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Fatehabad News: विद्यार्थियों की जिज्ञासा से शोध तक की उड़ान...
Sat, 08 Aug 2026 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:22 PM IST
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फतेहाबाद में आयोजित कार्यशाला में भाग लेते हुए शिक्षक स्त्रोत विभाग
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फतेहाबाद। जिलास्तरीय शिक्षक कार्यशाला में 60 शिक्षकों को विद्यार्थियों में छिपी वैज्ञानिक प्रतिभा पहचानने और उन्हें विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। पीएमश्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यशाला में शिक्षकों को स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक अध्ययन और शोध परियोजनाएं तैयार करवाने की कार्यप्रणाली समझाई गई।
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के तहत आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ जिला परियोजना समन्वयक बलवान सिंह और विज्ञान विशेषज्ञ मुकेश कुमार ने किया। सहायक परियोजना समन्वयक निहाल सिंह भी मौजूद रहे। जिला विज्ञान विशेषज्ञ मुकेश मेहता ने बताया कि विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को शोध का विषय बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विद्यार्थी आंकड़े एकत्र कर उनका विश्लेषण करेंगे और वैज्ञानिक विधियों से व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान की क्षमता और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित होगी। मुख्य वक्ता सुनील कुमार, अंकित शर्मा और लवकेश ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की विषयवस्तु और कार्यप्रणाली की जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 का मुख्य विषय सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार रखा गया है। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से हो रहे विकास और औद्योगीकरण के साथ प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पर्यावरण के लिए चुनौती बन रहा है।
प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा तथा तकनीक विकसित करना जरूरी है। कार्यशाला में शिक्षकों को विद्यार्थियों के शोध कार्य को प्रभावी दिशा देने के विभिन्न तरीकों से भी अवगत कराया गया।
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पांच प्रमुख उपविषयों पर विद्यार्थी करेंगे शोध
कार्यशाला में बताया गया कि प्रतियोगिता में 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थी दो श्रेणियों में भाग लेंगे। 10 से 14 वर्ष के विद्यार्थी कनिष्ठ वर्ग और 14 से 17 वर्ष के विद्यार्थी वरिष्ठ वर्ग में शामिल होंगे। दो-दो विद्यार्थियों का समूह मार्गदर्शक शिक्षक के सहयोग से स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। परियोजनाओं के लिए अपशिष्ट प्रबंधन के पांच आर कम करना, पुन: उपयोग, पुनर्प्राप्ति, पुनर्रचना और पुनर्चक्रण; ऊर्जा के चार ई अन्वेषण, प्रयोग, उन्नयन और विकास; जल संचयन, जल का समुचित उपयोग, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण; खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमुख उपविषय बनाया गया है। भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत कृषि, जल, स्वास्थ्य एवं कल्याण, वास्तुशिल्प, शिल्प और सांस्कृतिक पारिस्थितिक आचार पर भी अध्ययन किया जाएगा।
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पृथ्वी को स्वच्छ और सुरक्षित रखना केवल सरकार या वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। जिले के सभी विद्यालयों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन जरूरी है।
- संगीता बिश्नोई, जिला शिक्षा अधिकारी
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राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के तहत आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ जिला परियोजना समन्वयक बलवान सिंह और विज्ञान विशेषज्ञ मुकेश कुमार ने किया। सहायक परियोजना समन्वयक निहाल सिंह भी मौजूद रहे। जिला विज्ञान विशेषज्ञ मुकेश मेहता ने बताया कि विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को शोध का विषय बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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विद्यार्थी आंकड़े एकत्र कर उनका विश्लेषण करेंगे और वैज्ञानिक विधियों से व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान की क्षमता और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित होगी। मुख्य वक्ता सुनील कुमार, अंकित शर्मा और लवकेश ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की विषयवस्तु और कार्यप्रणाली की जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 का मुख्य विषय सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार रखा गया है। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से हो रहे विकास और औद्योगीकरण के साथ प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पर्यावरण के लिए चुनौती बन रहा है।
प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा तथा तकनीक विकसित करना जरूरी है। कार्यशाला में शिक्षकों को विद्यार्थियों के शोध कार्य को प्रभावी दिशा देने के विभिन्न तरीकों से भी अवगत कराया गया।
पांच प्रमुख उपविषयों पर विद्यार्थी करेंगे शोध
कार्यशाला में बताया गया कि प्रतियोगिता में 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थी दो श्रेणियों में भाग लेंगे। 10 से 14 वर्ष के विद्यार्थी कनिष्ठ वर्ग और 14 से 17 वर्ष के विद्यार्थी वरिष्ठ वर्ग में शामिल होंगे। दो-दो विद्यार्थियों का समूह मार्गदर्शक शिक्षक के सहयोग से स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। परियोजनाओं के लिए अपशिष्ट प्रबंधन के पांच आर कम करना, पुन: उपयोग, पुनर्प्राप्ति, पुनर्रचना और पुनर्चक्रण
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पृथ्वी को स्वच्छ और सुरक्षित रखना केवल सरकार या वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। जिले के सभी विद्यालयों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन जरूरी है।
- संगीता बिश्नोई, जिला शिक्षा अधिकारी