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Fatehabad News: अवसाद की गिरफ्त में युवा, मानसिक स्वास्थ्य बना बड़ी चुनौती
Fri, 31 Jul 2026 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:01 PM IST
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फतेहाबाद। शहर के नागरिक अस्तपाल में मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी का कक्ष। संवाद
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फतेहाबाद। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है लेकिन अक्सर इसकी अनदेखी कर दी जाती है। तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याओं के बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञ समय रहते परामर्श और उपचार लेने की सलाह दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मनोरोग ओपीडी में 3295 मरीज पहुंचे जिनमें 1986 अवसाद से पीड़ित मिले। पिछले दिनों में जिले में एक ही दिन तीन युवकों के आत्महत्या करने की घटना ने गंभीर चिंतन के लिए मजबूर किया है।
चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव युवाओं पर भारी पड़ रहा है। वे छोटी-छोटी बातों पर भी अत्यधिक तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे मामलों में परिवार और दोस्तों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
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बढ़ते तनाव के कारण और लक्षण
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में तनाव के कई कारण हो सकते हैं। इनमें शैक्षणिक दबाव, बेरोजगारी का डर, प्रेम संबंधों में असफलता और सामाजिक अपेक्षाएं प्रमुख हैं। कई बार आर्थिक परेशानियां भी युवाओं को गहरे अवसाद में धकेल देती हैं। परिजन अपने बच्चों में व्यावहारिक बदलावों पर ध्यान दें। चिड़चिड़ापन, अकेलापन, नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना, भूख में बदलाव और पढ़ाई या काम में मन न लगना तनाव के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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तनाव के सबसे ज्यादा मरीज
मनोरोग विभाग की बाह्य रोगी चिकित्सा सेवा में 3295 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें 453 नए मरीज शामिल रहे, जबकि 2842 मरीज दोबारा उपचार और जांच के लिए पहुंचे। विभाग की ओर से 2171 मरीजों की परामर्श सेवा भी की गई। मनोरोग विभाग में सबसे अधिक 1986 मरीज अवसाद से पीड़ित पाए गए। वहीं 494 मरीजों में चिंता और घबराहट संबंधी विकार मिले। गंभीर मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों में 59 मरीजों में मनोविदलता और 17 मरीजों में द्विध्रुवी विकार पाया गया। गंभीर अवसाद के आठ मामले भी सामने आए। बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित छह मामले दर्ज किए गए।
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तनावग्रस्त युवा अपनी समस्याओं को अपनों से साझा करें। परिवार के सदस्यों, दोस्तों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करने से मन हल्का होता है। यह तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है। शुरुआती चरण में ही मदद मांगने से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
- डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक फतेहाबाद।
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चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव युवाओं पर भारी पड़ रहा है। वे छोटी-छोटी बातों पर भी अत्यधिक तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे मामलों में परिवार और दोस्तों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
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बढ़ते तनाव के कारण और लक्षण
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में तनाव के कई कारण हो सकते हैं। इनमें शैक्षणिक दबाव, बेरोजगारी का डर, प्रेम संबंधों में असफलता और सामाजिक अपेक्षाएं प्रमुख हैं। कई बार आर्थिक परेशानियां भी युवाओं को गहरे अवसाद में धकेल देती हैं। परिजन अपने बच्चों में व्यावहारिक बदलावों पर ध्यान दें। चिड़चिड़ापन, अकेलापन, नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना, भूख में बदलाव और पढ़ाई या काम में मन न लगना तनाव के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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तनाव के सबसे ज्यादा मरीज
मनोरोग विभाग की बाह्य रोगी चिकित्सा सेवा में 3295 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें 453 नए मरीज शामिल रहे, जबकि 2842 मरीज दोबारा उपचार और जांच के लिए पहुंचे। विभाग की ओर से 2171 मरीजों की परामर्श सेवा भी की गई। मनोरोग विभाग में सबसे अधिक 1986 मरीज अवसाद से पीड़ित पाए गए। वहीं 494 मरीजों में चिंता और घबराहट संबंधी विकार मिले। गंभीर मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों में 59 मरीजों में मनोविदलता और 17 मरीजों में द्विध्रुवी विकार पाया गया। गंभीर अवसाद के आठ मामले भी सामने आए। बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित छह मामले दर्ज किए गए।
तनावग्रस्त युवा अपनी समस्याओं को अपनों से साझा करें। परिवार के सदस्यों, दोस्तों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करने से मन हल्का होता है। यह तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है। शुरुआती चरण में ही मदद मांगने से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
- डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक फतेहाबाद।