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Hisar News: नशे की गिरफ्त में सपने, अंधेरे में युवा पीढ़ी
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हिसार। नशे के जाल में फंसकर युवा अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि नशे की गिरफ्त में आने वालों में 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। हालांकि पुलिस प्रशासन नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। वर्ष 2025 में एनडीपीएस एक्ट के तहत 154 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 124 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग काउंसिलिंग और दवाओं के माध्यम से नशा पीड़ितों का उपचार कर रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. शालू ने बताया कि नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा सबसे अधिक इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके पीछे नशे की आसान उपलब्धता, दोस्तों का दबाव, नशे को ग्लैमर से जोड़ना, मानसिक तनाव, जिज्ञासा और भावनात्मक रूप से मजबूत दिखने की प्रवृत्ति जैसे कारण हैं।
नशे से बचाव के उपाय
डॉ. शालू के अनुसार युवाओं की बातों को ध्यान से सुनना और उन्हें समझना जरूरी है। यदि किसी युवा को मानसिक आघात पहुंचा हो तो उसे मनोवैज्ञानिक के पास ले जाकर काउंसिलिंग करानी चाहिए। नशा पीड़ितों की काउंसिलिंग के लिए टोल फ्री नंबर 14446 की सहायता भी ली जा सकती है। इसके अलावा कोई सकारात्मक शौक अपनाना, परिवार के साथ समय बिताना और नशे को एक बीमारी मानकर उसका उपचार कराना आवश्यक है।
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स्वास्थ्य विभाग कर रहा नशा पीड़ितों का उपचार
जिला नागरिक अस्पताल के डीडीसी के नोडल अधिकारी डॉ. प्रशांत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नशे की लत से ग्रस्त लोगों का उपचार कर रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में महिला और पुरुष मरीजों के लिए अलग-अलग कमरों सहित 10 बेड की व्यवस्था है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 170 मरीज दवा लेने आते हैं। जिला नागरिक अस्पताल के अलावा जिले में 8 नशा मुक्ति केंद्र भी संचालित हैं, जहां नशा पीड़ितों का उपचार किया जाता है।
पुलिस विभाग नशा तस्करों पर कस रहा शिकंजा
पुलिस विभाग नशा तस्करों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर रहा है। साथ ही शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नशा पीड़ितों की पहचान कर उन्हें उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्रों में भी भेजा जाता है।
ये हुई है कार्रवाई
वर्ग - वर्ष 2025 - वर्ष 2026 (24 जून तक)
प्राथमिकी दर्ज - 154 - 124
गिरफ्तारी - 333 - 212
अफीम - 6.679 किलोग्राम - 9.130 किलोग्राम
चरस - 1.483 किलोग्राम - 5.400 किलोग्राम
डोडा चूरापोस्त - 2013.63 किलोग्राम - 568 किलोग्राम
गांजा - 233 किलोग्राम - 40 किलोग्राम
हेरोइन - 2.135 किलोग्राम - 2.978 किलोग्राम
स्मैक - 25.630 ग्राम - 00
टैबलेट - 20126 - 2435
कैप्सूल - 3528 - 00
इंजेक्शन - 60 - 60
एमटीपी - 00 - 06
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पुलिस प्रशासन नशे के खिलाफ नो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत कार्य कर रहा है। जिले में नशा तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
- सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक, हिसार।
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केस-1
डोगरान मोहल्ला निवासी एक महिला अपने पुरुष मित्र के प्रभाव में आकर चिट्टे की आदी हो गई थी। हालत यह थी कि वह नशे के बिना नहीं रह सकती थी। बाद में उसने नशा छोड़ने का निर्णय लिया और जिला नागरिक अस्पताल के डीडीसी में उपचार शुरू कराया। करीब डेढ़ वर्ष तक इलाज के बाद वह पूरी तरह नशामुक्त हो चुकी है।
