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Fatehabad News: बीमा कराने की तारीख बढ़ी, किसानों का भरोसा घटा
Sat, 08 Aug 2026 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:29 PM IST
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गांव मेहूवाला में नरमा की फसल में हुआ जलभराव। फाइल फोटो
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फतेहाबाद। खरीफ फसलों पर मंडरा रहे प्राकृतिक आपदा के जोखिम के बीच किसानों को फसल बीमा का सुरक्षा कवच पाने के लिए छह दिन और मिल गए हैं। सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 14 अगस्त कर दी है। हालांकि मुआवजे के इंतजार की कड़वाहट ने योजना के प्रति किसानों का भरोसा कमजोर कर दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में 11,162 किसानों का घटना व्यवस्था की सुस्ती का प्रमाण है।
इस वर्ष अब तक जिले के 14,485 किसानों ने करीब 20 हजार एकड़ भूमि के लिए खरीफ फसल का बीमा कराया है। पिछले वर्ष 25,647 किसानों ने बीमा करवाया था। कृषि एवं कल्याण विभाग की ओर से किसानों को अंतिम तिथि से पहले फसल बीमा करवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बीमा होने से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
नुकसान के करीब एक साल बाद मिला मुआवजा :
भट्टू कलां निवासी किसान जिले सिंह, जगतार धिड़ और मंदीप नथवान ने बताया कि फसल बीमा के प्रति किसानों का घटता रुझान मुआवजा राशि मिलने में होने वाली देरी का नतीजा है। फसल खराब होने के बाद भी कई किसानों को समय पर बीमा राशि नहीं मिल पाती। पिछले वर्ष भी कई किसानों को फसल नुकसान के करीब एक साल बाद मुआवजा मिला।
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गेहूं की फसल का मुआवजा भी लंबित :
किसान चांदी राम ने बताया कि गांव भूथन कलां क्षेत्र में गेहूं की फसल को ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा निजी बीमा कंपनी ने अब तक जारी नहीं किया है। प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसान पहले ही आर्थिक संकट में आ जाता है और क्लेम में छह माह या इससे अधिक की देरी परेशानी बढ़ा देती है।
चलाया जा रहा जागरूकता अभियान :
बीमा कंपनी के फील्ड अधिकारी सागर नायक ने किसानों से 14 अगस्त का इंतजार किए बिना फसल बीमा करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब होने पर योजना के तहत आर्थिक सहायता मिल सकती है। किसानों को योजना से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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इस वर्ष अब तक जिले के 14,485 किसानों ने करीब 20 हजार एकड़ भूमि के लिए खरीफ फसल का बीमा कराया है। पिछले वर्ष 25,647 किसानों ने बीमा करवाया था। कृषि एवं कल्याण विभाग की ओर से किसानों को अंतिम तिथि से पहले फसल बीमा करवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बीमा होने से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
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नुकसान के करीब एक साल बाद मिला मुआवजा :
भट्टू कलां निवासी किसान जिले सिंह, जगतार धिड़ और मंदीप नथवान ने बताया कि फसल बीमा के प्रति किसानों का घटता रुझान मुआवजा राशि मिलने में होने वाली देरी का नतीजा है। फसल खराब होने के बाद भी कई किसानों को समय पर बीमा राशि नहीं मिल पाती। पिछले वर्ष भी कई किसानों को फसल नुकसान के करीब एक साल बाद मुआवजा मिला।
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गेहूं की फसल का मुआवजा भी लंबित :
किसान चांदी राम ने बताया कि गांव भूथन कलां क्षेत्र में गेहूं की फसल को ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा निजी बीमा कंपनी ने अब तक जारी नहीं किया है। प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसान पहले ही आर्थिक संकट में आ जाता है और क्लेम में छह माह या इससे अधिक की देरी परेशानी बढ़ा देती है।
चलाया जा रहा जागरूकता अभियान :
बीमा कंपनी के फील्ड अधिकारी सागर नायक ने किसानों से 14 अगस्त का इंतजार किए बिना फसल बीमा करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब होने पर योजना के तहत आर्थिक सहायता मिल सकती है। किसानों को योजना से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।