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Charkhi Dadri News: 13 सूत्रीय मांगों के लिए आढ़ती एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:44 AM IST
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उपायुक्त को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारी।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। दादरी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने मंगलवार को हरियाणा स्टेट आढ़ती एसोसिएशन के आह्वान पर विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन के प्रधान मोहनलाल मकड़ानियां के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में आढ़ती वर्ग के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। जिससे आढ़ती स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा गेहूं व धान की सरकारी खरीद पर दी जाने वाली आढ़त को क्रमशः 46 रुपये व 45.88 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर कर दिया गया था। छह वर्षों के संघर्ष के बाद इसमें मात्र 4.75 रुपये व 4.73 रुपये की मामूली वृद्धि की गई। हरियाणा सरकार द्वारा अपने बजट से 9 रुपये व 9.12 रुपये का योगदान दिए जाने पर आभार जताते हुए एसोसिएशन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में गेहूं की सरकारी खरीद पर आढ़त 64.625 रुपये बनती है, जबकि केंद्र सरकार केवल 50.75 रुपये ही दे रही है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अपने बजट से आढ़त भुगतान को 9 रुपये से बढ़ाकर 13.875 रुपये प्रति क्विंटल करे, ताकि आढ़तियों को राहत मिल सके।
इसके साथ ही एमएसपी पर खरीदी जाने वाली सरसों, कपास, बाजरा, सूरजमुखी सहित सभी फसलों पर आढ़त को ढाई प्रतिशत करने तथा सभी फसलों की खरीद आढ़तियों के माध्यम से हो। इसके अलावा गेट पास जारी करने से संबंधित नियमों में बदलाव करने, लाइसेंस को लाइफटाइम करने, उतराई व सफाई की मजदूरी का अलग से भुगतान करने, बूथ लाइसेंस के एक वर्ष के रिन्यू तथा 30 हजार रुपये शुल्क के निर्णय पर पुनर्विचार करने, मार्केट फीस व एचआरडीएफ की दरों को अन्य राज्यों के अनुरूप तर्कसंगत करने आदि की मांग भी उठाई गई। आढ़तियों को असामाजिक तत्वों से मिल रही धमकियों पर चिंता जताते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
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एसोसिएशन के प्रधान मोहनलाल मकड़ानियां के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में आढ़ती वर्ग के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। जिससे आढ़ती स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा गेहूं व धान की सरकारी खरीद पर दी जाने वाली आढ़त को क्रमशः 46 रुपये व 45.88 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर कर दिया गया था। छह वर्षों के संघर्ष के बाद इसमें मात्र 4.75 रुपये व 4.73 रुपये की मामूली वृद्धि की गई। हरियाणा सरकार द्वारा अपने बजट से 9 रुपये व 9.12 रुपये का योगदान दिए जाने पर आभार जताते हुए एसोसिएशन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में गेहूं की सरकारी खरीद पर आढ़त 64.625 रुपये बनती है, जबकि केंद्र सरकार केवल 50.75 रुपये ही दे रही है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अपने बजट से आढ़त भुगतान को 9 रुपये से बढ़ाकर 13.875 रुपये प्रति क्विंटल करे, ताकि आढ़तियों को राहत मिल सके।
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इसके साथ ही एमएसपी पर खरीदी जाने वाली सरसों, कपास, बाजरा, सूरजमुखी सहित सभी फसलों पर आढ़त को ढाई प्रतिशत करने तथा सभी फसलों की खरीद आढ़तियों के माध्यम से हो। इसके अलावा गेट पास जारी करने से संबंधित नियमों में बदलाव करने, लाइसेंस को लाइफटाइम करने, उतराई व सफाई की मजदूरी का अलग से भुगतान करने, बूथ लाइसेंस के एक वर्ष के रिन्यू तथा 30 हजार रुपये शुल्क के निर्णय पर पुनर्विचार करने, मार्केट फीस व एचआरडीएफ की दरों को अन्य राज्यों के अनुरूप तर्कसंगत करने आदि की मांग भी उठाई गई। आढ़तियों को असामाजिक तत्वों से मिल रही धमकियों पर चिंता जताते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।