त पेड़ों की कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इसके चलते लंबे समय से पेड़ गोदामों में पड़े हुए थे। अब वर्किंग प्लान को मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में विभाग की ओर से जल्द ही गोदामों में रखे पेड़ों को नियमों के तहत निस्तारण की कार्रवाई पूरी की जाएगी। इससे लंबे समय से लंबित प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी और गोदामों में रखी लकड़ी का नियमानुसार उठान सुनिश्चित किया जाएगा। - सतीश दुहन, डीएफओ, वन विभाग, चरखी दादरी
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