सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   Green Heritage: Century-old trees enrich Fatehabad's environment, biodiversity, and faith

हरित विरासत : सदियों पुराने वृक्षों से समृद्ध हो रहा फतेहाबाद का पर्यावरण, जैव विविधता और आस्था

संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 04 Jun 2026 11:20 PM IST
विज्ञापन
Green Heritage: Century-old trees enrich Fatehabad's environment, biodiversity, and faith
गांव मेहूवाला में ​स्थित 200 साल से अ​धिक पुराना जांटी का पेड़। संवाद
विज्ञापन
फतेहाबाद। प्रदेश में वनक्षेत्र के सबसे कम हिस्से वाले जिले में कई प्राचीन पेड़ अब भी हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का अहम हिस्सा बने हुए हैं। जिले में सैकड़ों पेड़ ऐसे हैं जो 200 वर्ष से अधिक पुराने हैं और जिनकी पूजा भी ग्रामीण क्षेत्रों में होती है।


वन विभाग ने 75 वर्ष से अधिक पुराने वृक्षों को चिह्नित कर वायु प्राण योजना में शामिल किया है। जिले में करीब 334 वृक्षों को पेंशन दी गई है। इनमें से लगभग 50 पेड़ 150 से 200 वर्ष पुराने हैं। ये पेड़ गांव मेहूवाला, बनगांव, डांगरा, मानावाली, भूथनकलां और जांड़ली खुर्द जैसे क्षेत्रों में स्थित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले में वन विभाग, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों की ओर से हर साल पांच लाख से अधिक पौधे लगाए जाते हैं। इन प्रयासों के बावजूद जिले में वर्तमान में लगभग 15 लाख पेड़ हैं। घटते वनक्षेत्र को बढ़ाने के लिए सरकार पंचायती भूमि, सड़कों के किनारे और सरकारी संस्थानों में पौधरोपण कर उसकी नियमित देखभाल कर रही है।
विज्ञापन
Trending Videos


------------

ग्रामीण करते हैं जांटी पेड़ की पूजा

गांव मेहूवाला के मुख्य चौक में 200 साल से अधिक पुराना जांटी का पेड़ है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के बसने की शुरुआत इसी पेड़ से हुई थी। ग्रामीण इस वृक्ष को पूजनीय मानते हुए इसकी पूजा करते हैं। इस पेड़ की ऊंचाई 10 मीटर तक है। गांव के बीच में होने के कारण इस वृक्ष की कई बार छंटाई की जा चुकी है।

------------

150 साल पुराना है जांटी का पेड़

गांव नहला में पुराने कुएं जोहड़ के किनारे 150 वर्ष से अधिक पुराना जांटी का वृक्ष है। ग्रामीणों के अनुसार यह वृक्ष जोहड़ के किनारे होने के कारण लोगों ने इसकी देखभाल की। कुएं पर जाने वाले लोग इस वृक्ष के नीचे आराम करते थे। गांव नहला में आज भी प्राचीन वृक्ष, कुएं और जोहड़ मौजूद हैं।

- -

जांडली खुर्द में 150 साल पुराना पेड़

बाबा पंचम गिरि डेरा, जांडली खुर्द में जाल का लगभग 150 वर्ष पुराना है। ये वृक्ष केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं बल्कि क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था का भी प्रतीक है। इस वृक्ष की घनी छाया में श्रद्धालु एवं ग्रामीणजन विश्राम करते हैं तथा बाबा पंचम गिरि की स्मृतियों से जुड़ी मान्यताओं का सम्मान करते हैं। गर्मियों के दिनों में इसकी विशाल छाया मनुष्य, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को राहत प्रदान करती है।

-

गांव भूथन कलां में 180 साल पुराना पेड़

भूथन कलां गांव में रामनिवास के घर के बाहर स्थित बरगद का वृक्ष लगभग 180 वर्ष पुराना है। ये वृक्ष गांव की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। इसकी शाखाएं और दूर-दूर तक फैली जटाएं इसे अत्यंत आकर्षक और अद्भुत स्वरूप प्रदान करती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गर्मी के दिनों में इसकी घनी छाया के नीचे लगभग 15 भैंस आराम से बंधी रहती हैं जिससे उन्हें तेज धूप और गर्म हवाओं से राहत मिलती है।

-

डांगरा में 200 साल पुराना है पेड़

गांव डांगरा स्थित बाबा फूल गिरी डेरे में जाल का वृक्ष है। यह वृक्ष कई दशकों पुराना है और डेरे की स्थापना के समय से ही यहां मौजूद है। श्रद्धालु इस वृक्ष को पवित्र मानते हैं तथा इसकी छाया में बैठकर पूजा, ध्यान और सत्संग करते हैं। मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे बाबा फुल गिरि ने साधना की थी जिसके कारण यह स्थान विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

-

जूना अखाड़ा के पास 160 साल पुराना पेड़

गांव मानावाली में बाबा धर्म गिरि जूना अखाड़ा के पास एक बरगद का पेड़ है जो लगभग 160 साल पुराना है। बाबा धर्म गिरि पहले गांव वालों के साथ बैठकर इसी पेड़ के नीचे बातचीत करते थे। ग्राम पंचायत का एक प्रमुख स्थान बन गया है।

-

:: जिले में 75 वर्ष से अधिक पुराने वृक्षों की वायु प्राण योजना के तहत पेंशन लागू की गई है। जिस भी गांव पुराने वृक्ष है उनकी सूचना वन विभाग को दें ताकि पेंशन लागू हो सके।

-राजेश कुमार, जिला वन अधिकारी, फतेहाबाद।

-----

गांव के मुख्य चौक में जांटी का जो वृक्ष है के बारे में मान्यता है कि गांव में सबसे पहले आकर बसे व्यक्ति ने इसी वृक्ष के नीचे अपना डेरा डाला था। गांव मेहूवाला का इतिहास काफी पुराना है। वन विभाग को इस वृक्ष की सुरक्षा के लिए चबूतरा बनाना चाहिए ताकि इसकी आयु और लंबी हो सके।

- रामसिंह कड़वासरा, ग्रामीण, मेहूवाला

---------



गांव के बीच में लगा जांटी के वृक्ष संबंध गांव के इतिहास के साथ जुड़ा हुआ है। गांव बसने के समय मकान और अन्य अवशेष वक्त के साथ खत्म हो चुके हैं लेकिन जांटी का यह वृक्ष पुरानी निशानी है। ऐसे में इस वृक्ष की सुरक्षा काफी जरूरी है।

- रामस्वरूप, ग्रामीण, मेहूवाला
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed