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Hisar News: चेक बाउंस मामले में दोषी की अपील खारिज, 9 माह की सजा बरकरार
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हिसार। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुदीप कौर भट्टी की अदालत ने दोषी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने आरोपी को नौ माह की साधारण कैद और 17.75 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को सही ठहराया।
मामले के अनुसार श्रीराम एग्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आरके ट्रेडिंग कंपनी के संचालक रमेश कुमार के खिलाफ धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने कंपनी से एग्रो केमिकल्स खरीदे थे और इसके भुगतान के लिए 24 जुलाई 2017 को 17.75 लाख रुपये का चेक जारी किया था।
कंपनी द्वारा चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर वह फंड्स इनसफिशिएंट टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की, लेकिन निर्धारित समय में राशि अदा नहीं की गई। इसके बाद अदालत में शिकायत दायर की गई। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए नौ माह की कैद और चेक राशि के बराबर मुआवजा देने का आदेश दिया था। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ सत्र अदालत में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने लेजर, बिल और बैलेंस कन्फर्मेशन सहित कई दस्तावेज पेश कर बकाया देनदारी साबित की।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी बकाया राशि को लेकर वैधानिक अनुमान को खंडित करने में असफल रहा। रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट है कि आरोपी पर कंपनी की देनदारी थी और उसी के भुगतान के लिए चेक जारी किया गया था। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी और आरोपी को सजा भुगतने के लिए वारंट जारी करने के निर्देश दिए।
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मामले के अनुसार श्रीराम एग्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आरके ट्रेडिंग कंपनी के संचालक रमेश कुमार के खिलाफ धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने कंपनी से एग्रो केमिकल्स खरीदे थे और इसके भुगतान के लिए 24 जुलाई 2017 को 17.75 लाख रुपये का चेक जारी किया था।
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कंपनी द्वारा चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर वह फंड्स इनसफिशिएंट टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की, लेकिन निर्धारित समय में राशि अदा नहीं की गई। इसके बाद अदालत में शिकायत दायर की गई। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए नौ माह की कैद और चेक राशि के बराबर मुआवजा देने का आदेश दिया था। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ सत्र अदालत में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने लेजर, बिल और बैलेंस कन्फर्मेशन सहित कई दस्तावेज पेश कर बकाया देनदारी साबित की।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी बकाया राशि को लेकर वैधानिक अनुमान को खंडित करने में असफल रहा। रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट है कि आरोपी पर कंपनी की देनदारी थी और उसी के भुगतान के लिए चेक जारी किया गया था। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी और आरोपी को सजा भुगतने के लिए वारंट जारी करने के निर्देश दिए।