{"_id":"6a4410a543f6e214940fc334","slug":"do-not-click-on-unknown-links-you-could-fall-victim-to-fraud-hisar-news-c-21-hsr1005-900941-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: अनजान लिंक पर न करें क्लिक, हो सकते हैं ठगी का शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: अनजान लिंक पर न करें क्लिक, हो सकते हैं ठगी का शिकार
विज्ञापन
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में मौजूद डीएसपी प्रिया शर्मा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। अमर उजाला फाउंडेशन के तहत मंगलवार को तोशाम रोड स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्ग अनुदेशक रीतू अरोड़ा ने की। इस अवसर पर उप पुलिस अधीक्षक प्रिया शर्मा ने विद्यार्थियों को साइबर ठगी से बचाव के तरीके और साइबर कानूनों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय न्याय संहिता के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम में वर्ग अनुदेशक ललित पूनिया, अनुदेशक परविंदर चोयल, अनुदेशक अनिल, अनुदेशक पवन कुमार, गणित अनुदेशक सुमित कुमार आदि मौजूद रहे।
साइबर अपराध से बचने के दिए टिप्स
थोड़े-थोड़े समय बाद सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड बदलते रहें।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
किसी अज्ञात व्यक्ति को फोन पर ओटीपी न बताएं।
डिजिटल अरेस्ट का फोन आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ बातचीत न करें।
विद्यार्थियों ने किए सवाल-जवाब
सवाल: छात्र तुषार ने पूछा कि साइबर अपराध की शिकायत कैसे करें।
जवाब: साइबर अपराध की शिकायत साइबर थाने में दें। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
सवाल: छात्रा काव्या ने पूछा कि क्या वास्तव में डिजिटल अरेस्ट किया जा सकता है।
जवाब: पुलिस के कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं है। साइबर ठग इसके जरिए लोगों को डराकर केवल वसूली करते हैं। अगर आपके पास डिजिटल अरेस्ट का कोई कॉल आता है तो घबराएं नहीं, केवल पुलिस को सूचित करें।
विज्ञापन
सवाल: छात्र विक्रम ने पूछा कि क्या साइबर ठगी के पीड़ित को रुपये वापस मिल सकते हैं।
जवाब: अगर पीड़ित तुरंत मामले की शिकायत पुलिस को कर देता है तो पुलिस उस राशि को होल्ड करवा सकती है। शिकायत में देरी होने पर पुलिस के लिए यह काम मुश्किल हो जाता है।
सवाल: छात्र अल्केज ने पूछा कि साइबर अपराध से कैसे बचा जा सकता है।
जवाब: साइबर अपराध से बचने के लिए सबसे पहले अलर्ट रहें। साइबर अपराधी अक्सर आपके डर और लालच का फायदा उठाते हैं इसलिए हमेशा समझदारी से काम लें।
विज्ञापन
साइबर अपराध से बचने के दिए टिप्स
थोड़े-थोड़े समय बाद सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड बदलते रहें।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
किसी अज्ञात व्यक्ति को फोन पर ओटीपी न बताएं।
डिजिटल अरेस्ट का फोन आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ बातचीत न करें।
विद्यार्थियों ने किए सवाल-जवाब
सवाल: छात्र तुषार ने पूछा कि साइबर अपराध की शिकायत कैसे करें।
जवाब: साइबर अपराध की शिकायत साइबर थाने में दें। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
विज्ञापन
सवाल: छात्रा काव्या ने पूछा कि क्या वास्तव में डिजिटल अरेस्ट किया जा सकता है।
जवाब: पुलिस के कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं है। साइबर ठग इसके जरिए लोगों को डराकर केवल वसूली करते हैं। अगर आपके पास डिजिटल अरेस्ट का कोई कॉल आता है तो घबराएं नहीं, केवल पुलिस को सूचित करें।
विज्ञापन
सवाल: छात्र विक्रम ने पूछा कि क्या साइबर ठगी के पीड़ित को रुपये वापस मिल सकते हैं।
जवाब: अगर पीड़ित तुरंत मामले की शिकायत पुलिस को कर देता है तो पुलिस उस राशि को होल्ड करवा सकती है। शिकायत में देरी होने पर पुलिस के लिए यह काम मुश्किल हो जाता है।
सवाल: छात्र अल्केज ने पूछा कि साइबर अपराध से कैसे बचा जा सकता है।
जवाब: साइबर अपराध से बचने के लिए सबसे पहले अलर्ट रहें। साइबर अपराधी अक्सर आपके डर और लालच का फायदा उठाते हैं इसलिए हमेशा समझदारी से काम लें।