केस-2
फतेहाबाद निवासी एक सरकारी कर्मचारी चिट्टे की लत का शिकार हो गया था। हालत यह हो गई थी कि वह दिनभर नशे की अवस्था में रहता था। परिवार और दोस्तों के समझाने पर उसने हिसार के जिला नागरिक अस्पताल से उपचार शुरू कराया। करीब छह माह तक नियमित दवा लेने के बाद वह पूरी तरह नशामुक्त हो चुका है।
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जिला नागरिक अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. शालू ने बताया कि नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा सबसे अधिक इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके पीछे नशे की आसान उपलब्धता, दोस्तों का दबाव, नशे को ग्लैमर से जोड़ना, मानसिक तनाव, जिज्ञासा और भावनात्मक रूप से मजबूत दिखने की प्रवृत्ति जैसे कारण हैं।
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नशे से बचाव के उपाय
डॉ. शालू के अनुसार युवाओं की बातों को ध्यान से सुनना और उन्हें समझना जरूरी है। यदि किसी युवा को मानसिक आघात पहुंचा हो तो उसे मनोवैज्ञानिक के पास ले जाकर काउंसिलिंग करानी चाहिए। नशा पीड़ितों की काउंसिलिंग के लिए टोल फ्री नंबर 14446 की सहायता भी ली जा सकती है। इसके अलावा कोई सकारात्मक शौक अपनाना, परिवार के साथ समय बिताना और नशे को एक बीमारी मानकर उसका उपचार कराना आवश्यक है।
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स्वास्थ्य विभाग कर रहा नशा पीड़ितों का उपचार
जिला नागरिक अस्पताल के डीडीसी के नोडल अधिकारी डॉ. प्रशांत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नशे की लत से ग्रस्त लोगों का उपचार कर रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में महिला और पुरुष मरीजों के लिए अलग-अलग कमरों सहित 10 बेड की व्यवस्था है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 170 मरीज दवा लेने आते हैं। जिला नागरिक अस्पताल के अलावा जिले में 8 नशा मुक्ति केंद्र भी संचालित हैं, जहां नशा पीड़ितों का उपचार किया जाता है।
पुलिस विभाग नशा तस्करों पर कस रहा शिकंजा
पुलिस विभाग नशा तस्करों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर रहा है। साथ ही शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नशा पीड़ितों की पहचान कर उन्हें उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्रों में भी भेजा जाता है।
ये हुई है कार्रवाई
वर्ग - वर्ष 2025 - वर्ष 2026 (24 जून तक)
प्राथमिकी दर्ज - 154 - 124
गिरफ्तारी - 333 - 212
अफीम - 6.679 किलोग्राम - 9.130 किलोग्राम
चरस - 1.483 किलोग्राम - 5.400 किलोग्राम
डोडा चूरापोस्त - 2013.63 किलोग्राम - 568 किलोग्राम
गांजा - 233 किलोग्राम - 40 किलोग्राम
हेरोइन - 2.135 किलोग्राम - 2.978 किलोग्राम
स्मैक - 25.630 ग्राम - 00
टैबलेट - 20126 - 2435
कैप्सूल - 3528 - 00
इंजेक्शन - 60 - 60
एमटीपी - 00 - 06
पुलिस प्रशासन नशे के खिलाफ नो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत कार्य कर रहा है। जिले में नशा तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
- सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक, हिसार।
केस-1
डोगरान मोहल्ला निवासी एक महिला अपने पुरुष मित्र के प्रभाव में आकर चिट्टे की आदी हो गई थी। हालत यह थी कि वह नशे के बिना नहीं रह सकती थी। बाद में उसने नशा छोड़ने का निर्णय लिया और जिला नागरिक अस्पताल के डीडीसी में उपचार शुरू कराया। करीब डेढ़ वर्ष तक इलाज के बाद वह पूरी तरह नशामुक्त हो चुकी है।
केस-2
फतेहाबाद निवासी एक सरकारी कर्मचारी चिट्टे की लत का शिकार हो गया था। हालत यह हो गई थी कि वह दिनभर नशे की अवस्था में रहता था। परिवार और दोस्तों के समझाने पर उसने हिसार के जिला नागरिक अस्पताल से उपचार शुरू कराया। करीब छह माह तक नियमित दवा लेने के बाद वह पूरी तरह नशामुक्त हो चुका है।